डोकलाम से सीखे भारत, हम आत्मरक्षा जारी रखेंगे: चीन

  • 30 अगस्त 2017
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भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद सुलझने का दावा किया जा रहा है, लेकिन चीन ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि भारत को इससे सबक मिला होगा और वह आगे भविष्य में ऐसी हरकत नहीं करेगा. साथ ही चीन ने कहा है कि वह डोकलाम में सड़क बनाता रहेगा.

गौरतलब है कि डोकलाम से दोनों देशों द्वारा सेना हटाने के फ़ैसले के बाद 3-5 सितंबर तक चीन में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने की घोषणा हुई थी.

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है, "चीन साफ़ कर चुका है कि भारत के सैनिकों और सामान द्वारा सीमा पर किया गया अतिक्रमण हटा लिया गया है और चीनी सैनिक डोकलाम में अपनी पेट्रोलिंग जारी रखेंगे. चीन डोकलाम इलाके में सड़क बनाता रहेगा ताकि वह अपनी सीमा की रक्षा कर सके और सैनिकों एवं जनता को सुविधाएं दे सके. मौसम और परिस्थितियों के अनुकूल हम निर्माण की उचित योजना बनाएंगे."

क्या फिर पैदा हो सकता है डोकलाम का विवाद?

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Image caption चीनी विदेश मंत्री वांग यी

भारत का नहीं आया कोई जवाब

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि 28 अगस्त की दोपहर को भारतीय सैनिक डोकलाम से चले गए जिसके बाद यह विवाद समाप्त हो गया. उन्होंने कहा, "यह एक बुनियादी तथ्य है और निश्चित रूप से हमें आशा है कि भारत इस घटना से सबक सीखेगा और फ़िर से ऐसी घटना होने से रोकेगा."

हालांकि, अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीनी विदेश मंत्री के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं दी है. वांग ने कहा है कि भारत और चीन दो बड़े देश हैं और यह स्वाभाविक है कि दोनों के बीच बातचीत में कुछ बाधाएं रहती हैं.

डोकलाम में अभी कितने चीनी सैनिक हैं इस सवाल पर हुआ ने कहा कि यह असामान्य सवाल है और चीन सीमावर्ती सुरक्षा और ज़मीनी स्थिति की आवश्यकता के अनुसार अपने सैन्य संसाधनों को तैनात करेगा.

चीन की किस आशंका ने सुलझाया डोकलाम विवाद?

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ब्रिक्स एक सकारात्मक कदम

भारत-चीन के बीच डोकलाम विवाद ब्रिक्स के कारण सुलझा है ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं क्योंकि चीन चाहता था कि ब्रिक्स सम्मेलन में भारत आए. इससे जुड़े सवाल पर हुआ ने कहा, "ब्रिक्स सम्मेलन सभी 5 देशों का सम्मेलन है. सफ़ल ब्रिक्स सम्मेलन ब्रिक्स और विकासशील देशों के समान हितों का कार्य करेगा. चीन इस सम्मेलन को सफ़ल बनाने में सकारात्मक भूमिका निभाएगा."

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात के सवाल को वांग ने टालते हुए कहा कि भाग लेने वाले देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत और बैठकें होती हैं, साथ ही उस राष्ट्र की इच्छा पर भी यह निर्भर करता है.

भारत-चीन के बेहतर रिश्तों की कामना करते हुए वांग ने कहा कि आशा है कि एशिया का कायाकल्प और अपने क्षेत्रों के विकास के लिए भारत और चीन मिलकर काम करेंगे.

डोकलाम: भारत और चीनी मीडिया का अलग-अलग राग

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