नोटबंदी: 'मुझे ट्रोल करने के लिए व्हॉट्स एप ग्रुप बनाया'

ज्योतिमणि

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सैकड़ों अनजान नंबरों से फ़ोन कॉल्स, व्हाट्स एप पर अपमानजनक संदेशों की बाढ़, एक नया व्हॉट्स एप ग्रुप और फ़ेसबुक पर अनगिनत आपत्तिजनक कमेंट्स.

ऐसे हुई तमिलनाडु में कांग्रेस प्रवक्ता ज्योतिमणि के नए साल की शुरुआत.

ज्योतिमणि ने बीबीसी को बताया, ''मेरे पास अनजान लोगों के 800 से ज़्यादा फ़ोन कॉल्स आए. एक दो लोगों से फ़ोन पर बात की तो ख़ुद को भाजपा कार्यकर्ता बताने वाले लोगों ने बहुत ही अभद्र टिप्पणियां की. ये सब तब शुरू हुआ जब 50 दिन बाद भी मैंने नोटबंदी की समस्याएं ख़त्म नहीं होने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आलोचना की थी.''

ज्योतिमणि के मुताबिक़ एक व्हॉट्स एप ग्रुप बनाया गया और उनका नंबर उसमें शामिल कर लिया गया. कई बार उन्होंने अपना नंबर उस व्हॉट्स एप ग्रुप से हटाया लेकिन बार-बार उनका नंबर उसमें शामिल कर लिया जाता.

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सोशल मीडिया पर किसी को निशाना बनाकर जब कुछ लोग लगातार अपमानजनक टिप्पणियां करें, आपत्तिजनक संदेश पोस्ट करें तो उसे ट्रोलिंग कहा जाता है. इन दिनों 'आई एम ए ट्रोल' क़िताब चर्चा में है.

ज्योतिमणि इस किताब का ज़िक्र करते हुए कहती हैं, ''भाजपा के आईटी सेल में काम कर चुकी साधवी खोसला ने स्वाति चतुर्वेदी की क़िताब 'आई एम ए ट्रोल' में बताया है कि किस तरह भाजपा के आईटी सेल में उनसे मोदी की आलोचना करने वालों के खिलाफ़ कमेंट करने को कहा जाता था. इस सबसे तंग आकर उन्होंने भाजपा आईटी सेल से नाता तोड़ लिया.''

ज्योतिमणि कहती हैं कि वो इसी तरह के ट्रोल का शिकार हुई हैं.

ज्योतिमणि ने बताया कि जब उन्हें ट्रोल किया जा रहा था तो सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर और फ़ेसबुक पर #I Stand with Jothimani के तहत कई लोगों ने उनका समर्थन भी किया.

वहीं, तमिलनाडु में भाजपा प्रदेश प्रमुख तमिलसई सौंदर्यराजन ने कहा, '' मैं ज्योतिमणि के साथ हुई अभद्रता के ख़िलाफ़ हूं. अगर मैंने पाया कि किसी भाजपा कार्यकर्ता ने उनके साथ बदतमीज़ी की है तो मैं उसके खिलाफ़ लड़ने वाली पहली व्यक्ति हूंगी.''

ज्योतिमणि के इस आरोप को उन्होंने ख़ारिज कर दिया कि भाजपा के पास ट्रोल आर्मी यानी सोशल मीडिया पर ट्रोल करने के लिए पूरी फ़ौज है.

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तमिलसई कहती हैं, ''उनका ये आरोप स्वीकार नहीं किया जा सकता कि मोदी का विरोध करने वालों के खिलाफ़ कमेंट करने की ट्रेनिंग देने के लिए भाजपा में एक ट्रेनिंग सेल है. ज्योतिमणि ने नोटबंदी की आलोचना की थी जिससे कई लोग नाराज़ हुए होंगे. लेकिन इंटरनेट पर उनके ऊपर जो अभद्र टिप्पणियां की गईं और यौन अत्याचार हुआ वो ठीक नहीं था.''

ज्योतिमणि के साथ ट्रोलिंग का मामला अभी पुलिस में दर्ज नहीं हुआ है.

तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विभाग के उपायुक्त बालू ने बीबीसी से कहा, ''पुलिस स्टेशन में हज़ारों शिकायतें दर्ज की जाती हैं, लेकिन तमिलनाडु में पिछले दस साल में सिर्फ 700 के करीब मामले आईटी एक्ट, 2000 के तहत दर्ज किए गए हैं. ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुलिस अधिकारियों के दी जाने वाली ट्रेनिंग काफ़ी नहीं है. ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए कोई विशेष अदालत भी नहीं है.

इससे पहले, तमिलनाडु में एक महिला पत्रकार कविनमलर के साथ ट्रोलिंग के मामले में सात महीने तक पुलिस में एफ़आईआर दर्ज नहीं हो सकी.

अदालत का दरवाज़ा खटखटाने के बाद कानून की जिस धारा के तहत मामला दर्ज हुआ वो सरकार ने वापस ले ली है.

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