कुत्तों के लिए रखते हैं विदेशी कोच

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जान बचाते कुत्ते

भारत में हर साल सर्दियों में कुत्तों के शौकीन और कुत्तों की ब्रीडिंग को पेशे के रूप में अपनाने वाले लोग देश भर में होने वाले डॉग शो में भाग लेते हैं.

देश में इस तरह की प्रदर्शनियों की पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है. भारत में पहला डॉग शो 1896 में अंग्रेज़ों ने आयोजित किया था.

आजकल केनेल क्लब ऑफ इंडिया ही देश भर में इस तरह के शो का आयोजन करता है.

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यॉर्कशर टेरीयर नस्ल का कुत्ता अपने मालिक के साथ.

साधारण लोग इसे कुत्तों की सौंदर्य प्रतियोगिता समझ सकते हैं. लेकिन डॉग शो से जुड़े लोग इसे काफ़ी गंभीरता से लेते हैं.

वे विदेशों से बेहतरीन नस्ल के कुत्ते मंगवाते हैं, उनकी परवरिश के लिए काफ़ी पैसे खर्च कर विदेशी प्रशिक्षक को नौकरी पर रखते हैं और हवाई यात्रा पर पैसे खर्च कर कोने-कोने में होने वाले शो में भाग लेते हैं.

इनमें से ज़्यादातर लोग इसे पेशे के रूप में अपनाते हैं और पैसे कमाने की उम्मीद भी करते हैं.

दिल्ली में रहने वाले फ़ोटोग्राफ़र करण वैद के माता-पिता कई बार डॉग शो में जज की भूमिका में होते हैं. करण ख़ुद डॉग शो में मौजूद रहते हैं और उसकी तस्वीरें उतारते हैं.

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उत्तर प्रदेश के बरेली में आयोजित शो में फ्रेंच बुलडॉग.

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दिल्ली में 2015 में आयोजित एक शो में भाग लेते लैब्रडर नस्ल के कुत्ते.

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मुंबई में 2015 में आयोजित शो के दौरान ग्रेट डेन नस्ल का कुत्ता.

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कोलकाता में आयोजित डॉग शो में क्रॉकर स्पैनियल नस्ल का कुत्ता.

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तमिलनाडु के नागरकोल में 2014 में हुए डॉग शो में इंगलिस सेटर और जर्मन शेफ़र्ड ने पुरस्कार जीते थे.

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पंजाब के लुधियाना में 2013 में आयोजित डॉग शो में एक हैंडलर.

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नवंबर 2014 में पटियाला में आयोजित एक शो में डोबरमैन.

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पंजाब के लुधियाना में एक डॉग शो के पहले लैब्रडर और पग नस्ल के कुत्ते.

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जयपुर, राजस्थान में 2014 में हुए डॉग शो के एक जज ने कुत्तों के प्रति अपना प्रेम कुछ इस तरह दिखाया.

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उत्तराखंड में 2014 में एक शो के दौरैान एक मिनिएचर पिंशर

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