'नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाने में ग़लत क्या है'

  • 14 जनवरी 2017
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खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के साल 2017 के कैलेंडर और डायरी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर छपने की विपक्ष आलोचना कर रहा है, लेकिन संस्थान के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना इसे फ़िजूल की आलोचना बताते हैं.

इस कैलेंडर की आलोचना इस बात पर हो रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी को रिप्लेस कर दिया है.

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केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, "क्या गांधी जी को रिप्लेस किया जा सकता है, कभी नहीं किया जा सकता है. खादी एवं ग्रामोद्योग को भी गांधी जी से अलग नहीं किया जा सकता. हमारी संस्था गांधी जी के सिद्धांतों पर ही चलती है."

सक्सेना बताते हैं कि हर साल कैलेंडर पर गांधी की तस्वीर को छापना अनिवार्य नहीं है और इससे पहले 1996, 2002, 2005, 2011, 2013 और 2016 में भी गांधी की तस्वीरें प्रकाशित नहीं हुई थीं.

लेकिन इसमें किसी भी मौके पर किसी दूसरे किसी नेता की भी तस्वीर नहीं छपी थी. ऐसे में नरेंद्र मोदी की तस्वीर को छापने का फ़ैसला कैसे लिया गया?

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इस सवाल पर सक्सेना कहते हैं, "प्रधानमंत्री की तस्वीर 18 अक्टूबर, 2016 की है जब प्रधानमंत्री ने पंजाब में 500 महिलाओं को चरखा दिया था. इससे पहले 1945 में महात्मा गांधी के कहने पर कामराज ने 500 चरखे बांटे थे. 70 साल के दौरान किसी प्रधानमंत्री ने खादी को लेकर इतना उत्साह नहीं दिखाया."

सक्सेना ये भी कहते हैं कि नरेंद्र मोदी की तस्वीर को छापने में किसी को ऐतराज़ नहीं होना चाहिए. वे कहते हैं, "अगर देश के प्रधानमंत्री किसी सब्जेक्ट को प्रमोट कर रहे हैं, जिसे लोगों को रोजगार मिलता है, गरीब के घर में दिया जलता है. ऐसे में अगर उनकी तस्वीर लगाई जाती है तो उसमें ग़लत क्या है?"

सक्सेना बताते हैं कि महात्मा गांधी का विज़न था कि खादी के माध्यम से ही गांव गांव में रोजगार दिया जा सकता है और मौजूदा प्रधानमंत्री उस विज़न के साथ ही खादी को बढ़ावा दे रहे हैं.

इसके अलावा नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापने की वजह बताते हुए केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना बताते हैं, "नरेंद्र मोदी यूथ आइकन हैं. उनकी तस्वीर से युवा वर्ग आकर्षित होता है. लोग उनकी बात सुनते हैं. उन्होंने अपने मन की बात में खादी को बढ़ावा देने की बात कही थी, उसका असर ये हुआ है कि खादी की बिक्री इस साल 34 फ़ीसदी बढ़ी है."

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Image caption खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ

सक्सेना के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ावा देने के बाद कई दूसरे सरकारी विभागों ने भी खादी को अपनाया है और इससे खादी को नया जीवन मिला है और खादी का काम कर लोगों के जीवन की स्थिति बेहतर हुई है.

सक्सेना कहते हैं कि कैलेंडर और डायरी पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापने का फ़ैसला आयोग का है और आयोग एक स्वायत्तशासी संस्थान है और ऐसे फ़ैसले ले सकती है.

इस बातचीत में सक्सेना महात्मा गांधी के प्रति अपने सम्मान का एक क़िस्सा भी बताते हैं. उनके मुताबिक 2008 में वो मैडम तुसाद म्यूज़ियम देखने गए थे.

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Image caption खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना

वे बताते हैं, "मई, 2008 में मैंने देखा कि महात्मा गांधी की तस्वीर दूसरी मंजिल पर एक डस्टबिन के सामने रखी हुई थी. डस्टबिन पूरी तरह भरा हुआ था. मैंने उसकी तस्वीर ली, वीडियो बनाया और तबके ब्रिटिश प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन को सख्त चिट्ठी लिखी, म्यूज़ियम को भी भेजा और कहा कि गांधी की मूर्ति को वर्ल्ड लीडर वाली जगह, जो पहली मंजिल पर थी, वहां रखा जाए."

सक्सेना के मुताबिक महज सात दिन के अंदर म्यूज़ियम ने माफ़ी मांगते हुए गांधी की प्रतिमा को पहली मंजिल पर वापस पहुंचाया. सक्सेना ये भी दावा करते हैं कि उन्होंने इस बाबत एक पत्र तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा था, लेकिन उनके कार्यालय से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

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