डेरा सच्चा सौदा के स्कूल-कॉलेजों से क्यों भाग रहे छात्र?

  • 20 सितंबर 2017
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Image caption डेरा सच्चा सौदा

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के जेल जाने के बाद सिरसा के डेरे में बंद पड़े शिक्षण संस्थान करीब एक महीने बाद प्रशासन की अनुमति के बाद खोले गए हैं लेकिन इनमें ना के बराबर छात्र स्कूल-कॉलेज पहुंच रहे हैं.

25 अगस्त को पंचकुला की अदालत ने साध्वियों से यौन शोषण के मामले में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था. उसके बाद राज्य में हिंसा हुई थी जिसमें कई लोगों की मौतें हुईं थीं और सिरसा में कर्फ्यू लगा दिया गया था.

उससे पहले 24 अगस्त से ही शिक्षण संस्थान बंद पड़े थे.

डेरे में दो कॉलेज और पांच शिक्षण संस्थान चलाए जाते हैं, जिनमें करीब 7 हज़ार छात्र पढ़ते हैं.

कर्फ्यू हटाए जाने के बावजूद डेरे में स्कूल कॉलेज नहीं खोले गए थे. लेकिन प्रशासन ने पिछले शनिवार को ही शिक्षण संस्थान खोलने की अनुमति दी थी. कुछ अभिभावक बच्चों को स्कूल तो छोड़ आए, लेकिन उन्हें दिन भर बच्चों की चिंता सताती रही.

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गांव रसूलपुर के निवासी हरनेक चंद ने बताया कि उनकी बेटी डेरा के स्कूल में पढ़ती थी. डेरा प्रकरण की वजह से स्कूल बंद थे, जिस वजह से पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो रही थी. साथ ही डेरे में उपजे विवाद के बाद उन्होंने स्कूल बदलने का मन बनाया और बेटी का दाख़िला दूसरे स्कूल में करवा दिया.

वहीं, अलीकां गांव के साहबराम ने बताया कि उनका पोता डेरे के स्कूल में पढ़ रहा है, लेकिन अब वे भी स्कूल बदलने का मन बना चुके हैं.

रतिया के कृष्ण कंबोज ने बताया कि उनका बेटा डेरा स्थित शिक्षण संस्थान का छात्र है और वहां हॉस्टल में था. मगर प्रकरण के बाद से हर रोज़ घर से ही पढ़ने जाता है.

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ऐसे ही गांव अलीकां के परिमजीत ने भी बेटे को हॉस्टल से वापस बुला लिया है क्योंकि हॉस्टल के नियमों में सख्ती शुरू हो गई है और अब परिवार के केवल उन्हीं सदस्यों को ही मिलने दिया जा रहा है जिनके फोटो संस्थान के पास हैं.

उन्होंने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने उन्हें आश्वस्त किया है कि डेरा प्रकरण के चलते जितने दिनों के लिए विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, उसकी कमी को अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर पूरा किया जाएगा.

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डेरा स्थित शिक्षण संस्थान खुलने के बाद से स्थिति ये है कि जितने विद्यार्थी किसी कक्षा में पंजीकृत हैं, उससे एक तिहाई विद्यार्थी ही स्कूल पहुंच रहे हैं.

कई अभिभावकों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनका विश्वास डेरा के स्कूलों से उठ चुका है और अब वे अपने बच्चों का दाख़िला दूसरे स्कूलों में करवाने की सोच रहे हैं. अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन को फ़ीस के रूप में मोटी रकम भी दी थी. लेकिन जब से डेरा का विवाद बढ़ा है तब से करीब एक माह तक स्कूल बंद ही रहे, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई.

अभिभावकों को डर है कि कभी ये स्कूल हमेशा के लिए बंद करने पड़े तो बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा. इस संबंध में जब डेरा में स्कूल प्रबंधन कमेटी और स्कूल प्रिंसिपल से बातचीत करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो सका.

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