'सरकार ही बताए आधार कहां ज़रूरी, कहां नहीं'

  • 13 सितंबर 2017
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भारत में फिलहाल आधार कार्ड को लेकर चर्चा गर्म है. हाल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले लगाई रोक के बावजूद सरकार द्वारा 'आधार' को 92 कल्याणकारी योजनाओं में अनिवार्य बना दिया गया था.

इसी 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने आधार पर एक फ़ैसले में कहा था कि इसे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता है. हालांकि कोर्ट का कहना था कि बैंक खाता खोलने जैसी दूसरी सुविधाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने से सरकार को नहीं रोका जा सकता है.

प्राइवेसी पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का क्या असर होगा?

आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कब और क्या-क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए आधार अनिवार्य करने के प्रावधान का सिद्धांतत: समर्थन किया. हालांकि कोर्ट का कहना था कि संविधान पीठ के इस प्रावधान को चुनौती देनेवाली मुख्य याचिका पर अंतिम फ़ैसला लेने तक, इसे अनिवार्यत: लागू नहीं किया जा सकता.

आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में क्या है

इस विवाद को एक बार फिर से हवा दे दी है कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के एक ट्वीट ने जो उन्होंने 10 सितंबर को किया. उन्होंने ट्वीट किया कि जब आप अपने फ़ोन नंबर को अपने आधार कार्ड के नंबर के साथ जोड़ेगें तो टेलिकॉम कंपनी आपके आधार डेटा को स्टोर नहीं करेंगी.

उनके इस ट्वीट ने अनजाने ही निजता, डेटा सुरक्षा और धार को बाध्यकारी बनाने को लेकर चर्चा छेड़ दी जिस पर नज़र डालना बेहद दिलचस्प है और इस चर्चा के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाता है.

कैसे रुकेगी आपके आधार डेटा की चोरी?

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नाग नाम के एक ट्विटर हैंडल ने उनसे पूछा, "तो फिर आप लोग मुझे अपने आधार कार्ड को सभी सुविधाओं से जोड़ने के लिए क्यों कह रहे हैं? क्या ये वाकई ज़रूरी भी है."

इसके उत्तर में रविशंकर प्रसाद का जवाब आया "कोई भी आपको अपना आधार कार्ड सभी सुविधाओं के साथ जोड़ने के लिए बाध्य नहीं कर रहा है."

पैन और आधार लिंक ना किया तो क्या होगा?

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इसके बाद अश्विनी का सवाल आया "वोडाफोन मुझे अपना आधार कार्ड फोन नंबर से जोड़ने को कह रहा है. कृपया उनसे कहें कि ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता."

रविशंकर प्रसाद ने कहा, "आपको सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अपने फोन नंबर को आधार कार्ड के साथ जोड़ना होगा."

अश्विनी ने सवाल किया, "इसके लिए मुझे वोडाफोन के स्टोर में जाने की क्या ज़रूरत है? ऑनलाइन ये काम क्यों नहीं हो सकता?"

'आधार' वाले निलेकणी की इंफ़ोसिस में वापसी

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रविशंकर प्रसाद के दफ्तर ने मामले में और जानकारी जोड़ते हुए लिखा, "आपको अपने बायोमेट्क ऑथेन्टिफिकेशन के लिए स्टोर में जाना होगा. ऐसा करने पर असामाजिक तत्वों अगर फोन नंबर इस्तेमाल कर रहे हैं तो उससे छुटकारा पाया जा सकेगा."

इस पर वैभव अग्रवाल ने सवाल किया, "तो ऐसा करने के लिए उन्हें हम अपना बायोमेट्रिक डेटा क्यों दें? पैन की ही तर्ज पर वो हमें एक वेबसाइट का लिंक क्यों नहीं दे देते जहां हम अपने आधार कार्ड लिंक कर सके. स्कीम में ही मूलभूत गड़बड़ियां हैं."

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वसुंधर ने लिखा, "सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि आधार को बाध्य नहीं किया जा सकता."

संजय बापना ने लिखा, "ये सरकार कितनी कन्फ्यूज़्ड है."

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इस चर्चा में अधिक जानकारी जोड़ते हुए तकनीकी मामलों के जानकार प्रशांतो के रॉय ने लिखा "आधार कार्ड को मोबाइल नंबर के साथ जोड़ना टेलिकॉम विभाग का मैन्डेट है. उसका उद्देश्य मोबाइल पहचान और अन्य कामों के लिए उपभोक्ता के बारे में जानकारी की जांच करना है."

इसके बाद अन्ना नाम के एक ट्विटर हैंडल ने सवाल किया "तो फिर मेडिसिन में स्नोकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए आधार को क्यों बाध्यकारी बनाया जा रहा है."

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करन अरोड़ा ने लिखा, "एयरटेल ने आधा कार्ड ना जोड़ने पर मुझे सेवाएं देने से मना कर दिया है."

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आधार स्लेव नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, "यहां पर पहचान पत्र को बायोमेट्रिक से जोड़ा जा रहा है जो घातक है क्योंकि तकनीक में लगातार विकास हो रहा है और डेटा को कॉपी करना आसान हो रहा है."

"अब किसी का ज़िंदगी को नर्क बनाने के लिए उसके डेटा का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है. साथ ही निजी कंपनियां भी वेरिफिकेशन करते वक्त आपका बायोमेट्रिक डेटा चुरा रही हैं."

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आदित्य कुलकर्णी ने कानून मंत्री से गुज़ारिश की, "मंत्री जी क्या आप साफ-साफ ट्वीट कर देंगे कि अपने सिम कार्ड से आधार नंबर को जोड़ना अनिवार्य नहीं है, इससे कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा."

रविशंकर प्रसाद ने इसके बाद जवाब दिया, "सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार फरवरी 2018 तक अपने फोन नंबर को आधार कार्ड के साथ जोड़ना अनिवार्य है."

इस पर विपुल विवेक ने लिखा, "सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक नवंबर में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच इस बारे में सुनवाई करेगी."

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चर्चा में अब भारती एयरटेल के कस्टमर केयर हैंडल को आना पड़ा.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की बात तो नहीं कही लेकिन लिखा कि, "सरकार के आदेश (गवर्नमेंट डिरेक्टिव) के अनुसार सभी उपभोक्ताओं को अपने फोन नंबरों को आधार कार्ड के साथ जोड़ना ही होगा."

इस थ्रेड पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि स्कूल, बैंक और अन्य मोबाइल सेवाएं भी लगातार बैंक खातों के साथ और फोन संबर के साथ आधार नंबर जोड़ने के लिए बाध्य कर रही हैं.

कुछ ने इससे संबंधित संदेशों के स्क्रीनशॉट भी कानून मंत्री के लिए पोस्ट किए.

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कईयों ने मंत्री से सवाल किया है कि अगर बैंक से या फोन नंबर से आधार कोर्ड ना जोड़ने पर बैंक खाता बंद करने या मोबाइल कंपनी फोन नंबर बंद किए जाने की बात करे तो क्या ये हम पर दवाब डलना नहीं है.

चर्चा में चंदन मुखोपाध्याय ने इस कन्फ्यूज़न को सुलझाने का प्रयास किया है.

उन्होंने मंत्री से गुज़रिश की और लिखा, "कृपया आप सर्वसाधारण के हित में एक विज्ञापन जारी करें कि किस काम के लिए आधार ज़रूरी है और किस काम के लिए नहीं है."

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