स्कूल सिलेबस ने दहेज की वजह बताई कुरूपता

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महाराष्ट्र के स्कूल सिलेबस की एक किताब में कहा गया है कि "कुरूप और अपाहिज लड़कियों की शादी करने में दिक़्क़त होती है. वर पक्ष के लोग ऐसी लड़कियों से शादी करने के लिए अधिक दहेज मांगते हैं."

इस पर लोगों में गुस्सा है. कई लोगों ने कहा है कि इस तरह के सिलेबस से समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में मदद नहीं मिलती है.

महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि इस सामग्री को सिलेबस से निकाल दिया जाएगा.

दहेज लेना और देना 1961 से ही क़ानून अपराध है. पर व्यवहारिक रूप से यह बदस्तूर जारी है.

महिला और बाल विकास मंत्रालय ने साल 2015 में संसद में एक सवाल के जवाब में कहा कि उसके पहले के तीन साल में हर साल 8,000 से ज़्यादा महिलाओं की मौत दहेज की वजह से हुई.

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रिज़वान अर्शद (@ARSHADRIZWAN) ने ट्वीट किया, "महाराष्ट्र पाठ्यपुस्तक का यह कहना कि दहेज की वजह कुरूप होना है, पीछे की ओर ले जाने वाली मानसिकता दिखाता है."

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दिबांग (@dibang) ने ट्वीट किया, "यह दरअसल दहेज मांगने वालों की मानसिकता दिखाता है. मुझे इस पर कोई ताज्जुब नही है. यह कड़वी हक़ीक़त है."

पर भारत में पाठ्यपुस्तक पर पहली बार विवाद नहीं हो रहा है.

छत्तीसगढ़ में 2015 में एक शिक्षक ने शिकायत की थी कि स्कूल की किताब में आज़ादी के बाद बेरोज़गारी बढ़ने की वजह महिलाओं का काम करना बताया गया था.

इसी तरह 2016 में राजस्थान में स्कूल की एक किताब में घरेलू महिलाओं की तुलना गधों से की गई थी.

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