दोहे में गा कर याद कर लीजिए संविधान

  • निखिल रंजन
  • बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
'संविधान काव्य' लिखने वाले आईपीएस अधिकारी एस. के. गौतम
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'संविधान काव्य' लिखने वाले आईपीएस अधिकारी एस. के. गौतम

अगर आपको भारत का संविधान दोहे के रूप में मिल जाए तो क्या आप इसे पढ़ेंगे. पुड्डुचेरी के पुलिस प्रमुख एस के गौतम ने यही कोशिश की है.

कम ही लोग हैं जो इसे पढ़ने या जानने की कोशिश करते हैं. इसकी एक वजह ये भी है कि लंबे चौड़े संविधान की भाषा कठिन है.

आईपीएस अधिकारी एस के गौतम ने लोगों को इसी मुश्किल से निजात दिलाने की सोची और सामने आया उनका 'संविधान काव्य.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "असल में संविधान हमारे देश की नीतियों का मार्गदर्शक है. इसलिए हमारे देश का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ भी है. लेकिन आम आदमी इसे नहीं समझ पाता क्योंकि इसकी भाषा थोड़ी जटिल है. इसलिए मैंने यही सोचा कि संविधान को कैसे सरल भाषा में लिखा जा सकता है. मैंने यही कोशिश की और इसे पदों में रच दिया. इस तरह से यह आसान हो गया."

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एस के गौतम को लंबे समय की पुलिस की नौकरी में महसूस हुआ कि ज़्यादातर लोग संविधान में वास्तव में क्या लिखा है उससे अनजान हैं. आमतौर पर लोगों को अदालतों और पुलिस की कार्रवाई के वक्त ही इसकी याद आती है.

उन्होंने संविधान को जन-जन तक पहुंचने के लिए आसान भाषा में सरल तरीके से पेश करने की सोची और सबसे पहले इसे दोहों की शक्ल में ढाल दिया. 12 अनुसूची और 448 अनुच्छेदों वाला भारतीय संविधान 25 भागों में बंटा है लेकिन एस के गौतम ने इसे संविधान काव्य के 394 दोहो में पूरा कर दिया है.

वो कहते हैं, " मैंने कोशिश की है कि हर अनुच्छेद को दो लाइनों में उसके अर्थ के साथ समाहित कर दिया जाए और उसके नीचे मैंने उस अनुच्छेद का नंबर भी लिख दिया है ताकि उससे उसको जोड़ा जा सके."

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वो कहते हैं, इसे जानने समझने से लोगों को अपने अधिकारों के बारे में मालूम होगा.

एक बार दोहे तैयार हो गए तो इसे किताब की शक्ल देना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं था. सरल भाषा और एनिमेशन ने इसे ऐसा बना दिया है कि बच्चों की भी इसमें दिलचस्पी जगे.

कुल 77 पन्नों की किताब में आप संविधान को जानने के साथ ही उसे याद भी कर सकते हैं. अगर भूल जाएं तो जेब से निकाल कर दोबारा पढ़ लीजिए, किताब पॉकेटबुक रूप में भी है.

एस के गौतम कहते हैं, "जो भी अनुच्छेद हैं और उसके संशोधन हैं वो सब मिल कर काफी लंबे वाक्य बन जाते हैं, फिर उसके मूल भाव को समझाना कठिन था. ये दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है. लेकिन एक बार काम शुरू हो गया तो फिर मुझमें रुचि भी जगी और मज़ा भी आया."

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एसके गौतम मानते हैं कि लोग अगर संविधान को जान गए तो उसका उपयोग करना भी सीख जाएंगे.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गौतम की ये राय पुलिस के लिए भी मायने रखती हैं, क्योंकि आए दिन ऐसी ख़बरें सामने आती हैं जब पुलिस पर संविधान में दिए अधिकारों का दुरुपयोग के आरोप लगते हैं.

तो क्या उन्होंने विभाग में भी कोई कोशिश की है कि ऐसी स्थितियों को रोका या कम किया जा सके.

एस के गौतम ने कहा, "पुलिस संविधान के मुताबिक ही काम करती है, मेरी कोशिश यही है कि संविधान सब लोगों तक पहुंचे. एक बार लोग इसे जान कर समझ लेंगे तो उपयोग भी करने लगेंगे अपने अधिकारों के बारे में बात करने लगेंगे और फिर इसके दुरुपयोग की संभावना वैसे ही कम हो जाएगी."

संविधान की कठिन भाषा उसकी एक ज़रूरत भी है, अलग अलग उद्देश्यों और ढेर सारे प्रावधानों को नियमों में ढालने के क्रम में इसका ऐसा स्वरूप बन जाना स्वाभाविक लगता है. तो कहीं आसान बनाने की कोशिश में इसकी गंभीरता से समझौता तो नहीं करना पड़ा?

जवाब में गौतम ने कहा, "मैंने पूरी कोशिश की है कि इसकी मूल भावना को वैसा ही रखा जाए और उसमें कोई परिवर्तन ना हो. मैं इसमें कितना सफ़ल हुआ ये तो लोग ही बताएंगे."

एसके गौतम की इस कोशिश ने संविधान को सरल, सुगम और आकर्षक बना दिया है और पढ़ते वक्य ये बोझिल नहीं करता.

संविधान काव्य लोगों को भारत के संविधान तक ले जाए वो बस इतना ही चाहते हैं.

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