'कश्मीरी पत्थरबाज़ों को मुआवज़ा तो हमें क्यों नहीं'

  • मोहित कंधारी
  • जम्मू से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कश्मीर में पत्थर फेंकने वाले नौजवान

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पाकिस्तानी जेल में मारे गए चमेल सिंह की पत्नी का कहना है कि पत्थरबाजों को मुआवज़ा दिया जा सकता है तो उन्हें क्यों नहीं.

भारतीय कैदी चमेल सिंह की हत्या लाहौर के कोट लखपत जेल में 15 जनवरी, 2013 को कर दी गई थी. उन पर पाकिस्तान में जासूसी करने का आरोप लगाया गया था.

मंगलवार को चमेल सिंह की विधवा कमलेश देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जम्मू और कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से एक और भावनात्मक अपील की.

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चमेल सिंह की विधवा कमलेश देवी

भारतीय नागरिक

कमलेश देवी चाहती हैं कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उनकी 'मन की बात' सुनें और उनके मरहूम पति के 'बलिदान' को स्वीकार करें.

जम्मू से 40 किलोमीटर की दूरी पर अखनूर तहसील में एक गुमनाम सा गांव है, परगवाल मोलु. कमलेश देवी का घर यहीं पर हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया, "इस बात को चार साल बीत गए हैं. मेरे पति का बेदर्दी से कत्ल कर दिया गया था. लेकिन मैं राज्य और केंद्र से अभी भी मुआवजे का इंतजार कर रही हूं."

कमलेश देवी ने बताया कि उनकी गुहार अभी तक नक्कारखाने में तूती की आवाज ही साबित हुई हैं.

वह कहती हैं, "मेरे पति पकड़े जाने वक्त भारतीय नागरिक थे. बाद में पाकिस्तान की एक कोर्ट ने उन्हें जासूसी के आरोप में मुजरिम करार दिया था."

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लाहौर के ही कोट लखपत जेल में सरबजीत सिंह की भी एक हमले में मौत हो गई थी

सरबजीत का परिवार

उन्होंने आगे बताया, "जेल में उनकी हत्या के बाद मुझे लगा कि उन्हें एक भारतीय नागरिक के तौर पर क्यों नहीं देखा जा रहा है जिसके परिवार को उनकी गैरमौजूदगी में सरकारी मदद की जरूरत है."

कमलेश देवी सरबजीत सिंह के मामले का हवाला भी देती हैं.

उनका कहना है, "अगर पंजाब सरकार सरबजीत सिंह के परिवार को मुआवजा दे सकती है तो जम्मू और कश्मीर सरकार को हमें इंसाफ दिलाने से कौन रोक रहा है."

कमलेश देवी का दावा है कि पंजाब सरकार ने एक करोड़ रुपए और तत्कालीन यूपीए सरकार ने 25 लाख रुपये सरबजीत के परिवार को मुआवजे के तौर पर दिए थे.

लेकिन दूसरी तरफ उनके परिवार को रोजीरोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

जम्मू और कश्मीर सरकार की मुआवजा नीति का जिक्र करते हुए वो कहती हैं, "अगर ये सरकार कश्मीर घाटी के पत्थरबाजों को मुआवजा दे सकती है तो वही मेरे बच्चों को वाजिब मुआवजा क्यों नहीं दे सकती."

जम्मू कश्मीर में आत्म समर्पण करने वाले चरमपंथियों को मुआवजा दिया जाता है. कश्मीरियों को मरहम लगाने की राज्य सरकार की इस नीति के दायरे में पत्थरबाज़ी करने वाले नौजवान भी शामिल किए गए हैं.

सीमा पार से होने वाली गोलाबारी में घायल हुए लोगों के लिए भी मुआवजे का प्रावधान किया गया है. लेकिन पाकिस्तानी जेलों में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए किसी तरह की राहत राशि या मुआवजे का इंतजाम नहीं है.

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पाकिस्तानी जेल में मारे गए चमेल सिंह की पत्नी ने पीएम मोदी से मुआवजे की गुहार लगाई है.

पीएम तक फरियाद

बीजेपी की राज्य इकाई के प्रमुख सतपाल शर्मा का कहना है कि चमेल सिंह के परिवार को मुआवजे का मुद्दा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के सामने उठाया गया है और मुख्यमंत्री चमेल सिंह के परिवार को मुआवजा देना भी चाहती हैं.

उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं कि राज्य सरकार जल्द ही चमेल सिंह के परिवार के लिए नौकरी और मुआवजे की घोषणा की जाएगी. मुझे भरोसा है कि चमेल सिंह के परिवार को इंसाफ मिलेगा."

वहीं कमलेश देवी का दावा है कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने भी अपनी चुनावी रैली में चमेल सिंह के परिवार को हर तरह की मुमकिन मदद दिलाने का वादा किया था लेकिन मदद का हाथ बढ़ाने में वे अभी तक नाकाम रहे.

दीपक सिंह चमेल सिंह के छोटे बेटे हैं.

उन्होंने बताया, "हमारे पिता एक रोज़ खेत गए और गायब हो गए. तब हम छोटे बच्चे थे. ये 2008 की बात है. हमारे घर पर कोई भी ऐसा नहीं था जो हमारी फरियाद ऊपर पहुंचाता. कमाने वाले सदस्य की गैरमौजूदगी में हमारी पढ़ाई छूट गई. और अब हमारी जवानी मां के लिए इंसाफ की लड़ाई और घर के चूल्हे की आग जुटाने में कुर्बान हो रही है."

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चमेल सिंह ने अपने परिवार तक संदेश भेजने के लिए ये चिट्ठी लिखी थी

परिवार को मुआवजा

परगवाल में मजदूरी करने वाले दीपक कहते हैं, "बुरा लगता है जब देखता हूं कि पत्थरबाजों के साथ हमसे बेहतर सलूक किया जाता है."

उन्होंने बताया, "जनवरी, 2016 में मैंने फिर से आवेदन किया है. प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्री के दफ्तर को रजिस्टर्ड डाक से चिट्ठी भेजी है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है."

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