भारत में बुलेट ट्रेन की राह में क्या हैं चुनौतियां

  • 14 सितंबर 2017
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अहमदाबाद से मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का शिलान्यास हो गया है. मोदी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत तो हो गई है, लेकिन इतनी बड़ी परियोजना में ज़रूरी है कि इसकी प्लानिंग बेहतर हो.

भारत में कई बार ये ग़लती करते हैं हमलोग कि प्लानिंग में बहुत कम वक़्त लगाते हैं और इसी वजह से काम पूरा होने में लंबा समय लग जाता है.

हमलोग शुरुआत में बहुत जल्दबाज़ी करते हैं. मैं कहूंगा कि इसकी प्लानिंग बेहतर और सटीक होनी चाहिए.

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दूसरी बात, इसमें अच्छी बात ये है कि निर्धारित फ़ंडिंग है. पैसे की कोई कमी नहीं होगी, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट फ़िक्सिंग का काम करना पड़ेगा. उसके दस्तावेज़ तैयार करने पड़ेंगे. उसकी परिस्थितियां तैयार करनी पड़ेंगी और योग्यता का स्तर तय करना पड़ेगा. इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट पेपर तैयार करना बड़ी चुनौती है.

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इसमें क्योंकि ज़मीन में काम कम है, ज़्यादातर काम ज़मीन के ऊपर है, एलिवेटेड ट्रैक होगा, लेकिन जहां भी ज़मीन अधिग्रहण की ज़रूरत पड़नी है उसकी प्रक्रिया भी अभी से शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि अधिग्रहण में सबसे ज़्यादा समय लग सकता है.

यह सरकार पर निर्भर करता है कि ये काम कब शुरू होता है. अगर सरकार इसमें रुचि लेती है तो कोई समस्या नहीं होगी. रेल परिवहन सबसे ज़्यादा अनुकूल परिवहन है.

पर्यावरण पर इसका न के बराबर असर होगा. सिर्फ़ अधिग्रहित ज़मीन का उचित मुआवज़ा देना होगा. अगर सही मुआवज़ा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार बेहतर क़दम उठाती है तो इस रास्ते में कोई बाधा नहीं आएगी.

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ख़ासतौर से इस पर सरकार को रुचि लेनी होगी और जिस तरह काम शुरू हुआ है सरकार ज़रूर रुचि लेगी. यह भारत का शो-केस प्रोजेक्ट होगा.

हालांकि कई बार अचानक मुश्किलें आने लगती हैं. लोग विरोध जताने लगते हैं. कुछ ऐसी ज़मीनें आ जातीं हैं जहां धार्मिक स्थल होते हैं, विवादित जगहें होती हैं. यह प्लानिंग का हिस्सा है कि उससे प्रोजेक्ट को दूर रखा जाए और विवादित जगहें न हों.

इसके लिए अच्छे इंजीनियर और प्रोजेक्ट मैनेजर्स की ज़रूरत होगी तो उन लोगों को चिन्हित किया जाए और उन्हीं को लिया जाए. उसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए. जो सबसे अच्छे लोग हों उन्हें इसमें रखा जाए.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से बातचीत पर आधारित)

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