BBC SPECIAL: 'गुजरात में मुसलमानों को डरने का नहीं, इंशाल्लाह अच्छा होगा'

  • 15 अप्रैल 2017

अहमदाबाद में जमालपुर-खड़िया के विधायक भूषण अशोकभाई भट एक मामूली सी कुर्सी पर बैठे हैं और रोज़ की तरह आज सुबह भी अपने क्षेत्र के लोगों से मिल रहे हैं. उनका दफ्तर काफी छोटा है. इसलिए उनसे मिलने वाले लोगों की लाइन बाहर सड़क तक लगी है.

अधिकतर विधायक और सांसद आम तौर से फ़रयादियों की ऐसी सभाएं रोज़ाना लगाते हैं. भूषण भट की सभा भी एक सामान्य बैठक है.

फ़र्क़ केवल इतना है कि भट सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं और वहां मौजूद अधिकतर फ़रियादी मुसलमान. दाढ़ी वाले मर्द और काले बुर्क़े वाली महिलाएं एक बीजेपी विधायक से अपनी समस्याओं पर चर्चा करें, गुजरात से बाहर इसकी कल्पना आसान नहीं है.

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लेकिन यहाँ ये नज़ारा रोज़ 9 बजे से 11 बजे सुबह तक देखा जा सकता है. लोगों का ध्यान भूषण भट की तरफ़ है जिसका एक तरह से वो आनंद भी लेते हैं.

लेकिन फ़रयादियों की शिकायतें ध्यान से सुनते भी हैं. इस सवाल पर वे कहते हैं, "ना मैं किसी का नाम पूछता हूँ, ना किसी का धर्म पूछता हूँ और ना किसी की जात पूछता हूँ. वो अपना काम लेकर आते हैं. मैं उनका काम जितना हो सके, करने की कोशिश करता हूँ."

भट से मिलने आये लोगों में हिजाबी फ़हमीदा बानो और काले बुर्क़े में उनकी बेटी शाहीन हैं. खुद को तीन तलाक़ की शिकार कहने वाली फ़हमीदा बानो कहती हैं कि उनके पति ने तलाक़ के बाद उन्हें उनके घर से बाहर कर दिया था.

चेहरे से नक़ाब उठाकर उनकी बेटी शाहीन कहती हैं कि विधायक जी ने उनकी माँ को उनके घर वापस भेजने में मदद की.

मुसलमानों की है मदद

वे कहती हैं, "मेरी मम्मी का केस चल रहा था. मैं उनकी (भूषण भट की) हेल्प लेने आयी थी. हमारे घर में सील (ताला) लग गया था. इसका खुलना मुश्किल लग रहा था लेकिन उन्होंने हमारी बहुत मदद की. हमारा काम हो गया."

माँ-बेटी की इस जोड़ी ने विधायक से निजी काम में मदद ली. लेकिन यहाँ आधार कार्ड बनवाने में मदद लेने आये लोग भी थे, पुलिस के खिलाफ शिकायत करने वाले लोग भी और कुछ ऐसे जो काम होने पर विधायक का शुक्रिया अदा करने आये थे.

भूषण भट कहते हैं, "उनको (मुसलमानों को) कोई बड़ा काम नहीं होता है. अस्पताल का काम होता है, पानी का काम होता है, बिजली नहीं होती है, अच्छे स्कूल में प्रवेश के लिए आते हैं. आपस में झगड़ा हुआ तो आते हैं. पुलिस के खिलाफ शिकायत लेकर आते हैं. मैं उनकी इन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करता हूँ."

कांग्रेस पर आरोप

उनसे मिलने आये एक वरिष्ठ मुस्लिम मुहम्मद इक़बाल कहते हैं, "मैं इनके (भूषण भट) पिता जी के साथ भी रह चुका हूँ जो विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं. इनके बच्चे हैं भूषण भट. इनके साथ भेदभाव का एहसास कभी नहीं हुआ. वो हमारे हर प्रोग्राम में आते हैं. हम उनके हर प्रोग्राम में जाते हैं."

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भारतीय जनता पार्टी के विधायक और मदद की आस में पहुंचे फ़रियादी मुसलमान

भूषण भट जमालपुर-खड़िया चुनावी क्षेत्र के प्रतिनिधि हैं जहाँ से उनके पिता अशोक भट ने चुनाव जीते थे. इस क्षेत्र में 48 प्रतिशत वोटर मुसलमान हैं. कुछ लोगों के अनुसार मुसलमानों की समस्याओं को सुनना दिसंबर में होने वाले चुनाव में जीत के लिए भी ज़रूरी हो सकता है.

