प्रेस रिव्यूः '10 से ज़्यादा पुराने नोट रखने पर सज़ा'

  • 27 दिसंबर 2016
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हिन्दुस्तान टाइम्सअख़बार ने नोटबंदी के बारे में अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि सरकार जल्दी ही एक अध्यादेश ला सकती है जिससे कि 30 दिसंबर के बाद ऐसे लोगों के खिलाफ़ कार्रवाई हो सकती है जिनके पास बड़ी मात्रा में 500 और 1000 के पुराने नोट मिलेंगे.

अख़बार लिखता है कि ऐसी रिपोर्टें हैं कि 30 दिसंबर के बाद सरकार नियम ला सकती है जिससे कि किसी भी व्यक्ति के पास पुराने 500 और 1000 के 10-10 नोट से ज्य़ादा नहीं हो सकते और अगर उसने नियम तोड़ा तो कम-से-कम 50 हज़ार रूपए या उसके पास जितनी राशि होगी उसका पाँच गुना जुर्माना लग सकता है.

टाइम्स ऑफ़ इंडियाने भी नोटबंदी के बारे में एक ख़बर छापी है जिसमें लिखा है कि आयकर विभाग बहुजन समाज पार्टी के नेताओं से उनके एक एकाउंट में पुराने नोटों में 104 करोड़ रूपए जमा कराने के बारे में पूछताछ करने की तैयारी कर रही है.

अख़बार में प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि ये रकम दो से नौ दिसंबर के बीच दिल्ली में पार्टी के एक एकाउंट में जमा कराई गई.

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इंडियन एक्सप्रेस में ख़बर है कि केंद्रीय गृहमंत्रालय ने माओवादियों के आत्मसमर्पण करने की संख्या में पिछले साल की तुलना में तीन गुना तेज़ी दर्ज की है. लेकिन साथ ही साथ इसी दौरान माओवादी हिंसा से जुड़ी घटनाओं में आम लोगों के मारे जाने की संख्या में भी तेज़ी आई है जिनमें अधिकतर कथित तौर पर पुलिस मुखबिर थे. अख़बार के अनुसार इस साल 15 दिसंबर 2016 तक 1420 माओवादियों ने समर्पण किया जबकि पिछले साल 570 माओवादियों ने हथियार डाले थे.

हिंदू अख़बार में एक ख़बर राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों को लेकर है जिसमें मशहूर फ़िल्म निर्देशक अडूर गोपालकृष्णन ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को एक पत्र लिखकर इन पुरस्कारों के चयन पर आपत्ति प्रकट की है.

उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वो निर्णायक मंडल के चयन को गंभीरता से ले ताकि अयोग्य लोग उनके काम को लेकर फ़ैसले ना ले सकें.

अदूर ने कहा कि पिछले वर्ष सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक समेत कई बड़े पुरस्कार व्यावसायिक फ़िल्मों को दिए गए जिनसे कि उन उद्देश्यों के साथ ही समझौता हुआ जिनके लिए इन पुरस्कारों की शुरूआत हुई थी.

नवभारत टाइम्स में एक ख़बर है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के एक सांसद ने कहा है कि सिंध की सरकार अगर हाल में पारित हुए अल्पसंख्यक बिल को निरस्त करती है तो देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ जाएगा. इस बिल में मुस्लिम बहुल देश में जबरन धर्मांतरण को अपराध करार देने का प्रावधान है.

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