जयललिता: 'भ्रष्टाचार, जेल और राजनीतिक बदला'

तमिल नाडु की मुख्यमंत्री और सूबे में विपक्ष की नेता बननेवाली पहली महिला, जे जयललिता, जनता में जितनी लोकप्रिय थीं, उनके राजनीतिक विरोधी उन्हें उतना ही नापसंद करते थे.

उनपर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे और उन्हें जेल भी जाना पड़ा:

पहली बार जेल

जयललिता पहली बार 1991 में मुख्यमंत्री बनीं, लेकिन 1996 के चुनाव में उनके राजनीतिक दल एआईएडीएमके को करारी हार का सामना करना पड़ा और जयललिता अपनी सीट तक नहीं बचा पाईं.

इसकी बड़ी वजह उनके दत्तक पुत्र सुधाकरन की शादी में हुआ करोड़ों रुपयों का ख़र्च माना गया. भ्रष्टाचार की ये पहली छींट भर थी जो आनेवाले सालों में बड़ा धब्बा बन गई.

1996 से 2001 के बीच डीएम के की करुणानिधि सरकार ने आय से अधिक संपत्ति के क़ानून के तहत जयललिता के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के दर्जनों और मामले दर्ज किए.

इनमें से एक था 'कलर टीवी घोटाला' - जयललिता पर मुख्यमंत्री रहते हुए ऊंचे दामों पर कलर टीवी की ख़रीद का आरोप था.

इसके तहत वो और उनकी क़रीबी दोस्त शशिकला पहली बार दिसंबर 1996 में गिरफ़्तार किए गए. हालांकि साल 2000 में दोनों को इस मामले में बरी कर दिया गया और 2008 में हाई कोर्ट ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील भी ख़ारिज कर दी.

नहीं मिली मुख़्यमंत्री की गद्दी

1996 से 2001 के बीच दायर मामलों में एक और था 'तनसी घोटाला' जिसके तहत 1999 में जयललिता पर अपनी कंपनी के लिए सरकारी ज़मीन ख़रीदने के लिए मुख़्यमंत्री पद के दुरुपयोग का आरोप था.

साल 2000 में वो और शशिकला इस मामले में दोषी पाई गईं और उन्हें जुर्माने के साथ दो साल की सज़ा सुनाई गई. मद्रास हाई कोर्ट में अपील दायर कर जयललिता ने अगले साल विधानसभा चुनाव लड़ा.

जयललिता के मुताबिक़ ये सारे मामले राजनीतिक बदले की भावना से दायर किए गए थे. जनता ने उनके दावे को पसंद किया और 2001 विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को फिर जीत मिली.

पर तनसी घोटाले में दोषी पाए जाने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने जयललिता के मुख्यमंत्री बनने पर रोक लगा दी. जिस वजह से ओ.पनीरसेलवम को पहली बार तमिलनाडू का मुख़्यमंत्री बनाया गया.

दिसंबर 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में जयललिता को बरी कर दिया और उन्होंने मुख़्यमंत्री का पद संभाला.

करुणानिधि की गिरफ़्तारी

साल 2001 में सत्ता में दोबारा आईं जयललिता ने भी उसी तरह अपने प्रतिद्वंदी करुणानिधि को गिरफ़्तार करवाया.

आधी रात के बाद पुलिस करुणानिधि के घर पहुंची और फ़्लाईओवर बनाने को लेकर हुए भ्रष्टाचार के आरोप में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.

करुणानिधि के साथ उस व़क्त केंद्रीय मंत्री रहे मुरासोली मारन और टी.आर.बालू को भी गिरफ़्तार किया गया. आनन फ़ानन में की गई गिरफ़्तारी का टीवी चैनलों पर ख़ूब प्रचार हुआ और काफ़ी आलोचना भी हुई.

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मानहानि ही मानहानि

साल 2006 में डीएमके से हार के बाद एआईएडीएमके 2011 में फिर से तमिलनाडू की सत्ता पर काबिज़ हुई और जयललिता फिर मुख्यमंत्री बनीं.

उनका ये कार्यकाल मानहानि के मुक़दमे दायर करने के लिए चर्चा में रहा. इस दौरान दायर किए गए 200 से ज़्यादा मुकदमों की सुप्रीम कोर्ट ने भी आलोचना की.

ये मुक़दमे डीएमके, डीएमडीके जैसी राजनीतिक पार्टियों और उनके नेताओं के अलावा मीडिया संस्थानों के ख़िलाफ़ भी दायर किए गए.

इनमें एक टीवी चैनल पर जयललिता जैसी वेषभूषा में प्रोग्राम पेश करनेवाला मुक़दमा भी शामिल है.

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आय से अधिक संपत्ति

बतौर मुख्यमंत्री इसी कार्यकाल के दौरान सितंबर 2014 में जयललिता को आय से अधिक संपत्ति (क़रीब 63 करोड़ रुपए) के मामले में दोषी पाया गया और सौ करोड़ के जुर्माने के साथ चार साल की सज़ा हुई.

1996 में सत्ता में आई डीएमके सरकार ने जयललिता के घर पर छापा मारा था जिसके बाद सोना, कपड़े और चप्पलों समेत वहां से ज़ब्त की गई उनकी संपत्ति की तस्वीरें अख़बारों में छपीं थीं.

18 साल तक चले मामले की सुनवाई के बाद आए इस फ़ैसले पर जयललिता को अपना पद छोड़ना पड़ा. शशिकला और उनके रिश्तेदारों को दोषी पाया गया.

कर्नाटक हाई कोर्ट ने अगले साल जयललिता को ज़मानत दे दी जिसके बाद वो फिर मुख्यमंत्री बन गईं और 2016 के विधानसभा चुनाव में जीत भी हासिल की.

अपील के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा है. जयललिता की मौत हो गई है. शशिकला और उनके रिश्तेदारों पर मौजूद हैं.

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