इंदिरा जैसी 'सख्त' छवि चाहेंगे नरेंद्र मोदी?

  • 19 नवंबर 2016
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इन दिनों देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फ़ैसले की चर्चा है. केंद्र सरकार इसे ब्लैक मनी और जाली नोटों के ख़ात्मे को लेकर भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा क़दम बता रही है.

वहीं दूसरी ओर पीएम मोदी के विरोधी इसे फ़ैसले की आलोचना कर रहे हैं और इसके उद्देश्य पर सवाल उठा रहे हैं. देश की आम जनता भी इस मुद्दे पर बंटी नज़र आती है. एक ओर मोदी के समर्थक नज़र आते हैं, तो दूसरी ओर विरोधी, जो बैंकों के सामने लगी लंबी क़तारों को मुद्दा बना रहे हैं.

ये हक़ीक़त है कि बीते ढाई साल में ये मोदी और उनकी सरकार का सबसे बड़ा फ़ैसला है. आठ नवंबर, 2016 को उन्होंने देश के नाम दिए अपने संबोधन में आधी रात से 500 और 1000 के पुराने नोट के चलन को बंद करने की घोषणा की थी.

भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमान है कि देश की वित्तीय व्यवस्था में करीब दस लाख करोड़ रुपये आएंगे. हालांकि, इसे लागू करने को लेकर हो रही मुश्किलों की वजह से चलते अर्थव्यवस्था के नुकसान को लेकर आधिकारिक आंकड़ा अभी तक नहीं आया है, लेकिन रफ़्तार मंद हुई है.

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इस फ़ैसले से ठीक पहले पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और सीमा रेखा पर 29 सितंबर को हुई कथित सर्जिकल स्ट्राइक को भी मोदी सरकार का बड़ा फ़ैसला माना जा सकता है.

ऐसे में विश्लेषकों के बीच बहस छिड़ी हुई है कि क्या कठोर फ़ैसले लेने के मामले में नरेंद्र मोदी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से की जा सकती है. इंदिरा गांधी की 19 नवंबर को जयंती है. ऐसे में एक नज़र इंदिरा के उन फ़ैसलों पर जो बेहद कठोर माने जाते हैं लेकिन साथ ही उनमें से कई को विवादास्पद भी माना जाता है जिसके लिए उनकी काफ़ी आलोचना भी होती है.

1. 1971 का युद्ध: भारत और पाकिस्तान के बीच तीसरे युद्ध के दौरान इंदिरा गांधी के कठोर तेवरों की बहुत चर्चा होती है. वो भी तब जब माना जा रहा था कि वैश्विक मंच पर अमरीका पाकिस्तान को शह दे रहा था. उस युद्ध में पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा था. तब दुनिया को बांग्लादेश के तौर पर एक नया मुल्क़ मिला. उनके इस फ़ैसले के चलते उन्हें 'आयरन लेडी' भी कहा जाने लगा.

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2. 1974, परमाणु परीक्षण: इंदिरा गांधी ने बतौर प्रधानमंत्री मई, 1974 में परमाणु परीक्षण करने की मंज़ूरी दी. राजस्थान के पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण की भनक दुनिया के पांच शक्तिशाली देशों तक को नहीं लगी थी. इस परीक्षण के साथ ही भारत ने परमाणु संपन्न देश होने की दिशा में क़दम बढ़ाए थे.

3. 1967, हरित क्रांति: जनवरी, 1966 में जब इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनीं, तब देश में भुखमरी की स्थिति थी. भारत अनाज के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर था. 1967 में भारत में हरित क्रांति शुरू हुई, जिसमें उनका अहम योगदान माना जाता है. और कुछ ही साल में भारत अनाज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन गया.

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4. 1969, बैंकों का राष्ट्रीयकरण: 14 जुलाई, 1969 की आधी रात को इंदिरा गांधी ने 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया. उनके लिए ये फ़ैसला आसान नहीं था. कांग्रेस के अंदर भी इस फ़ैसले को लेकर एक राय नहीं बन पाई थी. लेकिन उनके इस फ़ैसले के चलते ही देश में आर्थिक स्थायित्व का दौर शुरू हुआ. छोटी-छोटी कंपनियों और कुटीर उद्योग धंधों को नया जीवन मिला.

5. 1971, गरीबी हटाओ: 1971 के आम चुनाव से ठीक पहले इंदिरा गांधी ने देश भर में 'गरीबी हटाओ' का नारा दिया. गरीबों और बेरोज़गारों के लिए उन्होंने योजनाएं शुरू कीं, लेकिन समय के साथ उनका ये नारा अपनी चमक खोता गया. बावजूद इसके नरेंद्र मोदी के चुनावी नारे 'अच्छे दिन आने वाले हैं' से पहले तक यह भारत में सबसे बड़ा चुनावी नारा बना रहा. जाने-माने पत्रकार बी जी वर्गीज़ ने न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा था, "इंदिरा इस विचार को आगे नहीं बढ़ा पाईं, ठीक से लागू नहीं कर पाईं."

6. राष्ट्रपति शासन:इंदिरा गांधी क़रीब 16 साल तक देश की प्रधानमंत्री रहीं. इस दौरान वह राष्ट्रपति शासन को हथियार की तरह इस्तेमाल को लेकर ख़ासी बदनाम रहीं. 1966 से लेकर 1977 और 1980 से लेकर 1984 के अपने दो कार्यकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने भारतीय संविधान की धारा 356 का इस्तेमाल करके 50 बार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू कर चुकी थीं. नरेंद्र मोदी मई, 2014 से भारत के प्रधानमंत्री हैं और पांच बार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करा चुके हैं.

इन फ़ैसलों के अलावा इंदिरा गांधी कुछ अन्य कठोर फ़ैसलों के लिए भी याद की जाती हैं, जो विवादास्पद भी रहे.

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7. जून, 1975 आपातकाल: 25 जून, 1975 को इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी. इसके बाद अगले 21 महीनों तक देश भर में आपातकाल लागू रहा. विपक्ष के सभी बड़े नेताओं को रातों-रात जेल में डाल दिया गया. प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया. इन सबका असर ये हुआ कि 1977 में हुए आम चुनाव में इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी की क़रारी हार हुई. आपातकाल को भारतीय इतिहास का काला अध्याय माना जाता है.

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8. जून, 1984 ऑपरेशन ब्लू स्टार: सिख चरमपंथी नेता जरनेल सिंह भिंडरावाला के समर्थकों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया था. इंदिरा गांधी की सरकार ने सेना को स्वर्ण मंदिर पर हमला करने का निर्देश दिया. एक जून, 1984 से आठ जून, 1984 तक चले इस अभियान में सैकड़ों लोग मारे गए. परिसर को काफ़ी नुकसान हुआ. अभियान में भिंडरावाला की मौत हो गई. इस ऑपरेशन के चार महीने बाद ही सिख अंगरक्षक बेअंत सिंह और सतवंत ने इंदिरा गांधी की हत्या कर दी.

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