'मुंबई की तकलीफ़ सत्ता में बैठे लोगों की नाकामी'

  • 29 अगस्त 2017
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मुंबई में मंगलवार को बहुत ज़ोरदार बारिश हुई. ज़्यादातर इलाकों में पानी जमा है, रेल लाइनें ठप हैं, लोग यहां-वहां फंसे हैं, कह सकते हैं थम सी गई है मुंबई की ज़िंदगी.

लेकिन साल 2005 की स्थिति अलग थी. उस वक्त एक घंटे में 944 मिलीमीटर बारिश हो गई थी और पूरी मुंबई डूब गई थी. तब किसी के हाथ में कुछ नहीं था.

मुंबई में मंगलवार को जो बारिश हुई, वो 12 साल पहले दिखे प्राकृतिक प्रकोप जैसी नहीं है. ये सामान्य से थोड़ी ज्यादा बारिश है.

लेकिन साफ है, मुंबई महानगर पालिका ने 12 साल पहले जो विपत्ति आई थी, उससे कुछ भी नहीं सीखा है. फिलहाल ऐसा ही दिखता है.

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सवाल

बारिश के पानी को निकालने के लिए हमारे पास जो ड्रेनेज सिस्टम है, उसकी क्षमता 25 मिलीमीटर है, उसे 50 मिलीमीटर किया जाना है. यानी अगर एक घंटे में 50 मिलीमीटर बारिश होती है तो पानी तुरंत निकल जाना चाहिए.

केंद्र सरकार से 16 सौ करोड़ रुपये का फंड आने के बाद भी वो परियोजना सिर्फ 40 फीसद पूरी हुई है.

फंड होने बाद भी अगर काम नहीं होता है तो निश्चित तौर पर ये हमारी नाकामी है. सत्ता में बैठे लोगों की नाकामी है. नहीं तो इस बारिश का पानी निकलना कोई मुश्किल काम नहीं था.

बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए मुंबई में छह पंपिंग स्टेशन हैं. दो-तीन साल में पंपिंग स्टेशन पर 12 सौ करोड़ रुपये ख़र्च किए गए हैं. उसके बाद भी पंपिंग स्टेशन जाम हो चुके हैं, काम नहीं कर रहे हैं तो ये किसकी नाकामी है?

मुंबई के लोगों को जो तकलीफ हुई उसे लेकर मुझे सहानुभूति है. लेकिन हमें सवाल पूछना होगा कि जिन लोगों के हाथ में सत्ता दी गई है, वो सही मायने में मुंबई के लोगों और उनके जीवन के साथ न्याय कर पा रहे हैं?

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सज़ा

ड्रेनेज सिस्टम बनाना मुंबई महापालिका की जिम्मेदारी है. उसके पास 62 हज़ार करोड़ रुपये का कैश रिजर्व है. 38 हज़ार करोड़ रुपये का सालाना बजट है.

पूरे एशिया का सबसे बड़ा म्युनिसिपल प्रतिष्ठान है.

सरकार को आपदा प्रबंधन विभाग के लोगों को तैयार रखना चाहिए था कि मुंबई में कभी भी जोरदार बारिश हो सकती है.

मुंबई महानगर पालिका में जो आपदा प्रबंधन विभाग का दफ्तर महापालिका मुख्यालय के तहखाने में है और उसके प्रमुख बीते कई दिनों से छुट्टी पर हैं. वो प्रमुख विहीन यूनिट बनी हुई है. महानगर पालिका के पास किसी भी तरह की आपदा से निपटने को लेकर कोई तैयारी नहीं है. इसकी सज़ा मुंबई के हर निवासी को मिल रही है.

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Image caption फाइल चित्र

थमी नहीं मुंबई

हालांकि, मुंबई के लोगों को इस तरह की तकलीफों की आदत हो चुकी है. मुंबई की अपनी 'स्पीरिट' है.

बारिश को लेकर सुबह कोई जानकारी नहीं दी गई थी. सभी लोग मंगलवार की सुबह काम पर चले गए. अचानक कहा गया कि बहुत बारिश होने वाली सभी लोग जाइए. ट्रेनें तब तक बंद हो चुकी थीं. कई लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा.

गणपति उत्सव में मंगलवार को पांचवें दिन का वसर्जन है. बड़े पैमाने पर विसर्जन होता है. ये अपील भी की गई कि विसर्जन छठे दिन किया जाए लेकिन बारिश के बीच भी पूरे उत्साह के साथ विसर्जन भी जारी है. दोपहर बाद से लगातार ढोल और नगाड़ों की आवाज़ आ रही है. सरकार को चाहिए कि उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखे.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय के साथ बातचीत पर आधारित)

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