चीन मामले में भारत पर जापान को भरोसा नहीं?

  • 15 सितंबर 2017
जापान और भारत इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारत के दौरे पर आए जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो अबे और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में फिर से ऊर्जा भरने की कोशिश की है.

जापानी मीडिया में शिंज़ो अबे के इस दौरे को चीन से सामना करने के लिए द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों के तौर पर देखा जा रहा है. गुरुवार को गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दोनों राष्ट्रप्रमुखों ने अमरीका के साथ मिलकर सुरक्षा गठजोड़ों को और मजबूत करने पर सहमति जताई है.

शिंज़ो अबे के भारत दौरे को लेकर निक्केई एशियन रिव्यू ने लिखा है, ''दोनों नेताओं ने आत्मसुरक्षा के लिहाज से भारतीय और अमरीकी नेवी की जापानी समुद्र में साझा युद्धाभ्यास पर सहमति ज़ाहिर की है. अबे और मोदी जापान में बने यूएस-2 एम्फिबीअस एयरक्राफ्ट की ख़रीद, जो अब तक अधर में लटकी है, उस भी बात जारी रखने के लिए तैयार हो गए हैं.''

मोदी जापान से क्यों चाहते हैं टू-प्लस-टू ?

बुलेट ट्रेन के साथ जापान धक्का लगाने वाले 'पुशर' भी देगा!

नज़रिया: चीन के 'वन बेल्ट वन रोड' का ऐसे जवाब देंगे भारत और जापान?

जापानी पीएम का भारत में भव्य स्वागत

इमेज कॉपीरइट Getty Images

चीन को नज़र में रख भारत और जापान की दोस्ती?

निक्केई ने लिखा है, ''अबे ने मोदी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जापान, भारत और अमरीका के बीच एक मज़बूत गठजोड़ बनेगा. यह संबध आपसी भरोसे के आधार पर होगा.'' निक्केई एशियन रिव्यू ने लिखा है कि मोदी ने समुद्र में चीन की विस्तारवादी नीति को लेकर नौवहानों की स्वतंत्र आवाजाही पर प्रतिबद्धता जतायी है.

अख़बार के मुताबिक दोनों देशों ने नौसैनिक सुरक्षा के मोर्चे पर अमरीका के साथ मिलकर काम करने का संकल्प जताया है. हालांकि निक्केई टाइम्स ने यह आशंका ज़ाहिर की है क्या भारत चीन के वन बेल्ट वन रोड के ख़िलाफ़ कठोर क़दम उठाने को तैयार है?

निक्केई एशियन रिव्यू ने लिखा है, ''भारत समुद्र में चीन के विस्तारवाद के ख़िलाफ़ सुरक्षा मानकों को चाक चौबंद करना चाहता है लेकिन ज़मीन भारत अब भी चीन के साथ गहरे सबंध बनाए हुए है. यह अब भी खुला सवाल है कि भारत और जापान क्या चीन के वन बेल्ट वन रोड के ख़िलाफ़ समान और कड़ा रुख अपनाएंगे?''

इमेज कॉपीरइट Getty Images

चीन को लेकर भारत पर जापान को भरोसा नहीं?

जापान के विदेश मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने निक्केई एशियन रिव्यू से कहा, ''इस चिंता से इनकार नहीं किया जा सकता है कि जब जापान मजबूती से चीन के ख़िलाफ़ आएगा तो भारत अपना क़दम पीछे खींच लेगा.''

निक्केई एशियन रिव्यू ने यह भी लिखा है कि भारत अपने पूर्वोत्तर के राज्यों में जापान की मदद से कई परियोजनाओं को ज़मीन पर उतारना चाहता है. निक्केई ने लिखा है, ''हिन्द महासागर में चीन के विस्तार के मद्देनज़र यह काफ़ी अहम है. भारत और जापान इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को समुद्र में भी उतारने की तैयारी में हैं. दोनों देशों के बीच श्रीलंका में लिक्विफाइड प्राकृतिक गैस इम्पोर्ट टर्मिनल बनाने की भी तैयारी कर रहे हैं. श्रीलंका में चीन पहले से ही कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है.''

उधर जापान टाइम्स ने भी लिखा है कि का भारत और जापान ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर सुरक्षा संबंधों को और बढ़ाने पर सहमति ज़ाहिर की है. अबे ने यह भी कहा है कि मोदी उत्तर कोरिया पर नीति में बदलाव के लिए तैयार हो गए हैं. जापान टाइम्स ने अपने देश के सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि भारत जापान से यूएस-2 एम्फिबीअस एयरक्राफ़्ट चाहता है लेकिन ऊंची कीमत के कारण मामला अटका हुआ है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

190 अरब यान का क़र्ज़

जापान टाइम्स ने लिखा है, ''जापान भारत से सुरक्षा संबंधों में सुधार चाहता था. अबे और मोदी की मुलाक़ात में संबंधों को और बेहतर बनाने पर समझौते हुए हैं. अबे ने भारत में रेलवे और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों के लिए कम ब्याज़ दर पर 190 अरब यान का क़र्ज़ देने का वादा किया है. जापान भारत को हाई स्पीड रेल के लिए टेक्नॉलजी भी मुहैया कराएगा.''

जापान टाइम्स ने लिखा है, ''दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग समझौता है और इस समझौते के तहत जापान भारत को परमाणु पावर टेक्नॉलजी दे सकता है. उम्मीद की जा रही है दोनों देशों के बीच इस मोर्चे पर भी सहयोग बढ़ेगा. हालांकि इस मामले में आलोचकों का कहना है कि भारत ने अतीत में परमाणु परीक्षण किए हैं और उसने अब तक परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है ऐसे में जापान की तरफ़ से मुहैया कराई जाने वाली न्यूक्लियर टेक्नॉलजी के सैन्य इस्तेमाल की भी आशंका बनी रहेगी.''

इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारत-जापान के संबंध से चीन को ख़तरा नहीं?

वहीं शिंज़ो अबे के भारत दौरे पर चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत और जापान के गहरे संबंध से चीन को कई ख़तरा नहीं है. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत और जापान दोस्ती की चाहत रखते हैं लेकिन यह हक़ीक़त में तब्दील नहीं हो पाती है.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''चीन का जापान और भारत से व्यापक ट्रेड संबंध हैं. इसके मुक़ाबले भारत और जापान के बीच व्यापार संबंध काफ़ी बौने हैं. जापान और भारत बिना किसी गंभीर सोच के चीन को चुनौती नहीं दे सकते हैं. भारत में आजकल चीन के ख़िलाफ़ राष्ट्रवाद की हवा चल रही है. इसे भारतीय मीडिया और बढ़ाने में लगा है. भारत और जापान से चीन सामरिक टकराव की चाहत नहीं रखता है.''

उधर पाकिस्तान के टीवी चर्चों में भी शिंज़ो अबे के भारत दौरे और बुलेट ट्रेन का ज़िक्र छाया रहा. टीवी बहस में कुछ पाकिस्तानी पत्रकारों ने कहा कि उनके मुल्क ने भी चीन से बुलेट ट्रेन की गुजारिश की थी लेकिन उसने मज़ाक उड़ाया कि आपलोग इसे वहन नहीं कर सकते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे