क्या नरेंद्र मोदी केवल गुजरात के प्रधानमंत्री हैं?

  • दिलीप शर्मा
  • गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
असम

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भयावह बाढ़ की चपेट में है असम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में बाढ़ की जिस तत्परता से सुध ली, उसी तत्परता से बाढ़ प्रभावित असम नहीं जाने पर बीजेपी सरकार को तीखे हमले झेलने पड़ रहे हैं.

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं राज्य सभा सांसद रिपुन बोरा ने बीबीसी से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने असम की उपेक्षा की है.

उन्होंने कहा, ''मोदी के प्रधानमंत्री बने तीन साल हो चुके हैं और पिछले तीन साल में तीन बार असम में भंयकर बाढ़ आई लेकिन वो एक बार भी यहां नहीं आए.''

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बाढ़ के दौरान कश्मीर का दौरा किया, तमिलनाडु गए और अब गुजरात गए हैं, यह सही में एक सराहनीय काम है. लेकिन असम की उपेक्षा क्यों?''

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विपक्ष का हमला

बोरा ने कहा, ''असम में इस साल बाढ़ के कारण कम से कम 80 लोग मारे जा चुके हैं लेकिन न तो प्रधानमंत्री यहां आए और न ही पीड़ितों के परिवार को अब तक कोई मुआवजा मिला है. गुजरात में प्रधानमंत्री ने 500 करोड़ के राहत पैकेज के साथ ही बाढ़ में मरने वाले व्यक्ति के परिजनों को दो लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है.''

विपक्षी नेता का कहना है कि 'मोदी केवल गुजरात के प्रधानमंत्री नहीं हैं और उन्हें सभी प्रदेशों को समान रूप से देखना होगा.'

विपक्ष का कहना है कि 'असम में बीजेपी की सरकार आने के बाद 2016 में मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने बाढ़ राशि के लिए जो प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, उसके तहत भी अभी तक पैसा नहीं मिला है.'

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केंद्र से मदद नहीं मिली

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रमुख और लोकसभा सांसद मौलाना बदरूद्दीन अजमल ने कहा है कि असम में बाढ़ से व्यापक नुक़सान हुआ है.

उन्होंने कहा कि कई लोगों की मौत हुई है, लेकिन केंद्र सरकार की तरफ़ से अब तक कोई मदद नहीं दी गई.

उन्होंने कहा, ''अफसोस की बात यह है कि प्रधानमंत्री अब तक असम में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए एक बार भी नहीं आए. असम में बाढ़ पीड़ितों के लिए अभी तक राहत का काम ही शुरू नहीं हुआ है. बाढ़ में अपना सब कुछ गंवाने वाले लोगों को समय पर राहत नहीं दी जाएगी तो वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे.''

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असम में बाढ़ से बिगड़े हालात

बाढ़ से 77 लोगों की मौत

आल असम स्टूडेंट्स यूनियन के सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य का कहना है कि बाढ़ के समय प्रधानमंत्री मोदी का यहां नहीं आना असम के लोगों के साथ अन्याय है.

उन्होंने कहा, ''अपने भाषण में असम और पूर्वोत्तर राज्यों को अहमियत देने वाले मोदी संकट के समय कैसे भूल सकते हैं.''

असम सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ की स्थिति में सुधार होने की बात कही जा रही है परंतु अब भी राज्य के 9 ज़िलों में कुल 142 गांव पानी में डूबे हुए हैं. नगांव ज़िले के होजाई शहर में मंगलवार को डूबने से एक और व्यक्ति की मौत हो गई.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक बाढ़ में कम से कम 77 लोगों की मौत हो चुकी है.

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि मोरीगांव और गोलाघाट ज़िले में अब भी बाढ़ के कारण हालात बिगड़े हुए हैं.

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2,939 करोड़ रुपये का राहत पैकेज मांगा

मंगलवार शाम तक बाढ़ प्रभावितों की संख्या 23,118 बताई गई है. बेघर हुए 4,716 लोग आज भी अलग-अलग राहत शिविरों में रह रहे हैं.

इस बीच राज्य में बाढ़ की स्थिति और नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे केंद्रीय दल ने मुख्य सचिव वीके पीपरसेनिया समेत कई शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की है.

राज्य सरकार ने केंद्रीय दल को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें केंद्र सरकार से बाढ़ के नुक़सान के लिए 2,939 करोड़ रुपए मांगे गए हैं.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव वी शशांक के नेतृत्व में मंगलवार को यहां पहुंचे अंतरमंत्रालय केंद्रीय दल ने राज्य में बाढ़ से अब तक हुए नुक़सान की समीक्षा पर कई अलग-अलग बैठकें की हैं.

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गुजरात में बाढ़ प्रभावित इलाक़ों के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इस संदर्भ में मुख्य सचिव पीपरसेनिया ने संवाददाताओं को बताया कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने 18 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाक़ात कर उन्हें बाढ़ की स्थिति से अवगत कराया था.

इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री के निर्देश पर अंतरमंत्रालय की टीम यहां बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने आई है.

मुख्य सचिव की एक जानकारी के अनुसार, फिलहाल राज्य आपदा कोष में 389 करोड़ रुपए जमा हैं.

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