ममता को हाईकोर्ट का झटका, मुहर्रम पर भी होगा मूर्ति विसर्जन

  • 21 सितंबर 2017
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पश्चिम बंगाल में 30 सितंबर की रात के बाद से मूर्ति विसर्जन पर लगी रोक को कलकत्ता हाईकोर्ट ने हटा दिया है.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने दुर्गा की मूर्तियों को विजय दशमी के बाद से हर दिन विसर्जन करने का आदेश दिया है. विसर्जन के दौरान मुसलमानों का त्योहार मुहर्रम भी पड़ रहा है.

दरअसल एक अक्तूबर को मुहर्रम पड़ने के कारण पश्चिम बंगाल सरकार ने 30 सितंबर को रात दस बजे के बाद दुर्गा मूर्ति विसर्जन करने पर रोक लगा दी थी.

विजयदशमी 30 सितम्बर को है और मुहर्रम का जुलूस एक अक्तूबर को निकलेगा.

कोर्ट ने पुलिस से कहा है कि वह मूर्ति विसर्जन और मुहर्रम के जुलूस के रास्ते सुनिश्चित करे.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा, "सरकार कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में नागरिकों का धार्मिक अधिकार नहीं छीन सकती, जब तक ऐसा करने की ठोस वजहें न हों."

हिंदू-मुसलमान के बीच बंटवारे की लकीर मत खींचिए: पं. बंगाल सरकार से हाई कोर्ट

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ममता सरकार ने तय की थी समय सीमा

ममता सरकार के आदेश को एक जनहित याचिकाओं के ज़रिये हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी.

बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई हुई, जहां अदालत इस फ़ैसले के पक्ष में दी गई पश्चिम बंगाल सरकार की दलीलों से सहमत नहीं दिखा.

पश्चिम बंगाल सरकार से कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस फ़ैसले के लिए ठोस दलीलें पेश करने के लिए कहा है.

बंगाल में जुलूस और विसर्जन पर तनातनी

भीड़ की सियासत की शिकार होतीं ममता बनर्जी?

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हाई कोर्ट ने क्या कहा

  • राज्य किसी नागरिक के धार्मिक अधिकारों का हनन महज इस आधार पर नहीं कर सकता कि इससे क़ानून और व्यवस्था का संकट पैदा हो जाएगा.
  • हिंदुओं और मुसलमानों को मिलजुलकर रहने दीजिए. उनके बीच बंटवारे की कोई लकीर मत खींचिए.
  • विजयादशमी के एक दिन बाद मुहर्रम होने से क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने में दिक्कत होगी, केवल इस आधार पर मूर्ति विसर्जन रोका नहीं जा सकता.
  • किसी सार्वजनिक रैली में ममता बनर्जी ने कहा था कि हिंदू और मुस्लिम पश्चिम बंगाल में मिलजुलकर रहते हैं. हाई कोर्ट ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की मुखिया की बात सुनिए न कि पुलिस अफ़सरों की.
  • लोगों को अपने धार्मिक रीति-रिवाजों पर अमल करने का पूरा हक है, चाहे वे किसी भी समुदाय के हों.
  • सरकार के पास जब तक इस बात पर यकीन करने का कोई ठोस आधार न हो कि दोनों समुदाय मिलजुलकर नहीं रह सकते, वो इस पर कोईं पाबंदी नहीं लगा सकती है.
  • कोर्ट सरकार के प्रशासनिक अधिकारों में दख़ल नहीं दे रही है लेकिन सरकार को ये स्पष्ट तौर पर बताना होगा कि उसे क़ानून और व्यवस्था का संकट पैदा होने की आंशका क्यों सता रही है?

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