'अब सारा दारोमदार मुलायम सिंह पर'

  • शरद प्रधान
  • वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

पिछले 24 घंटे में समाजवादी पार्टी में जो कुछ हुआ है और जो अब हो रहा है, ऐसे हालात में लगता है कि अब सारा दारोमदार मुलायम सिंह पर है.

लेकिन उम्र की वजह से उनकी मानसिक स्थिति ऐसी है कि वो आसानी से लोगों के बहकावे में आ जाते हैं.

इस सबके पीछे अमर सिंह का हाथ देखा जा रहा है हालांकि वो इससे इनकार कर चुके हैं.

ऐसी भी चर्चा है कि अमर सिंह ने शिवपाल को वादा किया है कि अगर वो पार्टी में वापसी कराते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री बनवाएंगे.

ये भी कहा जाता है कि अमर सिंह, शिवपाल सिंह यादव के साथ मुलायम सिंह यादव की पत्नी साधना भी अपने बेटे के राजनीतिक हितों की रक्षा करने के लिए इस मोर्चे में शामिल हैं.

पार्टी के संविधान के मुताबिक़ संसदीय बैठक में सारे फ़ैसले लिए जाते हैं, लेकिन पिछली संसदीय बैठक में फ़ैसलों का अधिकार मुलायम सिंह यादव को दे दिया गया था, इसलिए कोई वजह नहीं थी कि अखिलेश यादव अपनी लिस्ट जारी करें.

इससे पहले जब अखिलेश को हटाया गया था, तब उन्हें मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया गया. ऐसा करके मुलायम सिंह ने अपने बेटे को साफ़ तौर पर उत्तराधिकार दिया. लेकिन दूसरी बार जब फिर पारिवारिक झगड़ा फूट पड़ा तो लगता है कि ये ड्रामा नहीं है.

शिवपाल सिंह यादव के पास अब चुनाव से पहले का समय ही है जिसमें उनकी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा उठ खड़ी होने से फिर ये झगड़ा सामने आ गया.

शिवपाल को पहले से मलाल था कि उन्हें साइडलाइन किया गया है क्योंकि अगर अभी मुख्यमंत्री नहीं बनते तो कब बनेंगे.

मुलायम सिंह यादव अपनी उम्र की वजह से कब क्या फ़ैसला लेंगे, ये कहा नहीं जा सकता. पिछले 72 घंटों में उन्होंने जो कदम उठाए हैं उनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था.

मुलायम के जानने वाले कहते हैं कि वो अचानक भूल जाते हैं कि आप कौन हैं. लेकिन पार्टी प्रमुख होने के नाते मुलायम का पलड़ा भारी है.

इमेज कैप्शन,

24 नवंबर, 1999 को अखिलेश यादव की शादी डिंपल यादव से हुई

अगर अखिलेश विधानसभा में बहुमत साबित करने की चुनौती देते हैं तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि जो ताक़तवर बनकर उभरेगा उसी तरफ़ लोग झुकेंगे.

किसी तरह की कोई गड़बड़ हुई तो समाजवादी पार्टी को नुकसान होगा क्योंकि मुस्लिम वोट बैंक बिखर जाएगा. मायावती कोशिश कर चुकी हैं कि सपा का मुस्लिम वोट बैंक उनकी तरफ़ आए.

दोबारा झगड़ा होने से आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी का भविष्य ख़राब लग रहा है और इससे भाजपा को फ़ायदा होगा. बसपा को इसका फ़ायदा सिर्फ़ तभी हो सकता जब उसके पास मुस्लिम वोट हों.

अखिलेश युवा हैं और अगर अपने नेतृत्व को मज़बूत करके पार्टी को आगे ले जाएं तो समाजवादी पार्टी जो अब बिखर चुकी है वो दोबारा खड़ी हो सकती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)