आखिर संसद में 'चल सकी'​ मोदी सरकार की ....

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संसद सत्र ख़त्म हो गया है और केंद्र में भाजपा सरकार 'सुकून' में दिख रही है.

वजह साधारण है लेकिन उनके लिए बड़ी है. बुधवार ख़त्म हुआ बजट सत्र नरेंद्र मोदी सरकार के लिए संसद में अब तक के सबसे 'सफल' सत्रों में शुमार हो गया है.

इससे पहले के लगभग सभी सत्र हंगामे वाले रहे थे, लगातार बाधित होते रहे और गतिरोध भी बरकरार रहा.

2014 से केंद्र में सत्ता में आई मोदी सरकार को इस बात की रहत मिली होगी कि इस बजट सत्र में लोक सभा में 23 सौर राज्य सभा में 13 बिल पारित हुए.

संसद के कामकाज की समीक्षा करने वाली संस्था पीआरएस के अनुसार वर्ष 2004 के बाद के बजट सत्रों में, इस सत्र में बजटीय खर्च पर सबसे ज़्यादा चर्चा हुई.

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हालांकि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का बिल अभी भी राज्य सभा में ही अटका हुआ है.

लेकिन जीएसटी या वस्तु एवं सेवा कर से सम्बंधित चार विधेयक दोनों सदनों में पास हुए जिसके चलते सरकार ने थोड़ी चैन की सांस ली होगी.

जीएसटी को लागू करने की तमाम पिछली कोशिशें सरकार और विपक्ष के बीच जारी रहे गतिरोध में फंसी रही थीं.

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आम बजट और रेल बजट एक साथ

इस बजट सत्र में जो चीज़ ऐतिहासिक बताई जा रही है वो थी आम बजट और रेल बजट का पहली बार एक साथ प्रस्तुत किया जाना.

लेकिन इसके बावजूद कि इस बजट सत्र को पिछले कई वर्षों के सफलतम सत्रों में गिना जा रहा है, दोनों सदनों में कुल 21 घंटे की कार्यवाही हंगामे की वजह से बाधित भी रही.

लेकिन लोक सभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के अनुसार, "संसद में न सिर्फ महत्वपूर्ण बिल पास हुए बल्कि तमाम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष में एकमत भी रहा".

हालांकि प्रमुख विपक्षी दल कॉंग्रेस के कुछ नेताओं ने इस बात का ज़िक्र ज़रूर किया कि, "ज़्यादातर पास हुए बिल पिछली सरकार की ही देन कहे जा सकते हैं".

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