केजरीवाल आजकल मोदी पर इतने ख़ामोश क्यों?

  • ज़ुबैर अहमद
  • बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अरविंद केजरीवाल

इमेज स्रोत, EPA

पिछले कुछ महीनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे बड़े आलोचक समझे जाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ख़ामोश क्यों हैं?

कुछ महीने पहले तक ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री के हर बयान और नीति पर टिप्पणी किया करते थे. यहाँ तक कि उनके कुछ आलोचक कहने लगे थे कि केजरीवाल नरेंद्र मोदी के पीछे पड़ गए हैं.

दूसरी तरफ उनके समर्थक ये मानते थे कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ केजरीवाल की अकेली दबंग आवाज़ थी.

आम आदमी पार्टी के नेता और केजरीवाल के क़रीबी साथी आशुतोष कहते हैं, "ये बात पूरी तरह से सही नहीं है. ये बात सच है कि उन्होंने (केजरीवाल ने) थोड़ा बोलना कम किया है."

चुनाव थी वजह

लेकिन आशुतोष के मुताबिक़ केजरीवाल चुनाव के समय मोदी के ख़िलाफ़ बयान दिया करते थे.

आशुतोष ने बताया, "आपको मालूम है कि पहले पंजाब के चुनाव थे, एमसीडी (दिल्ली का स्थानीय चुनाव) के चुनाव थे और आप जानते हैं कि चुनाव की अपनी एक अलग भूमिका होती है, अलग तरीक़े की भाषा होती है."

इमेज स्रोत, Twitter

आशुतोष के अनुसार उनकी सरकार और मुख्यमंत्री काम पर फोकस कर रहे हैं. उन्होंने बताया, "पिछले चार-पांच महीनों में आपने देखा होगा कि दिल्ली में ज़बरदस्त काम हो रहा है. शिक्षा पर काम हो रहा है, स्वास्थ्य पर काम हो रहा है. लेकिन नीतिगत तरीक़े से वो (केजरीवाल) बोल भी रहे हैं. ट्वीटर पर और सोशल मीडिया पर अपनी राय भी रख रहे हैं."

समझा जाता है कि अप्रैल में दिल्ली के स्थानीय चुनाव में आम आदमी पार्टी की बुरी हार के बाद से अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी पर सार्वजनिक या व्यक्तिगत हमले करने से परहेज़ किया है. बेशक उस चुनाव में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया था कि उनकी पार्टी को चिंतन करने की ज़रुरत है और उनकी सरकार का फोकस काम करने पर होना चाहिए.

इमेज स्रोत, Getty Images

तो क्या ये उनकी एक नई रणनीति है? क्या ये किसी सोची-समझी रणनीति का नतीजा है? आशुतोष कहते हैं-नहीं. उनके अनुसार चुनाव के समय की बात अलग थी. अभी चुनाव नहीं है, इस लिए दूसरे मुद्दों पर भी बातें की जा रही हैं. लेकिन पार्टी राष्ट्रीय मुद्दों पर टिप्पणी कर रही है, पार्टी के नेता भी कर रहे हैं.

कोई दुश्मनी नहीं है

लेकिन अरविंद केजरीवाल अब नरेंद्र मोदी को सीधा निशाना नहीं बना रहे हैं. दूसरी तरफ प्रधानमंत्री भी दिल्ली के मुख्यमंत्री के बारे में टिप्पणी नहीं कर रहे हैं. तो क्या दोनों पक्ष के बीच एक दूसरे के ख़िलाफ़ बयान न जारी करने का कोई अनौपचारिक समझौता हुआ है?

आशुतोष कहते हैं, "ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है. वो (नरेंद्र मोदी) देश के प्रधानमंत्री हैं. उनके साथ हमारी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी तो है नहीं. न उनकी पार्टी के साथ कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है."

इमेज स्रोत, Twitter

आशुतोष के अनुसार मुद्दों पर मतभेद ज़रूर है जो लोकतंत्र में होना चाहिए.

आशुतोष के मुताबिक जब वो (प्रधानमंत्री) ऐसी बातें कहते हैं जो देश के लिए ठीक नहीं है, राष्ट्र के लिए ठीक नहीं है तो पार्टी अपनी राय रखती है, उस पर अरविंद केजरीवाल जी भी अपनी राय रखते हैं."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)