क्या मुस्लिम महिलाओं से संवाद कर पाएंगे प्रधानमंत्री मोदी?

  • 19 सितंबर 2017
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाला उनका संवाद कार्यक्रम विवादों के घेरे में आ गया है.

मदरसों के प्रबंधन से जुड़े लोग जहां प्रशासन पर मुस्लिम महिलाओं को संवाद में भेजने का दबाव बनाने का आरोप लगा रहे हैं. वहीं, कुछ महिलाओं का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम में न जाने के लिए धमकियां दी जा रही हैं.

इस बीच, प्रशासन ने अपना वो आदेश वापस ले लिया है जिसमें मदरसों से कहा गया था कि वो कम से कम 25 महिलाओं को इस कार्यक्रम में भेजें.

प्रधानमंत्री 22 और 23 सितंबर को वाराणसी के दौरे पर रहेंगे. मोदी के इस दौरे में तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ मुखर रहने वाली कुछ मुस्लिम महिलाओं से संवाद करने का कार्यक्रम रखा गया था.

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रास नहीं आया आदेश

मुस्लिम महिलाओं को जुटाने की ज़िम्मेदारी ज़िला प्रशासन ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग पर डाली तो विभाग ने इसके लिए मदरसों को पत्र लिखा. लेकिन मदरसा प्रबंधकों को ये आदेश रास नहीं आया और उन्होंने इसके लिए साफ़ तौर पर मना कर दिया.

मदारिसे अरबिया के वाराणसी के ज़िला सेक्रेटरी नवी जां ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हमने किसी को मना नहीं कर रखा है, जिसे मन हो वो जाए और हम मना करने वाले होते भी कौन हैं? लेकिन यदि इसके लिए दबाव बनाया जाएगा, तो हमें वो भी मंज़ूर नहीं है. हमने यही बात बता दी कि हम इस आदेश को नहीं मान सकते हैं."

वाराणसी में 20 मदरसे ऐसे हैं जो सरकार के अनुदान से चलते हैं. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने इन्हीं मदरसों के प्रबंधन से ये अपील की थी. लेकिन विरोध के बाद इस आदेश को फिलहाल वापस ले लिया गया है.

हालांकि, विभाग का कहना है कि ऐसा प्रधानमंत्री का कार्यक्रम तय न होने के चलते लिया गया है. वाराणसी के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी छुट्टी पर हैं और ज़िले के समाज कल्याण अधिकारी आरके यादव उनका काम देख रहे हैं. इस बारे में उन्होंने सिर्फ़ ये प्रतिक्रिया दी कि अभी कार्यक्रम तय नहीं है इसलिए इस आदेश को टाल दिया गया है, जब कार्यक्रम तय होगा तब देखा जाएगा.

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जाने को लेकर धमकियां

इस बीच, कुछ मुस्लिम महिला संगठनों ने इसमें जाने में दिलचस्पी दिखाई. लेकिन उनमें से कुछ महिलाओं का कहना है कि उन्हें वहां जाने से रोकने के लिए धमकियां मिल रही हैं. वाराणसी में एक महिला संगठन से जुड़ी नाज़नीन अंसारी कहती हैं कि उनके संगठन की क़रीब 150 महिलाएं इस कार्यक्रम में जाएंगी, लेकिन उन्हें तरह-तरह की धमकियां मिल रही हैं.

नाज़नीन कहती हैं कि ये धमकियां उन्हें तब भी मिल रही थीं जब उन लोगों ने तीन तलाक़ के विरोध में आवाज़ उठाई थी.

बहरहाल, कार्यक्रम को लेकर अभी भी उहापोह की स्थिति है. लेकिन जानकारों का कहना है कि अब जब मुस्लिम महिलाएं ही नहीं होंगी तो प्रधानमंत्री संवाद किससे करेंगे. ऐसे में बहुत संभव है कि प्रधानमंत्री के इस संवाद कार्यक्रम को शायद रद्द कर दिया जाए.

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