मोदी के भाषण पर क्या बोली पाकिस्तानी मीडिया

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लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कश्मीर समस्या को सुलझाने की दिशा में एक कदम बढ़ाया.

उन्होंने कहा, "कश्मीर समस्या न गाली से सुलझेगी और ना ही गोली से सुलझेगी, ये समस्या सुलझेगी तो सिर्फ हर कश्मीरी को गले लगाने से ही सुलझेगी."

उनसे इस बयान को पाकिस्तान और कश्मीर की मीडिया ने एक अच्छी शुरुआत के रूप में लिया है.

'जंग' ने 'मोदी सरकार को सही सलाह' शीर्षक के साथ अपना संपादकीय छापा है. अख़बार लिखता है कि भारत सरकार पाकिस्तान से बातचीत करने से बच रही है जबकि इलाके में शांति और स्थिरता के लिए ये ज़रूरी है.

'जंग' ने ये भी लिखा है कि कश्मीर समस्या पर 13 सदस्यीय भारतीय संसदीय दल ने अपनी रिपोर्ट में दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने के लिए कहा है.

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कश्मीर समस्या

अख़बार ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार को कश्मीर में शांति की बहाली से कोई सरोकार नहीं है. कश्मीर के लोगों को बेहतर सुविधाएं चाहिए और सेना की ज़्यादती लोगों को चुप नहीं करा सकती. बिना समय गंवाए कश्मीर की समस्या को सुलझाया जाना चाहिए.

पाकिस्तान से छपने वाले 'द न्यूज़' और 'द नेशन' ने भी मोदी के बयान को सुर्खी बनाकर छापा है.

वहीं पाकिस्तान के अख़बार 'डॉन' ने लिखा है कि 'आज़ाद कश्मीर' (यानी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर) के लगभग सभी शहरों में कल विरोध प्रदर्शन हुए और भारत प्रशासित कश्मीर के इलाकों में खा़सकर श्रीनगर में कर्फ़्यू लगा रहा.

इसी तरह 'पाकिस्तान टुडे' ने भी कश्मीर पर दिए मोदी के बयान को ही मुख्य ख़बर बनाया है. अख़बार लिखता है कि भारतीय मीडिया मोदी के बयान को जम्मू और कश्मीर को लेकर उनकी नीति में परिवर्तन के संकेत की तरह देख रहा है.

अख़बार ने इस ओर भी ध्यान खींचा है कि चीन और पाकिस्तान के साथ विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ नहीं कहा.

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कश्मीरी अख़बार

ग्रेटर कश्मीर ने अपने संपादकीय में लिखा है कि भारत और पाकिस्तान दोनों देश अपनी आज़ादी की 70वीं सालगिरह मना रहे हैं.

दोनों देशों की नींव रखने वाले हिंसा और विस्तारवाद के ख़िलाफ़ थे, लेकिन आज दोनों देश बड़ी बड़ी सेनाओं पर करोड़ों खर्च करते हैं.

'ग्रेटर कश्मीर' ने ये भी लिखा है कि अगर अपनी आज़ादी की 100वीं वर्षगांठ पर दोनों देश तनाव में रहे और दोनों में आज की तरह मतभेद रहा तो ये दुर्भाग्यपूर्ण होगा. अगले 30 सालों में कोशिश की जानी चाहिए कि दोनों अपने संस्थापकों के पदचिन्हों पर चलें और उनके सपने को साकार करें.

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'धरती का स्वर्ग'

इसी तरह घाटी से छपने वाले एक और अख़बार 'राइज़िंग कश्मीर' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि मोदी ने कश्मीरियों की तरफ़ अपना हाथ बढ़ाया है और पूरा भारत कश्मीर को एक बार फिर से 'धरती का स्वर्ग' बनाना चाहता है.

इससे पहले भी इस तरह के बयान आए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर ऐसा कोई काम नहीं हुआ है, लोग अब बातें नहीं सुनना चाहते.

अख़बार कहता है कि सरकार कश्मीर के लिए आर्थिक मदद की घोषणा बड़ी आसानी से कर देती है, लेकिन यहां से सेना हटाने और 'अफ़स्पा' जैसे क़ानून हटाने के मामले में अपने कान बंद कर लेती है.

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