'दिल्ली में 364 दिन रहता है प्रदूषण'

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  • बीबीसी संवाददाता
अनिल दवे

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि राज्य सरकार ने एमसीडी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है.

लोगों की आंखों में जलन और सांस लेने में समस्या की शिकायत पिछले एक हफ्ते में व्यापक रूप में सामने आ रही है.

दिल्ली में प्रदूषण के भयावह स्तर पर पर्यावरण मंत्री अनिल दवे कहते हैं, "दिल्ली जैसे महाननगर में पर्यावरण की स्थिति 364 दिन से खराब है. लेकिन अलग-अलग कारणों से पिछले 10-12 दिनों में हालात और बदतर हो गए हैं. अब स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि इसे गंभीरता से देखने की ज़रूरत है."

उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को एडवाइजरी पहले ही दे दी गई थी. दवे ने कहा कि अब इस मसले पर गंभीर पहल करने की ज़रूरत है क्योंकि पेट्रोल, डीजल, लकड़ी, सूखी पत्तियां और कोयला को जलाने से जो गंदगी फैल रही है, ये सबसे अहम हैं.

दवे से बीबीसी ने जब पूछा कि दीवाली से पहले ही इसकी आशंका जताई जा रही थी कि प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ने वाला है तो आपको नहीं लगता कि सरकार देर से हरकत में आई है?

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दिल्ली में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंचा

इस पर दवे ने कहा, ''मुझे लगता है कि किसी एक चीज़ को कारण मानना कि पास के राज्यों में पलाड़ी जलने के कारण या दीवाली की वजह से ऐसा हुआ है, तो यह ठीक नहीं होगा. सच तो यह है कि 364 दिन स्थिति खराब रहती है. इसकी वज़हें हैं ऑटोमोबाइल, कार्बन मैनेजमेंट, खेतों से निकलने वाले खरपतवारों में लगातार धुआं निकलते रहना, झाड़ू लगाने के बाद कचरों में आग लगा देना, जेनरेटर को रात-दिन चलाया जाना और पुरानी डीजल कारें हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने बंद करने को कहा था."

दवे ने कहा कि एडवाइजरी जारी करने के बाद भी यदि नहीं मानी जाती है तो सख्त नियम बनाया जाना चाहिए.

उन्होंने दिल्ली के लोगों को सलाह देते हुए कहा कि वो प्रदूषण कम करने के लिए ख़ुद भी छोटे-छोटे क़दम उठाएं.

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