कनाडा और पंजाब में उलझी वो दर्दनाक प्रेम कहानी

  • 12 सितंबर 2017
मिट्ठू सिद्धू और जस्सी सिद्धू इमेज कॉपीरइट MITTHU SIDHU

बहुचर्चित जस्सी सिद्धू हत्याकांड में कनाडा के सुप्रीम कोर्ट ने जस्सी की मां मलकीत कौर सिद्धू और मामा सुभजीत सिंह बदेशा को भारत के हवाले करने का फ़ैसला सुनाया है.

8 नवंबर 2000 को लुधियाना के गांव काउंके खोसा के निवासी सुखविंदर सिद्धू उर्फ़ मिट्ठू सिद्धू और उनकी पत्नी जस्सी सिद्धू पर जानलेवा हमला हुआ था.

हमले में जस्सी की मौत हो गई थी. हमलावर मिट्ठू को मरा समझ कर छोड़ गए थे.

जस्सी के पति मिट्ठू ने बीबीसी को अपनी प्रेम कहानी सुनाई.

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"मुझे आज भी जान का ख़तरा है. मैं मरने से नहीं डरता. मरने से पहले जस्सी के कातिलों को सलाखों के पीछे देखना चाहता हूं.

कहां कनाडा में पैदा हुई लड़की और कहां मैं पंजाब के साधारण ग़रीब परिवार का लड़का. 23 साल बाद भी मैं जस्सी के साथ बिताए हर पल को दिल में ताज़ा एहसास की तरह महसूस करता हूं.

1994 के नवंबर महीने की ठंडी शाम थी. जब मैं जगरांव के कमल चौक के नज़दीक टेम्पू स्टैंड पर गांव जाने के लिए दोस्तों के साथ खड़ा था, मेरी उम्र तब 20 साल की होगी.

कुछ इतनी ही साल की सुंदर और लंबे कद वाली एक लड़की दूर से आती दिखी. वो लड़की कनाडा की जस्सी थी, जो अपनी मां और मामी के साथ आ रही थी.

वो अपने ननिहाल गांव काउंके कला जाने के लिए टेम्पू पर सवार हो गई. मैं भी अपने गांव काउंके खोसा जाने के लिए टेम्पू के पीछे लटक गया.

उस समय जस्सी टेम्पू की पिछली सीट पर बैठी थी, जहां मैं लटका था.

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कैसे परवान चढ़ा प्रेम?

जस्सी के ननिहाल वाले घर की आलीशान कोठी का पिछला दरवाज़ा मेरे दो कमरों के कच्चे मकान वाले साधारण घर की तरफ़ खुलता था.

आजाद ख़्यालों वाली जस्सी पंजाब के रीति-रिवाजों से अनजान, ख़ुद स्कूटर चलाकर अगले दिन मेरे घर के सामने पहुंची. स्कूटर बंद होने पर वो हेल्प-हेल्प चिल्लाने लगी.

मैं बाहर गया, स्कूटर स्टार्ट कर दिया और धीरे से बोल डाला- "मैं गल्ल करनी मंगदा..." (मैं बात करना चाहता हूं)

उसने "हां" में जवाब दिया और जाते हुए अगले दिन जगरांव में मिलने का वादा किया.

जस्सी से जुदाई और फिर शादी

अगले दिन जगरांव में हम लोग मिले पर कोई बात नहीं हुई और शाम को गांव लौट आए. बाद में हम पड़ोस के घर में मिलने लगे.

एक हफ़्ते की मुलाकात के बाद जस्सी ने बताया कि वह कनाडा जा रही है. मेरा दिल बैठ गया और जस्सी को भी जाने का मन नहीं था.

जस्सी ने अपना पासपोर्ट फाड़ दिया. पासपोर्ट न होने की वजह से उसे 15 दिन और रुकना पड़ा.

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वीडियोः बंटवारे के बीच एक अधूरी प्रेम कहानी

पढ़ने में होशियार जस्सी का सपना कनाडा में वकील बनने का था. वो शादी करके मेरे साथ ज़िंदगी बिताना चाहती थी.

वो अक्सर कनाडा में एक अलग घर लेकर मेरे साथ रहने की बातें करती थी. जब ये 15 दिन बीत गए, जस्सी कनाडा चली गई.

फिर चिट्ठियों का लंबा सिलसिला शुरू हुआ. चिट्ठी अंग्रेज़ी में हुआ करती थी तो मुझे किसी और से पढ़वानी पड़ती थी.

महीने में एक बार जगरांव के एक पीसीओ पर जस्सी का फ़ोन आया करता था. इस तरह पांच साल बीत गए.

1999 में जस्सी पंजाब आई और दो महीने रही. हमने गुरुद्वारे में शादी कर ली और फिर शादी का रजिस्ट्रेशन करवाया.

सबकुछ बदल गया

कहानी में ख़तरनाक मोड़ उस समय आया, जब जस्सी ने कनाडा जाकर मुझे वहां बुलाने के लिए पेपर अप्लाई किया.

इसके बाद कनाडा से आए दस्तावेज़ों के आधार पर मुझे और मेरे साथियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया.

जस्सी इतनी बहादुर लड़की थी कि जब उसे ये सब पता चला तो मई 2000 में वह पंजाब आ गई. लुधियाना में जज के सामने पेश होकर मुझे और मेरे दोस्तों को बरी करवाया.

इसके बाद जस्सी और मैं रिश्तेदारों के यहां छिपककर रहने लगे. 12 जून को रायकोट में शादी की पार्टी रखी गई थी. पर इसके चार दिन पहले ही गांव नारी के थाना अमरगढ़ के पास हम पर हमला हो गया."

मुझे बुरी तरह पीटा गया. दूसरे दिन मैं और जस्सी (उनका गला रेत दिया गया था) नाले में पड़े मिले. जस्सी की मौत हो गई थी.

इस मामले में भारत में बादेशा और सिद्धू समेत 13 लोगों पर आरोप लगाए गए. तीन लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा भी हुई

एक अंतरराष्ट्रीय जांच के बाद साल 2012 में इन दोनों को कनाडा में भारतीय अधिकारियों और कनाडाई पुलिस की मदद से गिरफ्तार किया गया. भारत इन पर हत्या के आरोप में मामला चलाना चाहता है.

साल 2014 में ब्रिटिश कोलंबिया कोर्ट के एक जज ने इन्हें प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया.

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