भारत-जापान मिलकर चीन को जवाब देना चाहते हैं?

  • 15 सितंबर 2017
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जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे की भारत यात्रा को दोनों देशों की मीडिया ने बहुत कवरेज दिया है. आबे और मोदी की मुलाकात को भारत-जापान की दोस्ती में नया अध्याय बताया जा रहा है.

दोनों देशों की मीडिया ने भारत-जापान की इस दोस्ती को चीन के ख़िलाफ़ एक अहम कदम के रूप में भी प्रदर्शित किया है.

जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे 13 सितंबर को गुजरात पहुंचे थे जहां उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री के साथ मिलकर भारत में पहली बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखी थी.

इसके साथ ही भारत-जापान सालाना बैठक में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किए गए. दोनों देशों ने अपने रिश्तों में और अधिक गहराई लाने के लिए सहमति दर्ज कराई.

भारतीय मीडिया ने भी बुलेट ट्रेन का खुलकर स्वागत किया, एक भारतीय समाचार पत्र ने बुलेट ट्रेन को भारत के लिए 'गेम चेंजर' बताया.

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चीन का प्रभाव

अंग्रेजी समाचार पत्र हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा, 'किसी भी अन्य देश ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए जापान जैसी प्रतिबद्धता नहीं दिखाई.'

अखबार लिखता है कि जापान की इस नीति के पीछे उसके चीन के साथ बिगड़ते रिश्ते असल वजह है.

इसी तरह जापान के सबसे बड़े समाचार पत्र योमीओरी शिमबून ने एक लेख में बताया कि भारत और जापान के शीर्ष नेताओं की मुलाकात चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने की कोशिश है. चीन हिंद महासागर के साथ-साथ पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में लगातार अपना विस्तार कर रहा है.

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जापान के एक और बड़े अखबार असाही शिमबून में लिखा है, ''चीन जिस तरह से हिंद महासागर में अपना क्षेत्र का विस्तार कर रहा है, ऐसे में भारत और जापान के नेता मिलकर अपनी समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना चाह रहे हैं.''

वहीं जापान की क्योदो न्यूज़ एजेंसी ने भी आबे और मोदी की मुलाकात को बहुत महत्वपूर्ण बताया है. 15 सितंबर की रिपोर्ट में लिखा गया है कि भारत और जापान मिलकर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहते हैं.

इसी तरह की रिपोर्ट भारतीय समाचार पत्र मिंट में भी प्रकाशित हुई है.

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रणनीतिक साझेदारी

भारत के प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र द टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी ख़बर में लिखा है कि जिस गर्मजोशी से प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी पीएम का स्वागत किया, वह मोदी की कूटनीति का एक अहम हिस्सा है.

ख़बर में आगे लिखा है कि भारत-जापान की यह दोस्ती दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक विकास में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी, हालांकि रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्तों के लिए और भी कई चीजों का सही रहना आवश्यक है.

एक अन्य अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र द ट्रिब्यून ने भारत-जापान दोस्ती को 'दो समुद्रों का संगम' बताया है.

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित जयंत जैकब के लेख में भारत-जापान की 12वीं सालाना बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में एक तरह से पारंपरिक गर्माहट और व्यक्तिगत कूटनीति के रूप में महत्वपूर्ण बताया गया है.

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Image caption मोदी-आबे की फाइल फोटो

मेक इन इंडिया को बढ़ावा

भारत के प्रतिष्ठित समाचार पत्र द इंडियन एक्सप्रेस में भारत में हाई स्पीड ट्रेन की शुरुआत को गेम चेंजर बताया है.

समाचार पत्र ने लिखा है कि जापान के साथ तकनीक के इस विस्तार से भारत में मेक इन इंडिया परियोजना को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि अखबार इस बात पर भी ध्यान दिलाना नहीं भूलता कि भारतीय रेलवे में अभी कई सुधारों की गुंजाइश बाकी है.

हिंदी समाचार पत्र हिंदुस्तान का भी यही कहना है कि बुलेट ट्रेन परियोजना से मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा. अखबार ने लिखा है कि इस परियोजना के साथ भारत न सिर्फ तकनीक के एक नए युग में प्रवेश करेगा बल्कि मेक इन इंडिया के सपनों को भी नई उड़ान मिलेगी.

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इसी के साथ हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि इस परियोजना से प्रधानमंत्री मोदी की छवि और अधिक सकारात्मक हो जाएगी.

अखबार लिखता है कि बुलेट ट्रेन परियोजना जापान के लिए भी बेहद जरूरी है, क्योंकि चीन और दक्षिण कोरिया के बाजार से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण जापान को भारत के रूप में एक बड़ा सहयोगी मिला है.

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