पापा प्यार तो बहुत करते हैं लेकिन

  • सुहेल हलीम
  • बीबीसी उर्दू
संगीता किचन में
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संगीता को दिल्ली के एक भीड़भाड़ वाले इलाके में अस्थाई ठिकाना मिल गया है.

अपनी पसंद से शादी करने के बाद संगीता अपने ही घर वालों से जान बचाती फिर रही हैं.

संगीता हरियाणा से है जहां खानदानी इज्जत के नाम पर हत्या कोई असामान्य बात नहीं है. वह बीबीए की छात्रा हैं और उनके पति रवि इंजीनियरिंग के आखिरी साल की पढ़ाई कर रहे हैं. दोनों ने अपने माता-पिता से छुप कर शादी की लेकिन नई जिंदगी की शुरुआत पुराने रिवाजों की पेचीदगियों में उलझ कर रह गई है.

दिल्ली के एक भीड़भाड़ भरे इलाके में उन्हें अस्थाई तौर पर ठिकाना तो मिल गया है लेकिन उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि उनकी पसंद घरवालों की पसंद क्यों नहीं बन सकती.

संगीता कहती हैं कि "उनके पिता उनसे बहुत प्यार करते हैं लेकिन मालूम नहीं कि अब उन्हें क्या हो गया है कि वे ये सब कर रहे हैं. पहले पापा कहते थे कि मुझसे कुछ भी मांग, मैं तुझे हर चीज दूंगा... मैं चाहती हूँ कि वे मेरे फैसले को मान लें लेकिन मुझे नहीं पता कि उन्हें एतराज किस बात पर है."

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संजय सचदेवा 'लव कमांडो' नाम से गैर सरकारी संगठन चलाते हैं.

रवि का कद छह फुट से अधिक है और उन्हें कसरत करने का शौक है. वे इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी पढ़ रहे हैं लेकिन करियर 'फिटनेस' के क्षेत्र में बनाना चाहते हैं. जीवन में आगे जाकर उन्हें क्या करना है, इसमें थोड़ा कंफ्यूजन है लेकिन संगीता का हाथ पकड़कर जो कदम उन्होंने उठाया है, इसके बारे में कोई दुविधा नहीं है.

वे कहते हैं कि "ये तो पता था कि हमारे घर वाले नहीं मानेंगे लेकिन यह नहीं कि बात मरने मारने तक पहुंच जाएगी. हमसे गलती सिर्फ ये हुई कि हमें पहले अपनी पढ़ाई पूरी करनी चाहिए थी... माता पिता को सिर्फ यह देखना चाहिए कि लड़का लड़की एक साथ अच्छी जिंदगी गुजार सकते हैं या नहीं, बाकी किसी चीज का कोई अहमियत नहीं है."

इन दोनों की मदद संजय सचदेवा कर रहे हैं जो 'लव कमांडो' के नाम से एक गैर सरकारी संस्था चलाते हैं. संजय और उनके साथी मोहब्बत करने वालों को कानूनी संरक्षण दिलवाने की कोशिश करते हैं और वे इस बात को स्वीकार करते हैं कि अदालतों के दबाव के कारण कुछ राज्यों में हालात बेहतर हुए हैं.

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अदालतों के दबाव के कारण कुछ राज्यों में हालात बेहतर हुए हैं.

उन्होंने कहा, "कई राज्यों में पुलिस और प्रशासन के नजरिये में बदलाव आया है, कुछ मोहबब्त करने वालों के हौसले भी बुलंद हुए हैं लेकिन असली समस्या कानून लागू करने को लेकर हैं. नए कानून की जरूरत तो है लेकिन मौजूदा नियम भी काफी सख्त हैं, उनके अमल में कमी रह जाती है."

