शादियों में "फिजूलखर्ची" पर रोक लगाने वाला बिल

  • 16 फरवरी 2017
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Image caption जनार्धन रेड्डी अपनी बेटी के साथ उनकी शादी में

भारत में शादियां बड़ी ख़ुशी का अवसर होती हैं. समारोह कभी-कभी कई दिनों तक चलता है और इसकी तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती हैं

इन समारोहों में लाखों और करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं. हज़ारों लोगों के खाने का इंतज़ाम किया जाता है

लेकिन अब इस पर रोक लग सकती है, अगर संसद ने एक बिल पारित कर दिया तो.

Image caption रंजीत रंजन ने शादी में फ़िज़ूलख़र्ची में कमी करने के लिए एक बिल तैयार किया है

इन शादियों में "फिजूलखर्ची" को कम करने के लिए एक बिल तैयार किया गया है.

अगर ये संसद से पारित हो गया तो शादियों में अधिक खर्च करना क़ानून के खिलाफ होगा.ये एक प्राइवेट मेंबर बिल है जिसे तैयार किया है सुपौल (बिहार) से सांसद रंजीत रंजन ने जिनका सम्बन्ध कांग्रेस पार्टी से है.

रंजीत रंजन के अनुसार इस बिल में मेहमानों की संख्या सीमित करने के इलावा 5 लाख रुपये से अधिक खर्च करने पर रोक लगाने की सिफारिश की गयी है.

वो आगे कहती हैं, "अगर किसी ने सीमित की गयी राशि से अधिक पैसे खर्च किये तो उसपर 10 प्रतिशत कर लगाया जाएगा और ये पैसा ग़रीब लड़कियों की शादियों पर खर्च किया जाएगा."

शादियों में ज़रुरत से कहीं अधिक खर्च करने के रिवाज पर चिंता जताई गयी है. नवंबर में कैश की कमी के बावजूद पूर्व मंत्री और व्यापारी जनार्धन रेड्डी की बेटी की शादी में एक अंदाज़े के मुताबिक़ 74 लाख डॉलर खर्च किये गए. देश भर में रेड्डी की आलोचना हुई.

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Image caption एक तरफ शादियों में खूब पैसे खर्च किये जा रहे थे. दूसरी तरफ नोटबंदी के कारण कैश की कमी से लोगों को एटीएम और बैंकों के सामने लाइन में खड़ा होना पड़ा

रंजीत रंजन कहती हैं कि इस बिल के पीछे खुद उनका निजी अनुभव छिपा है. "हम 6 बहनें हैं. हम ने अपने माता -पिता के चेहरों पर परेशानी देखि है". वो कहती हैं कि बिहार और पंजाब जैसे राज्यों में लड़की वालों को शादियों में ज़बरदस्ती पैसे अधिक खर्च कराये जाते हैं. लड़के वाले गेस्ट लिस्ट देते हुए कहते हैं कि लिस्ट में शामिल सभी लोगों के खाने का इंतिज़ाम होना चाहिए

रंजीत रंजन बिहार से सांसद हैं लेकिन उनका सम्बन्ध पंजाब से है.

ख़ुशी के मौक़ों पर पैसे खर्च करना लोगों का अधिकार है. तो इसे क़ानून बनाकर कैसे रोक जा सकता है. इस पर सांसद ने कहा कि "लड़की वालों से पूछो कि ये ख़ुशी का मौक़ा है या नहीं" उनके विचार में लड़की वालों को पैसे खर्च करने पर मजबूर किया जाता है.

क्या क़ानून बनाने से शादियों में खर्च पर रोक लगाई जा सकती है? क्या जागरूकता सही रास्ता नहीं होगा?

रंजीत रंजन ने कहा, "जागरूकता लाने का भी काम हो रहा है. क़ानून भी ज़रूरी है. बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए जागरूकता के साथ साथ क़ानून का भी सहारा लेना पड़ा."

लेकिन संसद में ये बिल पास हो जायेगा? रंजीत रंजन को उम्मीद है कि ये बिल पारित होगा. उनके अनुसार फ़िज़ूलख़र्ची जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ सांसद भी हैं और आम जनता भी.

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