'मोबाइल वॉलेट बन सकता है चलता फिरता टाइम बम'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
'मोबाइल वॉलेट बन सकता है चलता फिरता टाइम बम'

भारत सरकार के नोटबंदी के फ़ैसले के बाद नकदी के लेन-देन की जगह ई-वॉलेट यानी मोबाइल बटुए का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.

इससे लोगों को सुविधा तो मिली है लेकिन क्या इससे कोई ख़तरा भी है?

मोबाइल को बटुए की तरह इस्तेमाल करने यानी ई-वॉलेट का प्रयोग करने से दो तरह के ख़तरे बिल्कुल साफ़ हैं. साइबर क्राइम से जुड़े ख़तरे और साइबर सिक्योरिटी से जुड़े ख़तरे.

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आपका ध्यान जिस तरह मोबाइल पर है, साइबर क्राइम से जुड़े लोगों का ध्यान भी इस पर उसी तरह से है. आपका मोबाइल निशाने पर हर समय और हर जगह रहता है. मोबाइल को सुक्षित रखना आपकी अपनी ज़िम्मेदारी है.

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मोबाइल पर होने वाले साइबर क्राइम की तादाद लगातार बढ़ रही है. कंप्यूटर पर होने वाले अपराध मोबाइल पर और आसानी से किए जा सकते हैं.

जहां तक सुरक्षा की बात है, मोबाइल फ़ोन बहुत अधिक सुरक्षित नहीं है. इसकी सुरक्षा में सेंध लगा सकते हैं हैकर्स और तमाम तरह के नॉन स्टेट एक्टर्स.

मोबाइल वॉलेट से भी पॉकेटमारी हो सकती है

जिन मोबाइल ऐप्स को कोई नहीं डाउनलोड करता!

वो आपके बारे में तमाम तरह की जानकारी हासिल करना चाहते हैं. वो आपकी सेव्ड जानकारी हासिल कर उसका दुरुपयोग कर सकते हैं या दूसरों को भी दे सकते हैं.

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तो इसका समाधान क्या है? क्या कोई हिदायत बरतनी चाहिए?

यदि आप मोबाइल पर कोई ऐप डाउनलोड करते हैं तो उससे जुड़ी पूरी जानकारी अच्छी तरह पढ़ लें. थोड़ी सी लापरवाही करने से भी आपका फ़ोन 'चलता फिरता टाइम बम' बन सकता है.

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कई ऐप आपकी जानकारी या इजाज़त के बिना आपका डाटा बाहर भेजते रहते हैं. आपकी लोकेशन को कैप्चर करते हैं. वो आपके तमाम कोड, पास वर्ड, बैंक के डीटले दूसरों को दे सकते हैं.

मोबाइल पर तमाम तरह के मैसेज या ईमेल आते रहते हैं. इन मैसेज और ईमेल में वाइरस हो सकते हैं. मोबाइल मे वायरस घुसाना आसान है. जिन्हें आप नहीं जानते, उनके मैसेज न खोलें तो यही आपके लिए अच्छा है.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से हुई बातचीत पर आधारित)

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