'सरकारी दुकानों की शराब चढ़ नहीं रही है'

  • आलोक प्रकाश पुतुल
  • बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
सरकारी दुकानों पर शराब खरीदने के लिए लगी लंबी लाइन

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सरकारी दुकानों पर शराब खरीदने के लिए लगी लंबी लाइन.

छत्तीसगढ़ में शराब पीने वाले इन दिनों परेशान हैं. परेशानियों की लंबी फेहरिस्त है और पीने वालों का आरोप है कि यह सब कुछ छत्तीसगढ़ सरकार के कारण हो रहा है.

असल में इस महीने से छत्तीसगढ़ सरकार ने खुद ही शराब बेचना शुरु किया है. इसके लिए सरकार ने कंपनी बनाई है, जो राज्य के अलग-अलग हिस्सों में दुकानें खोल कर शराब बेच रही है.

लेकिन कहीं दुकानों में शराब नहीं है तो कहीं क़ीमत अधिक ली जा रही है. कई जगह तो दुकानें ही नहीं खुल पा रही हैं. जहां दुकानें खुल रही हैं और शराब उपलब्ध है, वहां या तो लंबी कतार है या फिर मारामारी मची हुई है.

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शराब की दुकानों के लिए दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है. लेकिन पीने वालों की शिकायत है कि अधिकांश दुकानें देर से खुल रही हैं और जल्दी बंद हो जा रही हैं.

इसके अलावा शराब की क़ीमतों में भी बढ़ोत्तरी कर दी गई है. कई दुकानों में एक व्यक्ति को दो पाव से अधिक शराब नहीं दी जा रही है.

राजधानी रायपुर के तात्यापारा चौक की शराब दुकान में सैकड़ों लोगों की भीड़ से शराब की बोतल ख़रीद कर निकले विश्वेश देवांगन ने किसी 'योद्धा' की तरह हमें शराब की बोतल दिखाई.

विश्वेश कहते हैं, "कल तो खरीद ही नहीं पाए थे. कई घंटे के बाद जब हम पहुंचे तो शराब ही खत्म हो गई थी."

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डुमरतराई इलाके के पवन कुमार साहु गरमी में बीयर पीने के शौकीन हैं लेकिन रायपुर के43 डिग्री के तापमान में बीयर खरीदने के बाद भी इसे पीने की उनकी इच्छा जाती रही.

पवन ने कहा, " दुकान खुलने से आधा घंटा पहले लाइन में लग चुके थे. लेकिन बीयर की बोतल जब हाथ में आई तो मज़ा किरकिरा हो गया. सच कह रहा हूं, बीयर की बोतल ऐसी गरम थी, जैसे उबल रही हो. पता चला कि राज्य की किसी भी दुकान में सरकार ने फ्रिज की व्यवस्था ही नहीं की है."

एक निजी कंपनी में मार्केटिंग हेड प्रथमेश गुप्ता एक दिन पहले ही आबकारी विभाग के अपने एक मित्र से राज्य के सभी मयखानों की लिस्ट ले कर आए हैं.

प्रथमेश कहते हैं, "सरकारी शराब दुकानों के पहले तक राज्य में लगभग ढाई सौ बार थे. अभी तक इनमें से केवल 30 बार खुल पाए हैं. आप हम जैसे पीने-पिलाने वालों की मुश्किल समझ सकते हैं."

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बड़ी संख्या में हमें ऐसे लोग मिले, जिन्हें इस बात की शिकायत थी कि सरकार जो शराब बेच रही है, उसकी क्वालिटी खराब है. लोगों का कहना था कि सरकार की शराब 'चढ़' नहीं रही है.

हालांकि इन सबों से अलग राज्य में शराबबंदी के लिए लगातार आंदोलन चल रहे हैं और दुकानों के सामने शराब के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है.

सोशल मीडिया में भी शराबबंदी आंदोलन चरम पर है. तरह-तरह के कार्टून, कविताएं और तस्वीरें साझा की जा रही हैं. लेकिन इस तरह के आंदोलन बेअसर साबित हो रहे हैं.

राजधानी रायपुर के शंकरनगर इलाके में एक मेडिकल स्टोर में ही सरकार ने शराब दुकान खोल दी है. इस शराब दुकान की दीवार से बच्चों का स्कूल लगा हुआ है. स्कूल के बच्चे, शिक्षक और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रदर्शन किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई.

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सोशल मीडिया पर रमन सरकार के ख़िलाफ़ इस तरह से आलोचना हो रही है.

हालांकि राज्य के आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के पास अपने तर्क हैं और उनका दावा है कि सरकार की कोशिश क्रमबद्ध तरीके से शराब की खपत को कम करना है.

अमर अग्रवाल ने कहा, "नकली शराब को रोकना और कहीं भी शराब पी कर पड़े रहने को हतोत्साहित करने के लिए सरकार ख़ुद शराब बेच रही है. हमने शराबबंदी को लेकर एक कमिटी बनाई है, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद हम कार्रवाई करेंगे."

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लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विधायक भूपेश बघेल का कहना है कि एक लोक कल्याणकारी राज्य में सरकार द्वारा शराब की बिक्री सही नहीं है.

भूपेश बघेल कहते हैं, "छत्तीसगढ़ सुरागढ़ बन चुका है और पुलिस के संरक्षण में सरकार शराब बेच रही है. क़ानून व्यवस्था की हालत ख़राब है, जिस पर ध्यान देने की फुरसत सरकार के पास नहीं है. कांग्रेस पार्टी राज्य में शराबबंदी के लिए अपना आंदोलन जारी रखेगी."

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