नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए सोशल मीडिया अब सिरदर्द क्यों?

  • 12 सितंबर 2017
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एक समय था जब मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया का इस्तेमाल जनमत के निर्माण और विरोधियों पर हल्ला बोलने के लिए किया करते थे. 2012 के गुजरात विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने सोशल मीडिया का बेहतरीन इस्तेमाल किया और दोनों चुनावों में जीत दर्ज की.

पांच साल बाद गुजरात में फिर से चुनाव होने वाले हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़ास और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को युवाओं को अहमदाबाद में संबोधित किया और उन्हें सोशल मीडिया पर भाजपा विरोधी अभियान से बचने की सलाह दी.

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भाजपा विरोधी प्रोपेगैंडा कांग्रेस चला रही है. शाह का ये बयान सोमवार को सुर्खियों में छाया रहा. उन्होंने युवाओं को तथ्यों के आधार पर वोट देने की अपील की.

यह सबकुछ चकित करने वाला है. आखिर गुजरात में पांच सालों में ऐसा क्या बदल गया? जिस भाजपा के लिए सोशल मीडिया चुनाव का अहम हथियार हुआ करता था, आज वही भाजपा इससे लोगों को बचने की सलाद दे रही है.

सोशल मीडिया पर दुनिया भर के गुजराती 'विकास' का मज़ाक बना रहे हैं. 2012 विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने 'दिशा बदलें, दशा बदलें' का नारा लगाया था. जवाब में भाजपा 'सबका साथ, सबका विकास' लेकर आई, जिसे लोकसभा चुनावों के लिए भी इस्तेमाल किया गया.

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सोशल मीडिया और बीजेपी

भाजपा ने उस समय तत्कालीन केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ 'गुजरात के साथ अन्याय' अभियान की भी शुरुआत की थी. टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया पर इसके ऐड चलाए गए थे जो पार्टी के लिए फ़ायेदमंद साबित हुए.

तकनीक और मल्टीमीडिया के ज़रिए नरेंद्र मोदी ने उस वक्त एक बार में कई जगहों पर लोगों को संबोधित भी किया था. 2007 विधानसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी का मुखौटा भी खूब चला था.

पार्टी के चुनावी वादों की ज़मीनी हक़ीक़त और चुनावी प्रोपेगैंडा के बीच जैसे-जैसे अंतर बढ़ता जा रहा है, सत्ताधारी पार्टी को सोशल मीडिया पर उपहास का सामना करना पड़ रहा है.

अभी सोशल मीडिया पर 'विकास पगला गया है' चलन में है. मूसलाधार बारिश के बाद अहमदाबाद की सड़कों में हुए गड्ढों की तस्वीर ने स्थानीय मीडिया में जगह बनाई. गड्ढों की वजह से दुर्घटना के शिकार लोगों के अस्पताल पहुंचने की ख़बर भी छपी.

जिसके बाद ठेकेदारों और सरकार के बीच भ्रष्टाचार के मुद्दे को हवा मिली.

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'असल मुद्दों से दूरी'

सड़कों की मरम्मत करने की बजाए सरकार ने अपनी पूरी ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन में झोंक दी है. वह इस सप्ताह बुलेट ट्रेन की नींव रखने गुजरात आने वाले हैं. उनके साथ जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी होंगे.

पिछले तीन विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी ने राज्य के लोगों से मेट्रो ट्रेन का वादा किया था, जो अभी तक नहीं मिल सकी है. ऐसे में बुलेट ट्रेन लोगों को छलावा लग रहा है जिसका सोशल मीडिया पर मज़ाक बनाया जा रहा है.

वास्तविकता यह है कि सोशल मीडिया पर चल रहा 'विकास पगला गया है' अभियान लोगों का है, जिसे आगे कांग्रेस इस्तेमाल कर सकती है.

भाजपा तकनीक का इस्तेमाल करने और सोशल मीडिया से जनमत का निर्माण करने वाली पार्टी रही है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी बाद में इसके महत्व को समझा.

सोमवार को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जीतू भगनानी के जन्मदिन के मौके पर अहमदाबाद पहुंचे.

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दोनों मंत्रियों ने आगामी चुनाव को लेकर कई सभाएं कीं जिसमें नेताओं के साथ-साथ आईटी टीम को भी संबोधित किया गया.

दोनों मंत्रियों को राज्य में होने वाले चुनाव का प्रभार दिया गया है.

पूर्व में हुए जाति आधारित आंदोलनों में जिस तरह से सोशल मीडिया का इस्तेमाल हुआ है, यह भाजपा के लिए एक चुनौती की तरह होगी.

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