कम हुई है नवजोत सिंह सिद्धू की चमक?

  • रविंदर सिंह रॉबिन
  • पंजाब से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
नवजोत सिंह सिद्धू.

क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने सोमवार को कांग्रेस का हाथ थाम लिया. सिद्धू की पत्नी के साथ पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह भी कांग्रेस में शामिल हो गए.

नवजोत सिंह सिद्धू को अरुण जेटली राजनीति में लेकर आए थे और सिद्धू के भाजपा से दूरी बनाने का कारण भी जेटली ही बने.

साल 2014 के आम चुनाव में अमृतसर के सांसद नवजोत सिंह सिद्धू का टिकट काटकर भाजपा ने अरुण जेटली को वहां से उम्मीदवार बनाया. सिद्धू ने जेटली के लिए चुनाव प्रचार नहीं किया. जेटली को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा.

अप्रैल 2016 में भाजपा ने सिद्धू को राज्यसभा भेजा. लेकिन सदस्यता लेने के बाद सिद्धू राज्यसभा की जगह कॉमेडी शो में चले गए.

पंजाब में विधानसभा चुनाव की राजनीति गरमाई तो सिद्धू का नाम आम आदमी पार्टी (आप) से जोड़ा जाने लगा, हालांकि आप ने कहा कि इस बारे में अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ है.

उन्होंने 18 जुलाई को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उनकी पत्नी और अमृतसर से विधायक नवजोत कौर सिद्धू ने भी इस्तीफ़ा दे दिया.

सिद्धू ने कहा कि भाजपा ने उनसे राज्यसभा की सदस्यता के बाद पंजाब से दूर रहने और अकाली दल के खिलाफ नहीं बोलना को कहा था. उन्होंने स्पष्ट किया कि वो पंजाब से दूर नहीं रह सकते हैं, इसलिए भाजपा छोड़ने के लिए मजबूर हैं.

ऐसी अटकलें थीं कि नवजोत सिंह सिद्धू आप में शामिल होंगे. उनकी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ बैठकें भी हुईं, लेकिन बात किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई.

कहा जाता है कि सिद्धू आप से अपने लिए, पत्नी और अपने कुछ लोगों के लिए विधानसभा चुनाव की टिकट मांग रहे थे. लेकिन आप का संविधान एक ही परिवार के दो लोगों को टिकट देने से रोकता है.

हालांकि सिद्धू ने इन सभी दावों का खंडन किया.

इसके बाद उन्होंने पूर्व हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह और लुधियान के दो विधायक भाइयों के साथ 'आवाज़-ए-पंजाब' के नाम से एक राजनीतिक मंच बनाया.

उनका कहना था कि उनका मंच चुनाव में उन लोगों का साथ देगा जो पंजाब के लिए कुछ अच्छा करना चाह रहे हैं. लेकिन उन्होंने उन लोगों का नाम नहीं बताया जिनका वो साथ देना चाहते हैं. इस तरह उन्होंने अपने विकल्पों को खुला रखा.

बाद में 'आवाज़-ए-पंजाब' में सिद्धू के साथ आए लुधियाना के दोनों विधायकों ने आप में शामिल होने का फ़ैसला किया.

नवजोत कौर सिद्धू और परगट सिंह के बाद अब सिद्धू कांग्रेस में शामिल होंगे या नहीं, यह फ़िलहाल रहस्य बना हुआ है.

इस बीच ऐसी अटकलें भी हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफ़े से खाली हुई अमृतसर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में उम्मीदवार बना सकती है. लेकिन कांग्रेस या सिद्धू ने इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है.

पंजाब की राजनीति पर नज़र रखने वालों का मानना है कि जिस समय नवजोत सिंह सिद्धू की आम आदमी पार्टी से बातचीत चल रही थी, उस समय अगर वो आप में शामिल हो गए होते तो शायद उन्हें बड़ी सफलता मिलती.

लेकिन जिस तरीके से पिछले तीन-चार महीने में नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर के अलग-अलग पार्टियों से बातचीत की ख़बरें छपी हैं, उन्हें देखकर ऐसा संदेश गया कि क्या वो मोल-भाव कर रहे हैं? इससे उनकी चमक कम हुई है.

ऐसे हालात में, विधानसभा चुनाव से महज़ तीन महीने पहले, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सिद्धू को अपने-अपने पाले में करने की इच्छा दोनों पक्षों के बीच कड़े मुकाबले का संकेत है.

विशेषज्ञों ये मान रहे हैं कि आज की स्थिति में पंजाब के अगले विधानसभा चुनाव में मुख्य मुक़ाबला कांग्रेस और आप में ही होने वाला है.

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