ओडिशा: ज़हरीले फल खाने से हुई बच्चों की मौत

  • 19 नवंबर 2016
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी के एक विशेषज्ञ दल के अनुसार ओडिशा में हाल में हुई बच्चों की मौत का कारण केवल जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी नहीं थी.

दल का कहना है कि कई बच्चों की मौत एक तरह का ज़हरीला फल खाने से हुई है.

पिछले दिनों ओडिशा में करीब 100 बच्चों की मौत हो गई थी. बताया गया था कि इन बच्चों की मौत जापानी इंसेफेलाइटिस से हुई थी.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी का कहना है कि मृत बच्चों के पेशाब की जांच की गई थी और जिसमें से कई बच्चों के पेशाब में ज़हरीले फल के अंश पाए गए हैं.

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Image caption जंगली चाकुंडा

ओडिशा में इस फल को जंगली चाकुंडा कहा जाता है.

विशेषज्ञ दल के प्रमुख जैकब जॉन का कहना है कि ये फल एक फली की तरह दिखता है और इसे खाने से दिमाग़, ह्रदय, गुर्दे और मांसपेशियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

इस मामले पर विशेषज्ञ दल की रिपोर्ट के बाद राज्य की स्वास्थ्य सचिव आरति आहुजा ने कहा है कि 32 बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से हुई है और बाकी बच्चों की मौत ज़हरीला फल खाने की वज़ह से हुई है.

ओडिशा में ये फल बारिश के मौसम में पाया जाता है और आसानी से मिल जाता है. आमतौर पर देखा गया है कि इस फल को आदिवासी खाते हैं लेकिन ये फल ज़हरीला होता है इसके बारे में लोगों को कम ही जानकारी है.

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Image caption जंगली चाकुंडा के बीज

ओडिशा में मलकानगिरी इलाके में सबसे ज्यादा इंसेफेलाइटिस के मामले सामने आए थे और यंहा पर सबसे ज्यादा मौतें हुई थी.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने भी हाल में ज़िले का दौरा किया था.

मामले में राष्ट्रीय शिशु अधिकार सुरक्षा आयोग भी रिपोर्ट की मांग कर चुका है. राज्य में बच्चों की मौत को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं.

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