भारत में इज्जत के नाम पर हत्या के मामलों से निपटने के लिए लंबे समय से एक नया सख्त कानून बनाने की मांग की जा रही है लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति आड़े आ जाती है. क्योंकि राजनीतिक दल इन 'खाप पंचायतों' (शक्तिशाली क्षेत्रीय पंचायतें जिनकी कोई कानूनी हैसियत नहीं होती) को नाराज़ करने से डरती हैं जो उन्हें चुनाव में सबक सिखा सकती हैं.

इज्जत के नाम पर अपराध अक्सर ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं जहां महिलाओं को आज भी बराबरी का दर्जा हासिल नहीं है लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ सुधार जरूर हुआ है.

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जगमती सांगवान सामाजिक कार्यकर्ता हैं.

जगमती सांगवान लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने का काम कर रही हैं. वह कहती हैं कि "सुधार जरूर हुआ है लेकिन देश में भाजपा की सरकार आने के बाद से खाप पंचायतें खुद को ज्यादा ताकतवर महसूस कर रही हैं और नए कानून को रोकने की कोशिशें हो रही हैं."

लेकिन सरकार का कहना है कि क़ानून के रास्ते में काम हो रहा है और कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है. सुप्रीम कोर्ट खाप पंचायतों के खिलाफ कई बार सख्त आदेश जारी कर चुका है लेकिन इन पंचायतों का दावा है कि वह केवल अपने पुराने सामाजिक मूल्यों की रक्षा कर रहे हैं, इज्जत के नाम पर अपराध से उनका कोई संबंध नहीं है.

उप गृह मंत्री हंसराज अहीर की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत में 2015 में तथाकथित इज्जत के नाम पर हत्या के 251 मामले दर्ज किए गए जो 2014 की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक थे.

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कई अपराध पुलिस की नजरों में आते ही नहीं क्योंकि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही दबा दिया जाता है.

भारत में इज्जत के नाम पर अपराध के लिए हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य अधिक बदनाम हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार सबसे ज्यादा 131 मुकदमे उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए जबकि 2014 में वहाँ केवल एक मुकदमा दर्ज हुआ था.

जगमती सांगवान के अनुसार इज्जत के नाम पर किए जाने वाले कई अपराध पुलिस की नजरों में आते ही नहीं क्योंकि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही दबा दिया जाता है.

उनका कहना है कि हरियाणा के केवल एक जिले में तीन महीने की अवधि के दौरान अखबारों में इज्जत के नाम पर किए जाने वाले अपराध की 43 खबरें (केवल हत्या नहीं) समाचार पत्रों में प्रकाशित हुईं जबकि हरियाणा देश के सबसे छोटे राज्यों में से एक है.

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हालात जब बदलेंगे तो उनमें संगीता जैसे नौजवानों की भी बड़ी भूमिका होगी.

जगमती सांगवान कहती हैं कि इस सिलसिले में लोगों के अंदर जागरूकता बढ़ी है और सरकार के ऊपर भी न्यायपालिका का दबाव है कि मोहब्बत करने वालों को सुरक्षा प्रदान की जाए लेकिन हालात वैसे नहीं बदल रहे जैसे बदलने चाहिए.

हालात जब बदलेंगे तो उनमें संगीता जैसे नौजवानों की भी बड़ी भूमिका होगी. अपने माता पिता के लिए उनका संदेश बहुत साफ है, "मैं तो कहूँगी कि अब हमारा समाज पढ़ा लिखा है, शिक्षा के बाद भी अगर हम धर्म और जाति के आधार पर किसी को देखा जाए, उसकी जात देखें लेकिन उसकी तकलीफ हमें नज़र न आए तो यह शिक्षा किस काम की. इंसान अपने धर्म से नहीं अपने किरदार से पहचाना जाता है."

नई पीढ़ी पुराने रीति रिवाजों को तोड़ कर जीना चाहती है लेकिन सदियों पुराने इन बंधनों को तोड़ना आसान काम नहीं है.

(लड़के और लड़की के नाम उनकी गुजारिश पर बदल दिए गए हैं)

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