जब अटल बिहारी वाजपेयी बैलगाड़ी से पहुंचे थे संसद

  • 18 सितंबर 2017
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार आज भले ही पेट्रोल, डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी को जायज ठहरा रही हो, लेकिन 44 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी मुद्दे पर इंदिरा गांधी की सरकार के ख़िलाफ़ हल्ला बोला था.

वाजपेयी पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन में बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे और अपना विरोध दर्ज किया था.

न्यूयॉर्क टाइम्स के 12 नंवबर, 1973 को प्रकाशित अंक के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को संसद में विरोधी दलों के गुस्से का सामना करना पड़ा था.

इस दिन संसद में छह सप्ताह तक चलने वाले शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई थी.

दक्षिण और वामपंथी पार्टियों ने बढ़ी हुई कीमतों को रोकने में असर्मथता का आरोप लगाते हुए सरकार से इस्तीफ़े की मांग की थी.

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जन संघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और दो अन्य सदस्य बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे. इनके अलावा कई अन्य साइकिल से संसद आए थे.

वे देश में पेट्रोल और डीजल की कमी में इंदिरा गांधी का बग्घी से यात्रा करने का विरोध कर रहे थे.

इंदिरा गांधी इन दिनों लोगों के बीच पेट्रोल बचाने का संदेश देने के लिए बग्घी से यात्रा कर रही थीं.

तेल का उत्पादन करने वाले मध्य-पूर्व देशों ने भारत को निर्यात होने वाले पेट्रोलियम पदार्थों में कटौती कर दी थी. जिसके बाद इंदिरा गांधी की सरकार ने तेल की कीमतों में 80 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी कर दी थी.

1973 में तेल संकट तब आया था जब तेल निर्यात करने वाले देशों के संगठन यानी ओपेक ने दुनिया भर में तेल आपूर्ति में कटौती कर दी थी.

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Image caption केजे अल्फोंस

वर्तमान स्थिति

अभी देश में पेट्रोल की कीमतें 70 रुपए के पार कर गई है. जिसपर केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस ने पिछले दिनों कहा था कि जिनके पास कार और बाइक है वे ही पेट्रोल ख़रीद रहे हैं. जाहिर है, वे लोग भूखे नहीं मर रहे हैं.

उन्होंने कहा था कि जो लोग टैक्स दे सकते हैं, सरकार उनसे वसूली ज़रूर करेगी.

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उद्योग संगठन एसोचैम भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने के पक्ष में है. एसोचैम द्वारा जारी नोट में कहा गया है, "जब कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल थी, तब देश में पेट्रोल 71.51 रुपये लीटर बेचा जा रहा था. अब कच्चे तेल की कीमत घटकर 53.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है. उपभोक्ता तो यह पूछेंगे ही कि अगर बाज़ार से कीमतें निर्धारित होती हैं तो इसे 40 रुपये लीटर पर बेचा जाना चाहिए."

वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं, "एक उपभोक्ता के लिहाज से देखें तो जो पैसा हम-आप प्रति लीटर दे रहे हैं, उसका क़रीब आधा पैसा सरकार के पास पहुंच रहा है."

वो बताते हैं कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर ज़रूर है, लेकिन उपभोक्ता जो पैसा चुकाते हैं और उसका आधा हिस्सा सरकार के पास पहुंचता है.

सरकार को कितना मुनाफ़ा

ठाकुरता ने कहा, "सरकार को फ़ायदा हो रहा है, लेकिन इसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. अर्थशास्त्रियों का मोटा-मोटी अनुमान है कि पिछले तीन साल में कम से कम पांच लाख करोड़ रुपए सरकार के पास इस तरह जमा हुए हैं."

वो आगे कहते हैं, "ऐसी स्थिति में कोई सरकार इस मुनाफे का विरोध नहीं कर सकती है. चाहे सत्ता भाजपा के पास हो या कांग्रेस के पास."

हालाँकि भाजपा का कहना है कि पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जुड़ी हुई हैं. भाजपा ने पेट्रोल कीमतों पर उठ रहे सवालों का जवाब सोशल मीडिया पर दिया है.

भाजपा के ऑफिशियल ट्वीटर हैडंल पर कीमतों की बढ़ोतरी पर तर्क भी पेश किए गए थे. धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल की बढ़ी कीमतों को लेकर कई ट्वीट्स किए. प्रधान ने लिखा, ''जापान, स्विटज़रलैंड, सिंगापुर, यूके, जर्मनी, फ्रांस समेत 68 देशों में भारत के मुकाबले पेट्रोल की कीमत ज़्यादा है.''

ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से पेश किए गए, जिनका लब्बोलुआब ये कि पेट्रोल की कीमतें सिर्फ भारत में नहीं बढ़ रही हैं या भारत में पेट्रोल की कीमतें कम बढ़ रही हैं.

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