कयामत वाली है आज की रात, पानी बढ़ा तो....

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सुरेंद्र मुखिया उस रात मछली-भात खाकर सोए थे. सोचा था, नींद अच्छी आएगी. रेडियो पर पौने नौ बजे के समाचार सुनने के बाद कब आंख लग गई, इसका सुरेंद्र को पता भी नहीं चला.

सुबह के तीन बजने वाले थे, जब लोगों के शोर से उनकी नींद खुली और देखा कि घर में बाढ़ का पानी आ गया है. पानी का बहाव तेज़ था. डरे-सहमे लोग घर छोड़कर भागने लगे. साथ में बाल-बच्चे और जानवर भी थे.

सुरेंद्र बिहार के बाढ़ प्रभावित पूर्वी चंपारण जिले के भरौलिया गांव के रहने वाले हैं. ये गांव ज़िला मुख्यालय मोतिहारी से महज छह किलोमीटर दूर है.

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400 घरों वाले इस गांव के ज्यादातर लोग मोतिहारी-ढाका रोड पर स्थित भरौलिया पुल और उसके पास की सड़क पर रह रहे हैं. हर उम्र के इंसान और जानवर साथ-साथ. बाढ़ ने इनके बीच की दूरी मिटा दी है. सब एक ही तंबू में रह रहे हैं.

बिहार में कब-कब बाढ़ ने मचाई तबाही

मंत्री-विधायक नहीं आए

सुरेंद्र मुखिया ने भोजपुरी में बीबीसी से कहा, 'केहू नईखे आइल. रउआ पहिलका आदमी बानी, जो इंहा इईनी ह. सबे लोग भाग गईल बा. विधायक आउर मंत्री के त हमनी देखबो न कईनी. न पीएम, डीएम, चाहे सीएम के. आई त पिटायी लोग. (कोई नहीं आया है. आप पहले आदमी हैं जो आए हैं. सब लोग भाग गए हैं. विधायक और मंत्री को हमने नहीं देखा. पीएम, सीएम और डीएम भी नहीं आए. अब अगर वे लोग आए तो गांव के लोग उन्हें पीट देंगे.)

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Image caption बाढ़ प्रभावित लोगों में गुस्सा है

ग़ौरतलब है कि मोतिहारी के विधायक प्रमोद कुमार बिहार की नीतीश कुमार सरकार में बीजेपी कोटे से मंत्री हैं. यहां के सांसद राधामोहन सिंह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कृषि मंत्री हैं. इस बीच राधामोहन सिंह ने मोतिहारी इलाके के पंद्रह गांवों में दौरा करने का दावा किया है. इसकी ख़बर और कुछ तस्वीरें स्थानीय माडिया में प्रसारित हुई हैं.

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सड़क पर आशियाना

सड़क पर तंबू लगे हैं और लोग राहत की आस में टकटकी लगाए बैठे हैं. सत्तर साल की अनती देवी बाढ़ के पानी में भीगकर बर्बाद हो चुके गेहूं को सड़क पर ही सुखा रही हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि 1974 के बाद ऐसी बाढ़ पहली बार आई है. बाढ़ तो 1998, 2000, 2001 और 2007 में भी आई थी, लेकिन उसकी भयावहता इतनी नहीं थी.

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मैंने उनसे पूछा कि क्या खाया है. जवाब में अनती देवी ने कहा- रातु त चिउड़ा खईनी, आजु मुखिया जी भात-दाल बनवईत बाड़े. बनी तो उहे खायेब. ( कल रात को चूड़ा खाए थे. आज मुखिया जी चावल-दाल बनवा रहे हैं. अगर बना तो वही खाऊंगी.)

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कयामत की रात

मैं मोटरसाइकिल, फिर ट्रैक्टर और आख़िरकार कमर भर पानी से होते हुए वहां पैदल पहुंचा था. रास्ते में कुछ लोगों ने बताया कि पिछले चार दिनों से जमा बाढ़ का पानी घट रहा है. वहीं खड़े कुछ दूसरे लोगों ने कहा कि लखौरा की तरफ़ से और पानी आ रहा है. ज़ाहिर है आज की रात कयामत वाली है. अगर पानी बढ़ा, तो परेशानी और बढ़ जाएगी.

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Image caption लोगों को जहां जगह मिल रही है, वहीं शरण ले रहे हैं.

इस बीच बिहार में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 253 हो गई है. आपदा प्रबंधन विभाग की विज्ञप्ति के मुताबिक सबसे अधिक 57 मौतें अररिया जिले में हुई हैं. इसके साथ ही सीतामढ़ी में 31, कटिहार में 23, पश्चिमी चंपारण में 29, पूर्वी चंपारण में 19, किशनगंज में 11, दरभंगा में 10, पूर्णिया में 9, गोपालगंज में 8, मुजफ़्फ़रपुर और सहरसा में 4-4, खगड़िया में 3 और सारण में 2 लोगों की मौत बाढ़ के कारण हुई है.

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Image caption बूढ़े और बीमार लोगों को ज़्यादा परेशानी हो रही है.

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पटना, गया, भागलपुर और पूर्णिया मे सोमवार को बारिश होने की आशंका है. बाढ़ से बिहार की करीब सवा करोड़ आबादी प्रभावित है और 40 में से कुल 18 ज़िले इसकी चपेट में हैं.

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