नोटबंदी के ख़िलाफ लालू यादव का धरना

लालू यादव

नोटबंदी को लेकर राजनीतिक पारा लगातार चढ़ रहा है.

राष्ट्रीय जनता दल ने बुधवार को बिहार के सभी ज़िला मुख्यालयों पर धरना देने का ऐलान किया है. पटना में धरने की अगुवाई लालू यादव करेंगे.

हालांकि, धरने में बिहार के महागठबंधन में शामिल जनता दल यूनाइटेड और कांग्रेस शामिल नहीं होंगे.

नोटबंदी के ख़िलाफ बिहार के सभी ज़िलों में आक्रोश मार्च निकाल चुके राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि धरने का आयोजन देश में उत्पन्न आर्थिक अराजकता की स्थिति को लेकर किया जा रहा है.

राष्ट्रीय जनता दल के बिहार प्रदेश के अध्यक्ष रामचंद्र पुर्वे कहते हैं, "नोटबंदी को लेकर पूरे देश में त्राहिमाम मचा है. किसान, मजदूर और नौजवान सभी तबाह हो गए हैं."

पुर्वे के मुताबिक धरने के ज़रिए किसानों का ऋण माफ़ करने, नोटबंदी से प्रभावित छोटे व्यापरियों को 50 हज़ार रुपये मुआवज़ा देने, छोटे व्यापारियों के 5 लाख रुपये तक के ऋण माफ़ करने और नोटबंदी की वजह से कथित तौर पर जिन लोगों की मौत हुई है उन्हें उचित मुआवज़ा देने की मांग उठाई जाएगी.

भारतीय जनता पार्टी ने धरने पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष भारत बंद फ्लॉप होने के बाद भी ये नहीं समझ सका है कि जनता कष्ट सहकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है.

भारतीय जनता पार्टी के नेता और केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह धरने पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, "नोटबंदी से विपक्ष क्यों घबराया हुआ है, ये समझ में नहीं आ रहा है. मायावती की परेशानी की वजह तो समझ में आ गई है. लेकिन लालू यादव क्यों घबराए हुए हैं."

विपक्ष की ओर से आम लोगों को हो रही समस्या का सवाल उठाए जाने पर गिरिराज सिंह कहते हैं, "समस्या केवल राहुल गांधी, लालू यादव, ममता बनर्जी और मायावती की नहीं सुलझी है. जनता की समस्या सुलझ रही है और उसे सुलझाने में जनता कष्ट सहकर भी नरेंद्र मोदी के साथ है. "

गिरिराज सिंह नोटबंदी पर राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड के बीच मतभेद की भी बात करतें हैं. गिरिराज सिंह कहते हैं ,'' नीतीश कुमार नोटबंदी के पक्ष में हैं. ये अंतर्विरोध क्यों है?''

हालांकि, जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि गठबंधन में किसी भी मुद्दे को लेकर अंतर्विरोध नहीं है.

जेडीयू सांसद केसी त्यागी कहते हैं, "जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस विभिन्न विचारधाराओं की पार्टियां हैं. सुशासन और भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए हमारा समझौता हुआ है. तीनों दल अपनी रणनीति के हिसाब से कार्यक्रम करने के लिए स्वतंत्र हैं."

बैंक अधिकारियों का भी विरोध

उधर, ऑल इंडिया बैंक ऑफ़िसर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉइज एसोसिएशन ने भी नोटबंदी को लेकर हो रही दिक्कतों के विरोध में बुधवार से दो दिवसीय विरोध कार्यक्रम का ऐलान किया है. हालांकि यूनियन का दावा है कि धरने से बैंक के कामकाज पर असर नहीं होगा.

ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉइज़ एसोसिएशन के महासचिव सीएच वेंकटचलम कहते हैं कि बैंकों को मांग के अनुरूप नकदी नहीं मिल रही है. एक जनवरी करीब है. लोगों को वेतन मिलने के पहले सरकार को समस्या का समाधान करना चाहिए.

वेंकटचलम के मुताबिक धरने के लिए तीन मुख्य मांगे उठाई जाएंगी

  • रिजर्व बैंक से बैंकों को मांग के अनुरुप नकदी मिले
  • बैंक ग्राहकों का कहना है कि निजी बैंकों में पैसा मिल रहा है. ऐसे में रिज़र्व बैंक को सार्वजनिक तौर पर बताना चाहिए कि हर दिन उनका कितना पैसा प्रिंटिंग प्रेस से आता है. बैंक को कितना पैसा दिया जाता है.
  • बैंक शाखाओं में कैश नहीं है लेकिन चौंकाने वाली ख़बरें सामने आ रही हैं कि 10 करोड़, 20 करोड़ और 40 करोड़ के नए नोट पकड़े गए. इसे लेकर लोग बैंक कर्मियों पर सवाल उठाते हैं. सरकार इस मामले की सीबीआई से जांच कराए और दोषियों पर कार्रवाई करे.

वेंकटचलम अपनी इस मांग को लेकर कहते हैं, "बैंक शाखाओं से भुगतान संभव नहीं है. इसकी वजह ये है कि कंमप्यूटरीकृत प्रणाली में इसकी अनुमति नहीं होगी. करेंसी चेस्ट से ग्राहकों को सीधे पैसे नहीं मिल सकते हैं. तीसरी संभावना रिज़र्व बैंक से पैसे मिलने की हो सकती है. रिज़र्व बैंक सीधे कैसे बड़े लोगों को पैसे दे सकता है, इसकी जानकारी नहीं है. चौथी संभावना एटीएम मेंटिनेंस करने वाले कॉन्ट्रेक्टर हो सकते हैं. वो बड़ी बैंकों और रिज़र्व बैंक से सीधे कैश लेते हैं. हो सकता है कि वो एटीएम में कैश न डाल रहे हों और सीधे कुछ बड़े लोगों को दे रहे हों."

वो कहते हैं कि अगर धरने के बाद भी सरकार ने सुनवाई नहीं की तो अधिकारी और कर्मचारी यूनियन आगे का रास्ता तय करेंगी. बैंक यूनियन हड़ताल के विकल्प पर भी गौर सकती हैं.

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