अब कैसी हैं फ्लैट से रिहा हुई 54 बिल्लियां

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

कई सालों से पुणे के दो फ्लैट में बंद 50 से अधिक बिल्लियों की ज़िंदगी अब तेजी से सामान्य होती जा रही है. इन बिल्लियों को 11 सितंबर को दो फ्लैट से रेस्क्यू किया गया था.

पुणे के रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी नेहा पंचमिया ने बीबीसी को बताया, ''लगभग सभी बिल्लियों की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है, बिल्ली के दो बच्चे अपनी मां का साथ पाकर खुश हैं, हालांकि एक बिल्ली बहुत बीमार है.''

नेहा ने बताया, ''हमने बिल्लियों के लिए दो बाढ़े बनवाये हैं, उन्हें फ्लैट्स में जिस तरह रखा गया था उसके मुकाबले ये बाढ़े काफी बड़े हैं, दोनों बाढ़े 25 फीट लंबे और 20 फीट चौड़े हैं.

वे आगे बताती हैं, ''सभी बिल्लियों को डायरिया और डिहाइड्रेशन था. उनकी उम्र भी अलग-अलग है, कुछ बिल्लियां प्रेग्नेंट हैं, तो कुछ मोटापे की शिकार.

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पड़ोसी थे परेशान

बिल्लियों के साथ इस तरह की क्रूरता बरतने के लिए दो बहनों दीपिका और संगीता कपूर के ख़िलाफ़ पुणे के कोंढवा थाने में मामला दर्ज किया गया है.

ब्रम्हा होराइजन सोसायटी के निवासी रवि कामत बताते हैं ''कपूर बहनों ने साल 2010 में बिल्लियां पालना शुरू किया, इससे हम सभी को परेशानी होने लगी. उन बहनों के पड़ोस में रहनेवाले शख्स को एलर्जी की शिकायत हो गयी और वे बीमार रहने लगे. जब भी कपूर बहनों को समझाने की कोशिश की जाती, तो वे आक्रामक हो जातीं और झगड़ा करने लगतीं. उनके पिता का देहांत हो चुका है, दोनो बहनें अपनी मां के साथ रहती हैं.''

सोसायटी के निवासियों ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की. पुणे के कोंढवा थाने के जांच अधिकारी संतोष तासगांवकर बताते हैं, ''इस मामले में अभी तक किसी को अरेस्ट नहीं किया गया है, अंतरिम जमानत के लिए आरोपियों ने अदालत में अर्ज़ी दी है, उस पर क्या फैसला आता है यह देखना होगा. दोनों बहनों ने बिल्लियां वापस पाने के लिए भी नोटिस दिया है.

किराए के फ्लैट में भी बंद की बिल्लियां

मेहेर मथरानी पशु कल्याण अधिकारी के तौर पर केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय के पशु कल्याण बोर्ड से जुडी हैं. वे बताती हैं, ''इन बहनों ने साल 2010, 2011 और 2014 में सोसायटी के लोगों द्वारा परेशान किये जाने की शिकायत पशु कल्याण बोर्ड में की थी. तब इनके पास 9 या 10 बिल्लियां थीं.''

मेहेर बताती हैं, ''दोनों बहनों को अधिक बिल्लियां ना पालने, कुछ बिल्लियों को दत्तक देने और उनकी अच्छी देखभाल करने की सलाह दी गयी थी. इसके साथ ही सोसायटी के लोगों को भी सलाह दी गयी थी कि, पशु प्रेमियों को परेशान ना करें. लेकिन, बिल्लियों की तादाद बढ़ती गई. इस बीच कुछ पशुप्रेमियों ने बिल्लियों को पशुओं के रेस्क्यू सेंटर में रखने या उन्हें अडॉप्ट करने की पेशकश की लेकिन कपूर बहनों ने इसे ठुकरा दिया था.''

कपूर बहनें इन दिनों अपने फ्लैट में बिल्लियों को बंद कर, किराए के दूसरे फ्लैट में कुछ और बिल्लियों के साथ रह रही थीं.

बहनों के ख़िलाफ़ केस दर्ज

मेहेर बताती हैं, ''कुछ और शिकायतें पता चलने के बाद मैं स्वयं उनसे मिलने गयी. कपूर बहनों ने बताया कि, लोग उन्हें बेवजह परेशान कर रहे हैं. लेकिन मैंने देखा कि, वहां बहुत सारी बिल्लियां थीं, उनमे कुछ बीमार लग रही थीं, ज़्यादातर बिल्लियां जंगली या आवारा जैसी थीं जो सब तरफ घूम या दौड़ रही थीं.''

मेहेर कहती हैं, ''मैंने उन बहनों को कहा कि या तो बिल्लियों को रेस्क्यू सेंटर ले जाने दें नहीं तो हमें कार्रवाई करनी होगी. पुलिस ने पहले ही कह दिया था कि, वे एफआईआर दर्ज कर बिल्लियों को हटाएंगे. यदि पुलिस खुद एफआईआर करती तो उन्हें किसी भी सरकारी रेस्क्यू सेंटर में ले जाती. इसलिए मैं खुद शिकायतकर्ता बनी ताकि बिल्लियों को बेहतर रेस्क्यू सेंटर ले जाया जा सके.''

पूरे फ्लैट में बदबू से बुरा हाल था

मेहेर आगे बताती हैं, ''बड़ी बहन तो एक बार बिल्लियां सौंपने के लिए तैयार हो गई, लेकिन फिर शायद छोटी बहन से बात करने के बाद उसने भी आक्रामक रूख अपना लिया. एफआईआर लिखने के बाद हम पुलिस के साथ दोबारा उनके फ्लैट पर गए तो उन्होंने दरवाज़ा खोलने से इंकार कर दिया. वे भीतर से चीख और चिल्ला रहीं थीं. हम उन्हें समझाने की कोशिश करते रहे और फिर उन बहनों ने अपने वकील को बुला लिया.''

मेहेर के अनुसार, ''जब पहला फ्लैट खोला गया तो वहां बदबू से बुरा हाल था. फर्श पर बिल्लियों की उल्टियां, मल और तमाम तरह की गंदगी थी. सैंकड़ो कॉकरोच, चूहे थे. उस वन बैडरूम फ्लैट में हर जगह दुर्गंध थी. वहां बिल्लियों के ढंग से बैठ पाने की भी जगह नहीं थी.''

''पुलिस ने दूसरा फ्लैट खुलवाया तो वहां 29 बिल्लियाँ और बिल्ली के दो बच्चे मिले. बच्चे महज़ 2 हफ्ते के होंगे. बिल्लियों के खानपान के खर्चे के चलते दोनों बहनों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा होगा. आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों के चलते वे बिल्लियों की देखभाल ठीक से नही कर पा रहीं थीं.

जिस किरायेवाले फ्लैट में दोनों बहनें रहती हैं, उसके मकानमालिक के जरिए वह फ्लैट खुलवाया गया. वहां से भी 25 बिल्लियां बरामद हुईं. कुल 54 बिल्लियां और दो बच्चों को बरामद कर रेस्क्यू चैरिटेबल ट्रस्ट ले जाया गया.

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