अब छत्तीसगढ़ की सरकार ही बेचेगी शराब

  • आलोक पुतुल
  • रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
.

इमेज स्रोत, Thinkstock

गुजरात और बिहार की तर्ज़ पर छत्तीसगढ़ में भी शराबबंदी की मांग उठती रही है लेकिन इसके उलट वहाँ की सरकार ने अब ख़ुद शराब बेचने का निर्णय किया है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठक कर आबकारी नियम में संशोधन के लिए अध्यादेश को मंज़ूरी दी है.

इमेज स्रोत, Nishchay Bajpai

राज्य के आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के कहा, "अध्यादेश पर मुहर लगा दी गई है और अब इसे मंज़ूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा."

अध्यादेश के मुताबिक़ देसी और विदेशी शराब दुकानों से मिलने वाले राजस्व को सुरक्षित रखने और राज्य के लोगों की सेहत के ख़्याल से देसी और विदेशी शराब की फुटकर बिक्री का अधिकार अब एक नए सरकारी उपक्रम को दिया जाएगा.

इमेज स्रोत, Nishchay Bajpai

छत्तीसगढ़ में शराब की खपत और उसे बेचकर सरकारी ख़ज़ाने में पिछले 15 सालों में राजस्व में आश्चर्यजनक बढ़ोत्तरी हुई है.

मध्यप्रदेश से अलग जब छत्तीसगढ़ राज्य बना, उस समय 2001-02 में शराब से होने वाली आय 32.61 करोड़ रुपए थी, जो पिछले साल सौ गुना से भी ज़्यादा बढ़कर 3,347.54 करोड़ रूपए तक जा पहुंची.

इस साल यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

इमेज स्रोत, Nishchay Bajpai

लेकिन सरकार के इस निर्णय का विरोध भी शुरु हो गया है.

छत्तीसगढ़ में शराब के ख़िलाफ़ लगातार आंदोलन चलाने वाले शराबबंदी संयुक्त मोर्चा के निश्चय वाजपेयी कहते हैं, "एक तरफ संविधान कहता है कि जनकल्याणकारी सरकार को शराबबंदी की ओर बढ़ना है, जनता भी लगातार शराबबंदी के लिए आंदोलन कर रही है लेकिन कॉरपोरेशन बना कर सरकार के ख़ुद शराब बेचने का फ़ैसला संविधान और जनता दोनों की भावनाओं के उलट है."

इमेज स्रोत, Nishchay Bajpai

विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है.

छत्तीसगढ़ में पार्टी के प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा,"यह बहुत शर्मनाक होगा कि कोई चुनी हुई सरकार, जो अपने आपको लोकप्रिय और संवेदनशील भी कहती हो, वह शराब के धंधे में उतर रही है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)