लेखिकाओं को समर्पित यह पुस्तक मेला

दिल्ली के प्रगति मैदान में जारी पुस्तक मेले में पुस्तक प्रेमियों की भीड़ भी है लेकिन नोटबंदी का असर भी साफ़ नज़र आ रहा है.

खाने-पीने के स्टॉल भी पहले से ज़्यादा नज़र आ रहे हैं.

इन सबके अलावा मेले की सबसे अहम बात उसकी थीम है, जो मानुषी के शीर्षक तले भारत की महिला लेखकों को समर्पित है.

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Image caption लगभग 700 ई.पू. में जन्मी गार्गी वाचक्नवी उत्तर वैदिक युग की संभवत: सबसे प्रख्यात प्राचीन भारतीय दार्शनिक थीं. वो वेदों की व्याख्या करने वाली और ब्रह्मवादिनी (जिसे ब्रह्म विद्या का ज्ञान हो) माना जाता है

यह किताब मेले का 60वां अंक है जिसे हर साल नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) आयोजित करता है.

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Image caption अक्का महादेवी 12वीं सदी के कर्नाटक में वीर शैव भक्ति आंदोलन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण संत कवियों में से एक थीं. महान वैष्णव संतों जैसे- बसवन्ना, सिद्धरामा तथा अल्लमप्रभु द्वारा उन्हें अक्का यानी बड़ी बहन कहा गया था. भगवान शिव को अपना पति मानते हुए उन्होंने अपनी वचन कविताओं में उनके प्रति अपने प्रेम को दर्शाया है. कन्नड़ साहित्य में उनका अग्रणी योगदान है.

एनबीटी में अंग्रेज़ी के संपादक और मेले के समन्वयक कुमार विक्रम ने बताया कि संस्था की कोशिश भारत की प्राचीन लेखिकाओं से आज के पाठकों से रुबरू कराना है.

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Image caption 'सौराष्ट्र की संत' के नाम से जानी जाने वाली गंगासती के पति बेहद संत और धर्मनिष्ठ व्यक्ति थे. गंगासती ने समाधि में प्रवेश कर अपनी इहलीला समाप्त कर ली थी. लेकिन दुनिया छोड़ने से पहले उन्होंने अपनी बहू पनाबाई को सत्य मार्ग की शिक्षा देने के लिए भजनों की रचना की थी. उनके भजन गुजरात तथा देश के अन्य भागों के लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा हैं.

इसके लिए एनबीटी ने एक श्रृंखला प्रकाशित की है जिसमें गार्गी से लेकर कुर्तुलएन हैदर तक शामिल हैं.

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Image caption मीराबाई 19वीं शताब्दी के राजस्थान में सबसे लोकप्रिय संत कवियों में से एक थीं तथा भगवान श्रीकृष्ण की भक्त थीं. उन्होंने सामाजिक परंपराओं और पारिवारिक बंधनों को तोड़ते हुए श्रीकृष्ण की प्रेयसी के रूप में भजन गाए. उनके भजनों और आध्यात्मिक जीवन ने भारतीय संस्कृति एवं साहित्य को समृद्ध बनाने में बड़ा योगदान दिया.

इसमें 700 ईसा पूर्व की कवयित्री गार्गी को और 16वीं सदी की मीरा को शामिल किया गया है.

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Image caption अतुकूरि मोल्ला 16वीं शताब्दी की तमिल कवयित्री हैं, जिन्हें सामान्य जन की सरल भाषा में लिखित काव्यात्मक तेलुगू 'रामायणम' की रचयिता के रूप में जाना जाता है.
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Image caption विख्यात फ़ारसी विदुषी एवं इतिहासकार गुलबदन बेगम 'हुमायुंनामा' के रचयिता के नाम से भी जानी जाती हैं.

मुग़ल शहज़ादी गुलबदन बेगम को भी इसमें देखा जा सकता है.

एनबीटी के अध्यक्ष बलदेवभाई शर्मा का कहना है कि भारत में प्राचीन काल से ही महिला विदुषियों की महान परंपरा रही है जिसके कारण भारत में प्रेम, करुणा, सेवा और स्त्री-पुरुष परस्पर पूरकता की भावना से परिपूर्ण सामाजिक चिंतन का प्रादुर्भाव हुआ.

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