नोट छापने के लिए रिटायर्ड कर्मचारी भी बुलाए

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नोटबंदी के चलते मध्य प्रदेश के देवास स्थित सिक्युरिटी प्रिंटिग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड की यूनिट बीएनपी में आजकल 24 घंटे नोट छापने का काम चल रहा है. देवास में इस वक़्त सबसे ज्यादा 2000 रुपये के नोट छापे जा रहे हैं.

हालात ये है कि रिटायर्ड कर्मचारियों को भी काम पर वापस बुला लिया गया है.

उन्हें लगभग 15 हज़ार रुपये तक वेतन दिया जा रहा है.

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प्रेस के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "ऊपर से नीचे तक हर कर्मचारी इस वक़्त दबाव में काम कर रहा है. पहले कभी भी इस तरह के दबाव का सामना नहीं करना पड़ा है. इस वक़्त यहां के कर्मचारी देश की ज़रूरत पूरी करने में लगे हैं. वहीं उन्हें डर है कि काम में थोड़ी सी ग़लती उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकती है."

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बताया जा रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया को हर रोज़ देवास से दो कंटेनर नोट भेजे जा रहे हैं. वही लंच के समय को भी कम कर दिया गया है.

देवास में काम करने वाले एक कर्मचारी का कहना है कि रविवार की छुट्टी तक रद्द कर दी गई है और उन पर काम का बहुत ज्यादा दबाव है.

वहीं कर्मचारियों के लिए इन्सेंटिव की घोषणा भी की गई है ताकि वो ज्यादा से ज्यादा काम करें.

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इसके अलावा उन्हें ओवर टाइम करने के लिए भी कहा जा रहा है.

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हालांकि आधुनिकीकरण के चलते ज्यादातर काम मशीनों से हो रहे हैं, लेकिन स्थिति ऐसी बन गई है कि बैंक नोट प्रेस में अब काम रूक ही नहीं रहा है.

कमोबेश यही स्थिति होशंगाबाद स्थित नोट का कागज़ बनाने वाली सिक्योरिटी पेपर मिल (एसपीएम) की भी है. यहां रोज़ाना पीएम-5 मशीन के ज़रिये 24 घंटे नोटों का काग़ज़ तैयार किया जा रहा है.

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होशंगाबाद से अब तक सौ टन कागज बना कर भेजा जा चुका है. एक मैट्रिक टन काग़ज़ से लगभग तीन लाख नोट बनाए जा सकते है.

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होशंगाबाद में भी तकरीबन एक हज़ार कर्मचारी नोटों का काग़ज़ तैयार करने के काम में जुटे हैं.

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