दो समलैंगिकों की चिट्ठी एक दूसरे को

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वेलेन्टाइन डे के दिन पढ़िए उन दो लोगों की चिट्ठी जो समलैंगिंक है. पावेल तो खुल कर समाज के सामने आ चुके हैं लेकिन डेविड ने अपने बारे में कम ही लोगों को बताया है.

पढ़िए डेविड की चिट्ठी पावेल को और पावेल का जवाबी खत डेविड को.

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डेविड की चिट्ठी पावेल को

प्यारे दोस्त पावेल,

घर पर कैसे हालात हैं? और क्या-कुछ चल रहा है? मैं अक्सर सोचता हूं कि क्या घरवालों को अपनी सेक्सुअलिटी के बारे में बताने से चीज़ें आसान हो जाती हैं.

मुझे नहीं मालूम कि क्या तुम्हारे साथ भी हालात कुछ इसी तरह के हैं, लेकिन फिर भी चीज़ें कम से कम पहले से अलग तो ज़रूर होंगी. क्यों सही कहा न मैंने?

मैं कहना तो बहुत कुछ चाहता हूं लेकिन कोई रास्ता नहीं दिखता. मैं ये समझ चुका हूं कि सारी बातें कुछ इस ढंग से कही जाएं जिसे वो समझ सकें. मैं बातें सोच-समझकर कहता हूं ताकि उन्हें ठेस ना पहुंचे.

ऐसा क्यों है? वो इसलिए कि ख़ून के रिश्तों में मोहब्बत की कशिश होती है.

हमारे बीच लगाव है. ज़ाहिर है मेरी पसंद की वजह से बहुत कुछ दांव पर लगा है. उस समाज में जिसकी मर्यादाएं ग़लत धारणाओं पर रखी हुई हैं. हम सबों को इसकी क़ीमत चुकानी है. उन्हें अब भी मुझसे बहुत सारी उम्मीदें हैं. लेकिन, देर-सबेर सच सामने आएगा.

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पिछले दिनों मेरा भाई मुझसे मिलने आया था. वो छुट्टियों के दिन थे.

मेरा ब्वॉयफ्रेंड भी यूनिवर्सिटी आया हुआ था. हम तीनों साथ ही रहे. भाई और मेरे बीच कभी इस बारे में बातचीत नहीं हुई, लेकिन मुझे लगता है कि उसे अंदाज़ा है.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड से उसकी मुलाक़ात कई दफ़ा हुई है. मेरी और मेरे ब्वॉयफ्रेंड की तस्वीर मेरे बिस्तर के सिरहाने लगी है. मेरे भाई की मौजूदगी में भी मैं और मेरा ब्वॉयफ्रेंड साथ सोते हैं.

ज़ाहिर है कि सारी बातें साफ़ हैं. मुझे लगता है कि भाई मेरी पसंद का आदर करता है. रिश्तों को लेकर हमारी बातें हुईं, जो आम क़िस्म की थीं.

भाई की गर्लफ्रेंड का भी ज़िक्र हुआ. वो उसकी जिंदगी में स्कूल के वक़्त से है. हमारे सवाल पसंद-नापसंद और भावनात्मक जुड़ाव के इर्द-गिर्द घूमते रहे. यहां तक कि परिवार के हितों के खिलाफ जाने वाले मुद्दों का भी ज़िक्र हुआ. मैंने उससे यहां तक कहा कि मैं उसके रिलेशनशिप को सपोर्ट करूंगा, भले परिवार कुछ भी कहे.

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कहीं न कहीं हमने एक-दूसरे का बिना शर्त साथ देने की बात की. हालांकि, मैं अपने रिश्ते के बारे में कम ही बात कर रहा था.

मुझे नहीं पता मेरा परिवार मेरे रिलेशन को कैसे देखेगा.

मुझे लगता है कि तुम्हारे परिवार और मेरे परिवार की अलग-अलग दुनिया है. बेशक भले ही हमारी कहानी एक जैसी हो. अपने स्त्रैण गुणों के लिए हम एक ही तरह से सताए गए हैं. अब हमारे पिता बूढ़े हो रहे हैं और घर में उन्हें एक ऐसे 'मर्द' की ज़रूरत है जो उनकी जगह ले सके.

अचानक सभी लोग एक ऐसा भाई चाहने लगे हैं, जिसमें 'मर्दों वाली बात' हो और जो अपनी 'पसंद और फ़ैसलों पर अडिग' रहे. अचानक लोगों में इस बात को लेकर नाराज़गी दिख रही है कि मुझे कैसा होना चाहिए. हालांकि, मुझे इसका कोई अफ़सोस नहीं है.

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मुझे लगता है कि ये उनके साथ नाइंसाफ़ी है कि सालों तक वे जो चाहते रहे, आज अचानक उन्हें किसी और चीज़ के लिए कह दिया जाए. अगर वो मुझे ही इसके लिए ही दोष दें तो भी कोई हर्ज़ नहीं.

इसलिए मैंने उन्हें हद में रहने की सलाह दी है और कहा है कि मैं उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं बन सका, इसके लिए मुझे दोष देना बंद कीजिए. मैं अपने आप में काफ़ी हूं और मैं जानता हूं कि मैं बुरा नहीं हूं.

