जवान सोशल मीडिया पर बोले तो होगी कार्रवाई: बिपिन रावत

  • 15 जनवरी 2017
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Image caption आर्मी प्रमुख बिपिन रावत

भारतीय सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने उन सैनिकों को चेताया है जो अपनी तकलीफ़ सोशल मीडिया के ज़रिए ज़ाहिर कर रहे हैं. रावत ने सेना दिवस के मौके पर कहा कि जो सैनिक संतुष्ट नहीं हैं वे अपनी शिकायत सीधे उनसे कर सकते हैं.

आर्मी प्रमुख ने कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर शिकायत करने से उन वीर जवानों पर असर पड़ता है जो देश की सुरक्षा में सरहद पर डटे हुए हैं.

बिपिन रावत ने कहा, ''हाल ही में हमारे कुछ साथी सोशल मीडिया का प्रयोग करके अपनी समस्याओं को मीडिया के समक्ष पेश कर रहे हैं. इसका असर उन वीर और बहादुर जवानों पर पड़ता है जो भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा का निर्वाह करते हुए सीमाओं पर तैनात हैं.''

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सेनाध्यक्ष रावत ने कहा, ''उन वीर जवानों को प्रेरित करके हमें उनका उत्साह बढ़ाना चाहिए. अगर किसी भी जवान को किसी तरह की तकलीफ़ है और आप कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं तो मुझसे सीधा संपर्क भी कर सकते हैं. आपने जो कार्रवाई की वो अपराधजनक भी पाए जा सकते हैं और उसके लिए आप सज़ा के हक़दार भी हो सकते हैं.''

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Image caption दिल्ली में अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि देते उपसेना प्रमुख सरथ चांद

हाल ही में आर्मी के जवान और अर्धसैनिक बलों के कुछ जवानों ने सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी पीड़ा बताई थी. इसके बाद मीडिया में बहस गर्म हो गई थी कि क्या भारतीय सैनिक इस हालत में रह रहे हैं. बीएसएफ के जवान तेजबहादुर यादव ने ख़राब खाने की शिकायत की थी. उन्होंने सोशल मीडिया पर खाने के साथ वीडियो डाला था.

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. पाकिस्तान में भी इस वीडियो की खूब चर्चा हुई थी. पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर तो यहां तक लोगों ने मज़ाक उड़ाया कि जिस देश के सैनिकों को ठीक से खाना नहीं मिल रहा है, वह पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइल की बात करता है.

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Image caption वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलते आर्मी चीफ़ बिपिन रावत

तेजबहादुर के यादव बाद कई जवानों ने अपनी समस्या सोशल मीडिया पर साझा की थी. कुछ जवानों ने अपनी तकलीफ़ों को लेकर यूट्यूब पर वीडियो बनाकर डाला. एक जवान ने आरोप लगाया कि अफ़सर अपने कपड़े धुलवाने, जूते में पॉलिश करने और कुत्ते घुमाने के लिए मजबूर करते हैं.

इसके बाद सेना की तरफ़ से कहा गया का शिकायत सही जगह पर की जाए न कि सोशल मीडिया पर की जाए. आर्मी के अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग सेना के अनुशासन का उल्लंघन है.

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