सरकारी कामों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कितना सही?

बेदी और सामी

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पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार राज्य सरकार ने दो जनवरी को सर्कुलर जारी करके सरकारी अधिकारियों के राजकीय कामों में सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, ट्वीटर और व्हॉट्सएप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.

आदेश के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों के सर्वर्स विदेशों में स्थित हैं जिससे विदेशी राज्य इन सूचनाओं को देख सकते हैं जो ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन है.

मुख्यमंत्री के निर्देश पर जारी आदेश को पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने पांच जनवरी को निरस्त कर दिया हैं.

किरण बेदी ने ट्वीट किया है, "मुख्यमंत्री का यह फ़ैसला हमें गैर-तकनीकी दौर में ले जाएगा जो हमारे लिए अच्छा नहीं होगा."

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उन्होंने मुख्यमंत्री के फ़ैसले को ढोंग बताया है.

उन्होंने एक दूसरे ट्वीट में कहा, "अगर पुडुचुरी को एक प्रगतिशील राज्य बनना है तो फिर वो संचार के आधुनिक माध्यमों के मामले में पीछे की ओर नहीं जा सकता है."

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के एन गोविंदाचार्य बनाम भारत सरकार मामले में 2012 में के एन गोविंदाचार्य ने यह सवाल उठाया था कि सोशल मीडिया पर किसी तरह के सरकारी दस्तावेज़ शेयर करना ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन है.

इस मामले में के एन गोविंदाचार्य के एडवोकेट रहे विराग गुप्ता इससे जुड़े क़ानूनी पहलुओं के बारे में बता रहे हैं.

1- पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट के सेक्शन 4 के अनुसार सरकारी फाइल या सूचनाएं भारत के बाहर नहीं भेजी जा सकती जिसके तहत कंप्यूटर डाटा और फाइलें भी आती हैं. इस क़ानून के उल्लंघन पर पांच साल तक की सज़ा हो सकती है.

2- सोशल मीडिया कंपनियों के सर्वर विदेशों में स्थित हैं, यह तथ्य सरकार और इन कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में के एन गोविंदाचार्य के मामले में स्वीकार किया है.

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3- सर्वर भारत में नहीं होने से सोशल मीडिया कंपनी भारत के क़ानून मानने के लिए बाध्य नहीं है तथा भारत में टैक्स भी नहीं देती.

4- अमरीका में नौ इंटरनेट कंपनियों ने ऑपरेशन प्रिज्म के तहत भारत सहित कई देशों की सूचनाओं को अमरीकी गुप्तचर एजेंसियों के साथ साझा किया था. इसकी पुष्टि होने के बावजूद भारत सरकार इन कंपनियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर पाई क्योंकि इनके सर्वर विदेशों में स्थित हैं.

5- गोविंदाचार्य मामले में हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से सरकारी अधिकारियों के लिए ई-मेल नीति अक्टूबर 2014 बनाई गई है जिसके अनुसार एनआईसी या उन ई-मेल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जिनका सर्वर भारत में है.

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6- पुडुचेरी सरकार द्वारा सर्कुलर में ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के आधार पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल को रोकना क़ानूनी रूप से ग़लत है क्योंकि सोशल मीडिया पर गोपनीय जानकारियां नहीं होती हैं. लेकिन इनका इस्तेमाल पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट से वर्जित किया जा सकता है.

7- व्हाट्सएप से सरकारी सूचनाओं का आदान प्रदान निश्चित रूप से क़ानून का उल्लंघन है जिसके लिए सरकारी अधिकारियों को पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट के तहत पांच साल की सज़ा हो सकती है.

8- पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट के अनुसार सरकारी सूचनाओं का बैकअप रखना भी आवश्यक है पर व्हाट्सअप का भारत में सरकार के पास कोई बैकअप का नियंत्रण नहीं होता और अधिकारी की ओर से कभी भी सूचनाओं को हटाया जा सकता है जो सरकारी रिकॉर्ड नष्ट करने का अपराध माना जा सकता है.

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9- पुडुचेरी में उपराज्यपाल दिल्ली जितनी क़ानूनी शक्ति नहीं रखते इसके चलते वे मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत बगैर कारण बताएं निरस्त कर सके.

10- कुछ दिनों पूर्व पुडुचेरी सरकार के एक अधिकारी ने आपत्तिजनक वीडियो व्हाट्सअप पर डाला था जिसके लिए उपराज्यपाल ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था. इसका मतलब व्हाट्सअप में संवाद को सरकारी संवाद माना गया तभी तो उपराज्यपाल ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की.

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11- जब व्हाट्सअप पर सरकारी सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं हो सकता तो फिर उससे संबंधित आदेश को सिर्फ इस आधार पर निरस्त नहीं किया जा सकता कि उपराज्यपाल को अधिक क़ानूनी शक्ति प्राप्त है.

12- ट्विटर और फेसबुक की ओर से आईटी (इंटरमिडरी गाइडलाइंस) रुल्स 2011 के तहत भारत में शिकायत अधिकारी का नाम और सभी संपर्क नहीं दिया गया जिससे कि आम जनता या पुलिस तुरंत समस्याओं का समाधान कर सके.

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