महिलाओं को वोट डलवाने में कितना सफल ‘पिंक बूथ’?

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गोवा में 40 विधानसभा सीटों पर बीते चार फरवरी को वोट डाले गए. कुछ सीटों पर रिपोलिंग के दौरान सात फरवरी को वोट डाले गए.

इस बार के चुनाव में राज्य के सभी विधानसभा सीटों पर एक ख़ास पिंक बूथ नज़र आया. पूरा का पूरा बूथ गुलाबी रंग में सजा हुआ था.

ये बूथ ख़ास तौर पर महिलाओं के लिए बनाया गया था, जहां केवल महिला कर्मचारी ही थी. सुरक्षा व्यवस्था के लिए महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था और इस प्रयोग ने गोवा की महिलाओं पर असर भी डाला.

पंजाब में 70, गोवा में 83 प्रतिशत मतदान

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गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कुणाल ने बीबीसी को बताया, "कुल 40 में 38 विधानसभा में महिलाओं ने ज़्यादा वोट दिया है. इसमें पिंक पोलिंग बूथ का अहम योगदान रहा."

इस पिंक पोलिंग को लेकर महिलाओं पर पड़ने वाले असर को रेखांकित करते हुए कुणाल बताते हैं, "हर विधानसभा क्षेत्र में जितना मतदान हुआ है, उसकी तुलना में इलाके के पिंक पोलिंग बूथ पर दो से पांच प्रतिशत ज़्यादा मतदान हुआ."

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वैसे इन बूथों पर पर पहली बार वोट देने वाली महिलाओं को ख़ास पिंक कलर का टेडी बियर का तोहफा भी चुनाव आयोग की ओर से दिया गया. आम आदमी पार्टी सहित कुछ राजनीतिक दलों ने बेजा खर्च बताते हुए इसकी आलोचना भी की है.

यादगार रहा पहली बार वोट देना

लेकिन कुणाल इन आलोचनाओं को ख़ारिज करते हुए कहते हैं, "फर्स्ट टाइम वोटर के लिए हम कुछ यादगार भेंट देना चाहते थे. ताकि पहली बार वोट देना लोगों को याद रहे, इसलिए पिंक कलर का टेडी बियर भेंट किया, उस पर कोई बहुत खर्च नहीं किया. "

शायद ये प्रयोग भी एक वजह रहा, जिसके चलते गोवा में इस बार रिकॉर्ड 83 फ़ीसदी मतदान हुआ है. हालांकि पिछली बार 2012 में भी गोवा में 82 फ़ीसदी मतदान हुआ था.

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वैसे गोवा ही नहीं, पंजाब में भी चुनाव आयोग की ओर से महिलाओं को बूथ तक लाने की कोशिश की गई. पंजाब के 117 विधानसभा सीटों में 105 क्षेत्रों एक-एक पिंक बूथ स्थापित किया गया.

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डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर उमेश सिन्हा के मुताबिक चुनाव आयोग ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐसे प्रयोग को अपनाया और इसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मणिपुर में अपनाने की तैयारी है.

बेहतर होगी महिलाओं की स्थिति

गोवा में इस प्रयोग की कामयाबी को कुणाल देश भर में अपनाए जाने की बात करते हुए कहते हैं, "चुनाव समाज के सशक्तिकरण का जरिया है, ऐसे में हमें देखना होगा कि समाज में निर्णय लेने के मामले में महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे में हमलोगों की कोशिश ये थे कि महिलाएं अपनी मर्जी से अपने उम्मीदवार चुनें. परिवार वालों के दबाव में नहीं."

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अभी भी भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति कितनी गैर बराबरी वाली है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गोवा में कुल 251 उम्मीदवारों में केवल 19 महिलाएं हैं जबकि पंजाब के कुल 1145 उम्मीदवारों में केवल 81 महिला उम्मीदवार हैं.

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