मुलायम सिंह ने 6 साल के लिए सीएम अखिलेश को पार्टी से निकाला

  • 30 दिसंबर 2016
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने पार्टी में मचे घमासान के बीच, शुक्रवार शाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया.

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इस घटनाक्रम की ख़ास बातें

  • कथित अनुशासनिक कार्रवाई के तहत समाजवादी पार्टी से निकाले गए अखिलेश और रामगोपाल यादव.
  • आगामी यूपी चुनाव को लेकर सीएम अखिलेश यादव ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी, जिससे मुलायम सिंह यादव नाराज़ थे.
  • मुलायम सिंह के इस फैसले के ख़िलाफ सड़कों पर उतरे अखिलेश यादव के समर्थक.
  • रामगोपाल ने मुलायम के फैसले को बताया असंवैधानिक, अखिलेश की प्रतिक्रिया का इंतजार.

वीडियो: समाजवादी पार्टी में हर वक्त बदलते घटनाक्रम पर बीबीसी हिंदी की विशेष चर्चा

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Image caption अपना गुस्सा दर्ज कराने के लिए लखनऊ में सड़कों पर उतरे अखिलेश समर्थक. (फ़ाइल फ़ोटो)

नेताजी को संविधान का पता नहीं है: रामगोपाल

मुलायम सिंह को घेरते हुए रामगोपाल यादव ने कहा, ''आधे घंटे के अंदर हमें पार्टी से निकाल दिया. बिना जवाब सुने और दूसरा पक्ष लिए. किसी के खिलाफ़ ऐसे कार्रवाई नहीं की जाती. नोटिस दिया और बिना जवाब लिए ही पार्टी से निकाल दिया. न्यायिक नियम के मुताबिक़ बिना दूसरे पक्ष को सुने पार्टी से नहीं निकाला जा सकता है."

Image caption रामगोपाल यादव ने मुलायम सिंह यादव की इस कार्यवाही पर सवाल उठाए हैं.

रामगोपाल यादव ने मुलायम सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा, "इस पार्टी में शीर्ष स्तर से लगातार असंवैधानिक काम काम हो रहे हैं. यदि पार्टी प्रमुख असंवैधानिक काम करे, तो सम्मेलन कौन बुलाएगा? संसदीय बोर्ड की एक भी बैठक नहीं हुई और सारे पार्टी उम्मीवारों की सूची तय कर दी गई. हमने आपातकालीन मीटिंग बुलाई थी. नेताजी को पार्टी का संविधान पता नहीं है. हमारा सम्मेलन पूरी तरह से वैध था."

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मुलायम ने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी दी चेतावनी

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के साथ लखनऊ में प्रेस कांफ्रेस कर मुलायम सिंह ने दोनों के निष्कासन का ऐलान किया. उन्होंने कहा,

  • किसी को भी पार्टी का सम्मेलन बुलाने का हक़ नहीं है.
  • रामगोपाल ने मुझे बिना बताए बुलाया पार्टी सम्मेलन, जो कि असंवैधानिक है.
  • सिर्फ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही पार्टी सम्मेलन बुलाने का हक़ है.
  • पार्टी सम्मेलन बुलाकर रामगोपाल ने मुझपर अब सीधा हमला किया है.
  • जो पार्टी सदस्य और कार्यकर्ता रामगोपाल के बुलाए सम्मेलन में शामिल होगा, उसे भी पार्टी से निकाला जाएगा.
  • यूपी के मुख्यमंत्री गुटबाजी कर रहे थे. यह उनकी सज़ा है.

हंगामा शुक्रवार दोपहर से शुरू हुआ

इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की ओर से अखिलेश यादव और रामगोपाल को कारण बताओ नोटिस भेजा गया था. इसमें सवाल किया गया था कि विधानसभा चुनाव 2017 के लिए प्रत्याशियों की समानांतर सूची जारी करने पर अखिलेश के ख़िलाफ अनुशासनिक कार्यवाही क्यों नहीं की जाए?

हालांकि शुक्रवार दोपहर में ही पत्रकारों से बातचीत करते हुए रामगोपाल ने संकेत दिया था कि अब पार्टी में किसी तरह से भी सुलह की संभावना नहीं है.

इस बीच रामगोपाल यादव ने भी आगामी एक जनवरी को पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाते हुए कह दिया कि पार्टी के शुभचिंतक इस सम्मेलन में जरूर शामिल हों, ताकि पार्टी के हालात पर चर्चा हो सके.

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Image caption रामगोपाल के इस पत्र को लेकर सबसे ज्यादा नाराज़ हुए मुलायम सिंह.

दरअसल, गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से पेश की गई समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों की कथित समानांतर सूची के बाद पार्टी में सीधे तौर पर दो फाड़ होने की संभावना जताई गई थी.

मुलायम-शिवपाल खेमे ने अखिलेश के इस क़दम की तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए देर रात ही 68 और उम्मीदवारों के नाम जारी किए थे.

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इस सूची में भी पहले की तरह अखिलेश के कथित क़रीबियों को जगह नहीं दी गई थी.

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