नोटबंदी पर विपक्ष ने अवसर गंवाया

  • ज़ुबैर अहमद
  • बीबीसी संवाददाता दिल्ली
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प्रधानमंत्री सोमवार को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच सौ और एक हजार रुपए के पुराने नोट को बदल कर नए नोटों के लाने के फैसले से आम लोगों को कष्ट हो रहा है इससे किसी को इनकार नहीं, प्रधानमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि 50 दिनों के बाद लोगों की तकलीफें दूर हो जाएंगी.

इस पर विपक्ष की अब तक की भूमिका से जनता और उनके समर्थकों में मायूसी नज़र आती है. देश की सियासत पर नज़र रखने वालों में से कई ये कह रहे हैं कि ये विपक्ष के लिए सरकार को पछाड़ने का एक अच्छा मौक़ा था जिसे उसने गँवा दिया है.

ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री के अचानक एलान से विपक्ष बौखला गया है. प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह मज़े लेकर विपक्ष की खिल्ली उड़ा रहे हैं, जैसा कि शाह का बयान कि मायावती और मुलायम के चेहरे से चमक ग़ायब हो गई है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष चारों खाने चित नज़र आता है.

बेशक विपक्ष के अहम नेताओं के बयान ज़रूर आ रहे हैं. लेकिन एक्शन ग़ायब है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर मुलायम सिंह यादव और मायावती इसका विरोध ज़रूर कर रहे हैं लेकिन इसके आगे कुछ नहीं.

कम से कम राहुल गाँधी दिल्ली के एक बैंक के सामने आम लोगों के साथ क़तार में खड़े नज़र तो आए. ये बात और है कि कांग्रेस पार्टी भी इसको भुनाने का अवसर गंवाती जा रही है. अरविंद केजरीवाल का विरोध सोशल मीडिया से आगे कभी नहीं बढ़ पाया है.

अगर विपक्ष को ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री ने ये क़दम उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनाव को नज़र में रखकर उठाया है तो विपक्ष को इसे मुद्दा बनाने से किस ने रोका है? सच तो ये है कि विपक्ष, खासतौर से कांग्रेस पार्टी, 2014 के चुनाव में करारी हार से अब तक उबर नहीं पाई है.

एक्शन के थोड़े बहुत आसार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कोशिशों में ज़रूर नज़र आ रहे हैं. वो मंगलवार को दिल्ली आ रही हैं. उनकी कोशिश है कि अधिक से अधिक सांसदों के साथ एक मोर्चा बनाकर राष्ट्रपति भवन जाएँ और राष्ट्रपति से कहें कि सरकार की नोटबंदी से जनता कितनी परेशान है.

इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार को राज्य सभा में घेरने की तैयारी कर रहा है. राज्य सभा में भाजपा को बहुमत प्राप्त नहीं है. बुधवार से संसद का नया सत्र शुरू हो रहा है. सरकार को कई अहम बिल पारित कराने हैं जिसके लिए मोदी सरकार को विपक्ष की ज़रुरत पड़ेगी.

अब देखना ये है कि इस सत्र में विपक्ष नोटों की वापसी के मुद्दे पर सरकार को कितना झुका सकती है.

लेकिन प्रधानमंत्री के अब तक के सार्वजनिक भाषणों से ऐसा लगता है कि सरकार झुकने वाली नहीं. सोमवार को ग़ाज़ीपुर में अपने एक भाषण में उन्होंने कहा, "केवल वो लोग परेशान हैं, जो बेईमान हैं. लेकिन उनके लिए कोई और चारा भी नहीं है".

प्रधानमंत्री ने इस क़दम को भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ एक 'जिहाद' की तरह से जनता के सामने पेश किया है. जनता परेशान ज़रूर है लेकिन इस एक्शन के खिलाफ नज़र नहीं आती.

उनकी ये बात कि भ्रष्टाचार ख़त्म करने के इस काम में लोगों को थोड़ी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है, जनता के दिलों पर असर कर सकती है.

काला धन और भ्रष्टाचार एक ऐसा मुद्दा है जिसके खिलाफ क़दम को लोगों का हमेशा समर्थन हासिल रहेगा. विपक्ष ये जानता है.

यही वजह है कि सभी विपक्षी नेताओं ने कहा है कि वो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं लेकिन सरकार ने जिस तरह से ये क़दम उठाया वो उसका विरोध कर रहे हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि विपक्ष का ये विरोध अब तक बेअसर रहा है.