तुम्हारा दोस्त,डेविड

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डेविड के नाम पावेल का जवाबी खत...

प्रिय डेविड,

तुम्हें ये बताते हुए खुशी है कि मैं जल्दी ही दिल्ली लौटूंगा. तुम्हारी बनाई सबसे उम्दा चाय की चुस्कियां लेते हुए तुम्हारी प्यारी जगह पर तुम्हारे साथ वक्त बिताने की आस में हूं.

सच, मैं तुम्हारी चाय को बहुत मिस करता हूं! तुम्हारा भाई बेहद उम्दा इंसान हैं. वो बहुत खुले विचारों वाले मालूम होते हैं.

तुम खुशक़िस्मत हो कि तुम्हें उनके जैसा भाई मिला है. और हां, मैं तुमसे सहमत हूं. ये यकीनन पसंद का ही मामला है. ज़रूरी नहीं कि एक व्यक्ति को इसे कहना ही पड़े. सच कहूं तो कई बार मुझे ऐसा लगता है कि हक़ीक़त में हमें ऐसा करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

एक दिन मेरी अपनी मां से बातचीत हुई. वो मुझसे ख़ास क़िस्म के सवाल पूछने लगीं. उन्होंने मेरे एचआईवी स्टेटस के बारे में पूछा. उन्होंने मेरी सेक्स लाइफ से जुड़े कुछ दूसरे सवाल भी पूछे.

हमने अब तक इस बारे में कभी बात नहीं की थी. क्योंकि हमारे समाज में सेक्स को लेकर बातचीत वर्जित सी ही है.

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मैं जानता हूं कि उनके लिए ये आसान नहीं रहा होगा. वो जिस तरह से अपनी धारणाएं और मुझे लेकर अपनी राय बदलने की कोशिश कर रही हैं, उसे सोचकर मैं उन्हें बहुत प्यार करता हूं.

लेकिन इस वजह से मुझे इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है कि मैं किसी के लिए भी किसी भी वक़्त एक खुली किताब बन जाऊं.

मैंने संक्षिप्त जवाब देकर ऐसे सवालों को टालने की कोशिश की और आगे से ऐसे सवाल न पूछने की गुज़ारिश भी. कई बार वो पूछती हैं कि मैं उन्हें क्यों नहीं बताना चाहता.

ऐसे लगता है कि मानो वो पूछने का अधिकार मांग रही हैं. जब वो ऐसा करती हैं तो बहुत अच्छा लगता है. दिल को सुकून सा मिलता है.

मैं उनकी सराहना करता हूं और उन्हें बहुत प्यार करता हूं. लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैंने खुले तौर पर अपने वजूद को ज़ाहिर कर दिया है मैं अपनी ज़िंदगी के पेचीदा पहलुओं पर बोलने के लिए बाध्य नहीं होना चाहता. मैं अब भी चाहता हूं कि मैं क्या और कब जानकारी दूं, इस पर मेरा दख़ल हो.

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हो सकता है कि उसे बेहद नकारात्मक तरीके से लिया जाए और बेचैन करने वाले नज़रिया बना लिया जाए. निशाने पर रहना या फिर उसका अभ्यास करना अच्छी बात नहीं है.

वो कहती हैं कि वो ये समझती हैं और ऐसा लगता भी है लेकिन मैं ये भी महसूस करता हूं कि इससे उनकी उत्सुकता शांत नहीं हुई है.

उन्हें इस हाल में देखकर मैं दुखी हो जाता हूं लेकिन इस मामले में मैं कुछ नहीं कर सकता. मैंने उनको बताया कि खुद को बदलने को लेकर मैं उनकी कोई सलाह या राय नहीं मानूंगा.

और मैं इसे लेकर गंभीर हूं. लेकिन मुझे लगता है कि मैं इस मामले को पूरी तरह बंद नहीं कर सकता और उनके लिए भी ये मुमकिन नहीं है. ये संघर्ष जारी है.

इसलिए बातचीत में क्या प्रसंग उठाया जाए और उससे कब किनारा कर लिया जाए, इसे लेकर सावधानी रखने की ज़रूरत है. इसकी अपनी बेचैनियां हैं और बातचीत के कभी न खत्म होने वाला सिलसिला है. एक उम्मीद के सहारे हर कोई कोशिश जारी रखेगा.

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एक दूसरे को समझते हुए जब तक मुमकिन हो शांति और प्यार के साथ साथ बने रहने के तरीके सीखते रहेंगे. मैं हमारे जैसी सोच वाले लोगों के बीच लौटने की बाट देख रहा हूं. कई बार आप खड़े रहते हुए थक जाते हैं.

कई बार एक प्याला उम्दा चाय के साथ हल्की-फुल्की दुनियावी बातें करना अच्छा लगता है. बजाय ये सोचने के कि हम अपनी ज़िंदगी में जो चाहते हैं, लोग उसके बारे में क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे.

और जल्दी ही हम सिर्फ यही कर रहे होंगे. तब तक तुम्हें और तुम्हारे ब्वॉयफ्रैंड को मेरा प्यार. तुम दोनों को और हिम्मत मिले!

ढेर सारे प्यार के साथ,

पावेल

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