बंजर ज़मीन को हरा-भरा बनाने का चमत्कार

  • 16 नवंबर 2016
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Image caption सूखे प्रभावित इलाके में सिख किसानों ने किया कमाल

पंजाब के किसानों के एक समूह ने तमिलनाडु के सूखा प्रभावित ज़िला रामनाथपुरम में चमत्कार कर दिखाया है. यहां न तो बारिश होती है और न ही कोई नदी है. लेकिन पंजाब के इन किसानों ने इस इलाक़े को हरा-भरा कर दिया है.

इन्होंने आम, पपीता, अमरूद और नारियल के पेड़ लगाकर पूरे इलाक़े में हरित क्रांति ला दी है. इनकी मेहनत के नतीजों को देखकर स्थानीय लोगों में भी खेती के प्रति उम्मीद जगी है.

रामनाथपुरम से गुज़रते हुए इस इलाक़े में बंजर भूमि को आसानी से महसूस किया जा सकता है. आसपास केवल ताड़ के पेड़ दिखते हैं. यहां की ज़मीन पर झाड़ियां ख़ूब दिखती हैं. ये झाड़ियां सूखा प्रभावित भूमि पर उगती हैं. इनका इस्तेमाल केवल जलाने में ही किया जा सकता है.

यहां की ज्यादातर भूमि बंजर है. यहां के निवासियों को खेती से उम्मीद न के बराबर है क्योंकि सिंचाई के लिए बारिश के पानी के अलावा कोई विकल्प नहीं है. समस्या यह है कि यहां बारिश भी नहीं होती है.

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Image caption बंजर इलाके में हरित क्रांति लाने वाले किसान

वल्लंडाई पहुंचने पर सिख किसान तत्काल खेती के बार में बताने लगते हैं. हालांकि यहां सिंगल सड़क है लेकिन ये आपको 'अकाल फार्म्स' तक पहुंचाने में मदद करेंगे. यहां पहुंचते ही आपकी आंखें चमक उठेंगी. यहां लाइन से आम और नारियल के पेड़ मिलेंगे.

रामनाथपुरम में इन सभी पेड़ों का होना किसी जादू से कम नहीं है. आज तक आम और नारियल की यहां पर खेती नहीं हुई. यह सब देखने के बाद बंजर में यह किसी चमत्कार की तरह लगता है. इस कृषिक्षेत्र के बाहर चारों तरफ बंजर भूमि दिखती है जबकि यहां की ज़मीन फलों के वृक्षों से ढकी है.

हम भले इसे चमत्कार कह लें लेकिन यह चमत्कार नहीं बल्कि 17 सिख परिवारों की कड़ी मेहनत का नतीजा है. इन्होंने तमिलनाडु के इस पिछड़े क्षेत्र में एक हरा-भरा पंजाब पैदा कर दिया है. मनमोहन सिंह और 46 के साल के दर्शन सिंह 2007 में तमिलनाडु के रामनाथपुरम ज़िला पहुंचे थे.

ये अपने गुरु के सलाह पर यहां पहुंचे थे. इनके गुरु हिमाचल प्रदेश में बाग़बानी के रिटायर्ड प्रोफ़ेसर हैं. इनके गुरु ने इन्हें सलाह दी थी कि वे बदलाव के लिए काम करें. उन्होंने कहा था कि वे मुश्किल हालात को आसान बनाकर मिसाल क़ायम करें.

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Image caption इनकी मेहनत की चर्चा पूरे इलाके में

इन्हें गुरु ने कहा था कि गांव और पिछड़े इलाक़ों में बंजर भूमि को हरियाली में तब्दील करें. मनमोहन सिंह ने कहा कि उन्होंने गुरु की प्रेरणा पर ही सारा काम किया.

मनमोहन सिंह ने कहा, ''हमने सारा काम बाबा के मार्गदर्शन में किया है. यहां के स्थानीय किसानों से 20 हज़ार रुपये प्रति एकड़ की दर से ज़मीन ख़रीदी थी. यहां किसानों को अपनी ज़मीन पर भरोसा नहीं था."

वो कहते हैं, "हमने यहां ड्रिप इरिगेशन सिस्टम को अपनाया. यहां पर लोगों को इस सिस्टम के बारे में पता नहीं था. यहां के ज़्यादातर किसान मौसमी बारिश की बाट जोहते हैं. हालांकि हर बार इन्हें बारिश धोखा दे जाती है. यहां के ज़्यादातर किसान दिवालिया हो गए हैं. इन्होंने अपनी ज़मीन बेच दी और शहर की तरफ़ पलायन कर गए. शहर में ये अब नौकर का काम कर ख़ुश हैं."

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Image caption प्रार्थन का साथ करते हैं दिन की शुरुआत

इन्होंने यहां पर 15 बोरवेल लगाए और ड्रिप इरिगेशन को अपनाया. इसमें पानी का बेहद उचित इस्तेमाल होता है. ये दिन की शुरुआत रात दो बजे अरदास के साथ करते हैं और शाम 6 बजे तक काम करते हैं. पिछले आठ सालों से इनकी कड़ी मेहनत मिसाल बन गई है. इसका परिणाम हर कोई अब देख सकता है.

मनमोहन सिंह और उनकी टीम को मदुरै की कृषि यूनिवर्सिटी से ड्रिप इरिगेशन सिस्टम अपनाने की सलाह मिली थी. इन्होंने खेती के लिए वैज्ञानिक तरीक़े को अपनाया और नारियल, आम, अमरूद की खेती से अपने कारवां को आगे बढ़ाया. शुरू में इन्होंने अच्छी गुणवत्ता वाले पौधों को विकसित किया ताकि यहां के जलवायु के मुताबिक़ फिट हो.

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