नोटबंदी: कैसा है पीएम के गोद लिए गांव का हाल

मोदी का गोद लिया गांव का नागेपुर इमेज कॉपीरइट Roshan Jaiswal

इसी साल मार्च महीने में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के गांव नागेपुर को गोद लेने की घोषणा की तो ग्रामीणों की खुशी सातवें आसमान पर पहुंच गई थी.

जयापुर गांव के बाद वाराणसी के अराजीलाइन ब्लॉक का ही नागेपुर ऐसा दूसरा गांव था जिसे पीएम मोदी ने आदर्श ग्राम योजना के तहत अपने संसदीय क्षेत्र में गोद लिया था. इस साल नवंबर में नोटबंदी के ऐलान के बाद वहां के हालात कैसे हैं?

नागेपुर में नोटबंदी का दर्द साफ महसूस किया जा सकता है.

गुरुवार को पीएम नोटबंदी के ठीक 45वें दिन वाराणसी पहुंचे थे.

बनारस में मोदी के आगमन की तैयारी चौतरफा दिखी लेकिन नागेपुर गांव शांत था. नागेपुर के लोग रोज की तरह गांव के बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में धक्के खाते दिखे. इनमें से एक 28 वर्षीय मुन्नालाल ने बताया कि नोटबंदी के बाद से अब उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है. मुन्नालाल राजमिस्त्री हैं.

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उन्होंने कहा, ''गांव के बैंक से पहले 2000 रुपये ही मिल रहे थे. मोदीजी बनारस आए हैं इसलिए बैंक में पैसा आ गया है और पूरा मिलने लगा है. छोटे नोट न होने के चलते फुटकर की समस्या बनी हुई है. मझे ख़ुद 1500 रुपयों की ज़रूरत थी, लेकिन फुटकर न होने के चलते दोबारा फ़ॉर्म भरकर 2000 रुपये निकालना पड़ा.''

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल मार्च में नागेपुर गांव को गोद लिया था

नागेपुर की प्रभावती भी इसी समस्या से जूझ रही हैं.

उन्होंने कहा कि वह बैंक 1000 रुपये निकालने आई थीं लेकिन यहां केवल 2000 के ही नोट थे. इसलिए वह पैसे निकाल नहीं पाईं. गांव के किसान राजेश यादव ने बताया कि खेती के वक्त नोटबंदी से काफी दिक्क़त हो रही है.

बगल के ही गांव कल्लीपुर से नागेपुर बैंक पहुंचे भैयालाल पटेल ने कहा, ''मोदी जी गांव की समस्याओं के बारे में कुछ नहीं जानते हैं. जनता का विश्वास टूटता जा रहा है. नकदी की किल्लत के चलते यहां के किसानो को बाजार में जाकर आधे दाम में सब्जी बेचनी पड़ रही है. बैंक में अभी भी नकदी और फुटकर की बड़ी दिक्कत है.''

मोदी के गोद लिए गांव नागेपुर के एक मात्र बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक शत्रुघ्न पांडे ने बताया, ''गांव की कुल आबादी लगभग तीन हजार है और पूरे गांव में 425 परिवार हैं. सभी परिवारों में कम से कम एक खाताधारक ज़रूर है.''

नागेपुर में बैंक की शाखा खुले तीन साल हो गए लेकिन अभी तक एक भी एटीएम नहीं है.

इसके जवाब में पांडे ने बताया, ''अभी जगह की तलाश की जा रही है और जल्द एटीएम भी लग जाएगा. इसके अलावा गांव में दुकानदारों को स्वाइप मशीन भी दी जाएगी. फुटकर की समस्या की बात बैंक मैनेजर ने स्वीकारी.''

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