लेकिन भूषण भट दावा करते हैं कि वो वोटों की राजनीति नहीं करते. वे कहते हैं, "साल 1857 से लेकर साल 1947 तक देश की आज़ादी की लड़ाई में हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी शामिल थे. आज़ादी के बाद वोटों की राजनीति शुरू हुई और समाज तोड़ने की राजनीति शुरू हुई.''

उनके अनुसार उस समय के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2001 में सत्ता में आने के बाद समाज को जोड़ने का काम किया. वे कहते हैं, "कांग्रेस समाज तोड़ने की राजनीति कर रही थी, नरेंद्र भाई समाज को जोड़ने की राजनीति कर रहे थे, विकास की राजनीति कर रहे थे."

भारतीय जनता पार्टी गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने से पहले से सत्ता में हैं. पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावों में नज़रअंदाज़ किया और उनके वोटों के बग़ैर पार्टी चुनाव जीतती आ रही है. मुसलमानों को शिकायत है कि उन्हें सत्ता और पावर से दूर रखा जा रहा है.

गुजरात में दूसरी पार्टियों के खिलाफ भी मुस्लिम समुदाय को सियासत से अलग रखने का इलज़ाम है. मुसलमान गुजरात की कुल आबादी का 9.5 प्रतिशत हैं. इस समय 182 सीटों वाली विधान सभा में केवल दो मुस्लिम विधायक हैं, दोनों कांग्रेस के हैं.

जो गुजरात में बरसों से होता चला आ रहा है, वो उत्तर प्रदेश में हाल के विधान सभा चुनाव में हुआ. बीजेपी ने मुस्लिम उम्मीदवार और मुस्लिम वोट के बग़ैर रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल की. यूपी के मुसलमान घबराये हुए हैं. उन्हें लगता है कि बीजेपी गुजराती मुसलमाओं की तरह उन्हें भी सियासत से बेदखल कर सकती है, उनकी पहचान मिटा सकती ही और उन्हें दूसरे दर्जे का शहरी बना सकती है.

अब डरने की ज़रूरत नहीं

लेकिन भूषण भट से मिलने आये एक पार्टी समर्थक मुहम्मद तारिक़ कहते हैं, "गुजरात में भी जब बीजेपी पहली बार सत्ता में आयी थी तो मुसलमान बहुत डरे हुए थे. पर डरने की ज़रूरत नहीं थी. हमारे गुजरात के अंदर जैसे शिक्षा, हज और वक़्फ़ का मामला है, बीजेपी ने इन मुद्दों पर काम किया है".

वो यूपी के मुसलमान को सलाह देते हुए कहते हैं, "यही अभी यूपी में हो रहा है कि वहां मुसलमान डर रहे है, मुसलमान को कांग्रेस वाले, समाजवादी पार्टी वाले डरा रहे हैं. लेकिन डरने का नहीं. इंशाल्लाह अच्छा काम होयगा."

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भूषण भट भी कहते हैं कि बीजेपी से मुसलमानों को डरने की ज़रूरत नहीं. उनके अनुसार उनकी पार्टी के सभी विधायक मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव नहीं करते. लेकिन उन्हीं की सभा में अलग-थलग बैठी एक मुस्लिम महिला ज़ीना बीजेपी की आलोचना करती हैं. वो कहती हैं कि उन्हें बराबरी का अधिकार चाहिए, लेकिन बीजेपी सरकार उन्हें बराबरी का हक़ नहीं देती.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से सहमति रखने वाले लेखक विष्णु पंड्या के अनुसार मुस्लिम समुदाय बीजेपी की तरफ आकर्षित हो रहा है. हाल में पद्मश्री सम्मान हासिल करने के बाद दिल्ली से लौटने पर पंड्या ने कहा कि बीजेपी को मुस्लिम समुदाय में नयी लीडरशिप खड़ी करनी चाहिए.

पंड्या उन गिने-चुने लोगों में से हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जवानी के दिनों से जानते हैं. वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री मुस्लिम समुदाय को साथ लेकर चल रहे हैं. वे कहते हैं, "आप जल्द देखेंगे कुछ परिवर्तन होगा".

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