नज़रिया: 'नोटबंदी से भारत में मंदी आ सकती है'

  • भरत झुनझुनवाला
  • आर्थिक मामलों के जानकार
दो हज़ार रुपए का नया नोट

इमेज स्रोत, Getty Images

मैं नोटबंदी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हूं. इसका मूल मक़सद काले धन पर चोट करना था. सरकार को इसमें कोई कामयाबी नहीं मिली है.

बड़े पैसे वाले लोगों ने अपना जुगाड़ कर लिया, काले धन को 'रिसाइकल' कर लिया. आम जनता को काफ़ी तकलीफें हुईं.

ऑडियो कैप्शन,

नोटबंदी का जीडीपी पर क्या होगा असर?

मुद्रा के अभाव से जो नुकसान हुआ, वह कम है. बड़े उद्योगपतियों या कारपोरेट जगत का ज़्यादातर कामकाज नकद में नहीं होता. उन पर ख़ास असर नहीं पड़ा है.

मझोले और छोटे व्यापारियों और उद्योगपतियों पर कुछ असर पड़ा है. लेकिन उन्होंने भी कुछ न कुछ इंतजाम कर लिया.

मुद्रा की कमी से रिक्शा वालों या रेहड़ी वालों को ज़्यादा दिक्क़तें हैं. व्यापार जगत में उतनी परेशानियां नहीं हैं, जितना दावा किया जा रहा है.

वीडियो कैप्शन,

भारत में नोटबंदी के बाद से आम लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

बड़ा नुक़सान यह है कि लोगों का करेंसी से भरोसा उठ गया. लोग कहने लगे हैं कि नए 2,000 के नोट भी बंद हो सकते हैं, 100 रुपए के नोट भी हो सकते हैं. लोगों में घबराहट है. इस वजह से अर्थव्यवस्था सहमी हुई है, वह ज़्यादा महत्वपूर्ण है.

सरकार कहती है कि नोटबंदी की वजह से साढ़े ग्यारह लाख करोड़ रुपए बैंकों में जमा हो गए. इसमें से चार लाख करोड़ रुपए बैंकों ने लोगों को दे दिए. इस हिसाब से बैंकों के पास साढ़े सात लाख करोड़ रुपए जमा हो गए. सरकार के पास पैसे आ गए, पर लोगों के पास नहीं रहे.

ऐसे कई लोग होंगे जो अपनी बचत बैंक में जमा करने के बाद उसे वापस लेकर खर्च नहीं करेंगे. पास में पैसे नहीं होने से जो मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ेगा, उसका अधिक नुक़सान होगा.

नोटबंदी का जीडीपी पर तीन तरह से असर पड़ेगा. भारत का काला धन अब विदेश चला जाएगा, क्योंकि लोगों के मन में डर बन गया है. लोग डॉलर खरीदने लगे हैं, इसका सबूत यह है कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया लगातार टूट रहा है. इससे जीडीपी कम हो जाएगी.

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन,

बैंकों में रुपयों की भरमार है, पर जनता के पास नकदी नहीं है

दूसरा असर यह होगा कि लोगों की क्रय शक्ति कम हो जाएगी, भले ही उनके बैंक एकाउंट में पैसे क्यों न हों. क्रय शक्ति कम होने से पूरी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा.

छोटे उद्योगों को भी नकद न होने से दिक्कतें हो रही है. इनके धंधे पर बुरा असर पड़ा है. इससे भी जीडीपी गिरेगा.

मुझे पूरी आशंका है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है.

(बीबीसी के लिए रोहित जोशी के साथ किए गए बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)