मां, चाची, पूजा...चिल्लाता रहा, कोई नहीं बचा

  • 21 नवंबर 2016
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रेल दुर्घटना में इस युवक के परिवार के चार लोगों की मौत हो गई.

20 नवंबर की रात पटना-इंदौर एक्सप्रेस में कई यात्रियों के लिए आख़िरी रात रही. इस हादसे को उस ट्रेन में सवार लोगों से सुनते हुए आपकी आंखें नम हो जाएंगी. यह ऐसे ही एक पीड़ित की कहानी है जिसकी मां, चाची, बहन और दादी साथ निकली थीं, लेकिन सब मिलीं पॉस्टमॉर्टम रूम में. यदि वह एस 2 से एस 11 में नहीं गया होता तो उसके लिए भी यह आख़िरी रात होती. पढ़ें उस युवा की जुबानी पूरी कहानी-

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Image caption घटनास्थल पर राहत बचावकर्मी

मैं कोच नंबर एस 11 में था. मैं अपने परिवार के साथ पहले एस 2 कोच में था. वहां से वे एक आदमी को एस 11 कोच में भेज रहे थे ताकि हमारा पूरा परिवार साथ रहे. लेकिन मैं ख़ुद ही एस 11 कोच में चला गया. मैं रात में 10 बजे के आसपास चला गया था. एस 11 कोच में जाकर सो गया. उस कोच में ही जाने की वजह से मेरी जान बच गई.

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Image caption पटना-इंदौर एक्सप्रेस हादसे के बाद

जब यह हादसा हुआ तो मैं सो रहा था. अचानक से ज़ोर का झटका लगा. ऐसा लगा कि किसी ने चेन खींच दिया हो. इसी झटके से मेरी नींद खुल गई. एक बार में पूरी गाड़ी रुक गई. तीन-चार झटके लगे थे. मैं अपनी जगह से नीचे आ गया था. मैं बाहर आया तो कई कोच पलटे हुए थे. मेरे परिवार वाले एस 2 में थे. वह कोच भी इस हादसे का शिकार हुआ.

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Image caption इस हादसे में अब तक 120 लोगों की जान जा चुकी है

इसी कोच में मेरी मां, बहन, चाचा, दादी, चचेरी बहन थीं. मेरे परिवार से कुल पांच लोगों के लिए यह आख़िरी सफ़र रहा. मैं अपने कोच से निकलते ही एस 2 की तरफ़ भागा. वहां मुझे कोई भी नहीं मिला. सारे लोग मुझे पोस्टमॉर्टम रूम में मिले. तब मैंने उन्हें ज़िंदा खोजने की काफ़ी कोशिश की थी. पोस्टमॉर्टम रूम के बारे में मत पूछिए. मेरा दिमाग़ काम नहीं कर रहा था. पूरी तरह से पागल हो गया था. मैं अपनों को खोजते हुए रोता रहा, चिल्लाता रहा. पूजा, मम्मी, दादी की अवाज़ लगाता रहा.

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